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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

नर्मदा उद्गम मंदिर (शोणदेश शक्तिपीठ), अमरकंटक

Narmada Udgam Temple (Shondesh Shaktipeeth), Amarkantak

अमरकंटक, मध्य प्रदेश माँ नर्मदा; भैरव – भद्रसेन निःशुल्क प्रवेश

नर्मदा उद्गम मंदिर मध्य प्रदेश के अनूपपुर ज़िले में मैकल पर्वत श्रेणी पर बसे तीर्थ नगर अमरकंटक में स्थित है। यहीं के नर्मदा कुंड से पवित्र नर्मदा नदी निकलती है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार यह शोणदेश शक्तिपीठ है, जहाँ सती का दायाँ नितंब गिरा था – यहाँ की शक्ति नर्मदा और भैरव भद्रसेन हैं। इसी क्षेत्र में कालमाधव पीठ (बायाँ नितंब, शक्ति काली, भैरव असितांग) भी माना जाता है, इसलिए अमरकंटक को दो शक्तिपीठों वाला क्षेत्र कहा जाता है।

माँ नर्मदा का महत्व

नर्मदा को भारत की सात पवित्र नदियों में गिना जाता है और इसे भगवान शिव की पुत्री माना जाता है – इसलिए इसका एक नाम रेवा और दूसरा शांकरी है। प्रचलित कहावत है कि गंगा में स्नान से जो पुण्य मिलता है, वह नर्मदा के दर्शन मात्र से मिल जाता है। नर्मदा के तट पर मिलने वाले पत्थरों को नर्मदेश्वर शिवलिंग के रूप में बिना प्राण-प्रतिष्ठा के पूजा जाता है। उद्गम परिसर में नर्मदा कुंड के चारों ओर सफ़ेद पत्थर के अनेक छोटे-बड़े मंदिर हैं, जिनमें माँ नर्मदा का मुख्य मंदिर सबसे प्रमुख है।

नर्मदा परिक्रमा

नर्मदा संसार की उन गिनी-चुनी नदियों में है जिसकी पूरी परिक्रमा की जाती है। परिक्रमावासी अमरकंटक से चलकर नदी के एक तट से अरब सागर तक और दूसरे तट से वापस अमरकंटक तक लगभग 2,600 किमी की पैदल यात्रा करते हैं, जिसमें परंपरागत रूप से तीन वर्ष, तीन महीने और तेरह दिन लगते हैं। परिक्रमा के दौरान नदी को पार नहीं किया जाता। बहुत से परिक्रमावासी परिक्रमा शुरू करने और पूरी करने के लिए नर्मदा उद्गम आते हैं।

अमरकंटक के अन्य तीर्थ

  • कलचुरी कालीन मंदिर: उद्गम परिसर के पीछे कर्ण मंदिर, पातालेश्वर महादेव और अन्य प्राचीन मंदिर, जो कलचुरी राजाओं के समय के माने जाते हैं।
  • कपिलधारा: लगभग 6 किमी दूर नर्मदा का पहला बड़ा जलप्रपात – मान्यता है कि यहाँ कपिल मुनि ने तपस्या की। पास में दूधधारा प्रपात।
  • सोनमुडा: सोन नदी का उद्गम, जहाँ से घाटी का सुंदर दृश्य दिखता है।
  • माई की बगिया: मान्यता है कि यहाँ माँ नर्मदा पुष्प चुनने आती थीं।

प्रमुख उत्सव

  • नर्मदा जयंती (माघ शुक्ल सप्तमी): सबसे बड़ा उत्सव – कुंड पर दीपदान और विशाल मेला।
  • महाशिवरात्रि पर मेला और विशेष पूजा।
  • नवरात्रि में शक्तिपीठ के रूप में देवी की आराधना।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से दोपहर 12:00 बजे और शाम 4:00 से रात 9:00 बजे तक
  • आरती: सुबह और संध्या – संध्या आरती विशेष दर्शनीय

सर्दियों में अमरकंटक में काफ़ी ठंड होती है, गर्म कपड़े साथ रखें।

मुख्य आकर्षण

  • नर्मदा कुंड – नर्मदा नदी का उद्गम स्थल।
  • माँ नर्मदा मंदिर और परिसर के अनेक मंदिर।
  • कलचुरी कालीन मंदिर समूह – कर्ण मंदिर, पातालेश्वर महादेव।
  • कपिलधारा और दूधधारा जलप्रपात।
  • सोनमुडा (सोन नदी का उद्गम) और माई की बगिया।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन, छत्तीसगढ़ (लगभग 40 किमी) या अनूपपुर जंक्शन (लगभग 70 किमी)।
  • सड़क मार्ग: पेंड्रा रोड, अनूपपुर और बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से बस और टैक्सी।
  • हवाई मार्ग: बिलासा देवी केवट हवाई अड्डा, बिलासपुर (लगभग 120 किमी) या जबलपुर (लगभग 230 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अमरकंटक शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि के अनुसार शोणदेश पीठ में सती का दायाँ नितंब गिरा था, जिसकी शक्ति नर्मदा और भैरव भद्रसेन हैं। इसी क्षेत्र में कालमाधव पीठ (बायाँ नितंब) भी माना जाता है।
नर्मदा नदी का उद्गम कहाँ है?
नर्मदा नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के अनूपपुर ज़िले में अमरकंटक के नर्मदा कुंड से होता है। यहाँ से नर्मदा पश्चिम की ओर बहकर गुजरात में अरब सागर में मिलती है।
नर्मदा परिक्रमा कहाँ से शुरू होती है?
बहुत से परिक्रमावासी नर्मदा परिक्रमा अमरकंटक से शुरू करते हैं और नदी के दोनों तटों की लगभग 2,600 किमी पैदल यात्रा करके यहीं पूरी करते हैं। ओंकारेश्वर से भी परिक्रमा शुरू करने की परंपरा है।
अमरकंटक में क्या-क्या देखें?
नर्मदा कुंड, कलचुरी कालीन कर्ण मंदिर, कपिलधारा और दूधधारा जलप्रपात, सोनमुडा (सोन नदी का उद्गम), माई की बगिया और सर्वोदय जैन मंदिर प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।
अमरकंटक का निकटतम रेलवे स्टेशन कौन सा है?
अमरकंटक का निकटतम रेलवे स्टेशन छत्तीसगढ़ का पेंड्रा रोड है, जो लगभग 40 किमी दूर है। वहाँ से बस और टैक्सी मिल जाती हैं।

नर्मदा उद्गम मंदिर (शोणदेश शक्तिपीठ), अमरकंटक इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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