हरसिद्धि माता मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास, रुद्र सागर के किनारे स्थित माँ हरसिद्धि का प्राचीन मंदिर है। प्रचलित मान्यता के अनुसार यहाँ सती की कोहनी गिरी थी, इसलिए इसे शक्तिपीठ माना जाता है। तंत्र चूड़ामणि की सूची में उज्जैन का पीठ अवंती नाम से आता है (ऊपरी होंठ, शक्ति अवंती, भैरव लंबकर्ण) – इस पीठ को कुछ परंपराएँ हरसिद्धि से और कुछ गढ़कालिका मंदिर से जोड़ती हैं। उज्जैन में महाकाल ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ का एक साथ होना इस नगरी को विशेष बनाता है।
हरसिद्धि नाम की कथा
स्कंद पुराण के अवंती खंड से जुड़ी कथा के अनुसार चंड और प्रचंड नाम के दो असुर कैलास पर उपद्रव करने लगे। भगवान शिव के स्मरण पर देवी चंडी ने उनका वध किया। प्रसन्न होकर शिव ने कहा कि आपने “हर” (सब) कुछ “सिद्ध” कर दिया – तभी से देवी हरसिद्धि कहलाईं। देवी को सब कार्य सिद्ध करने वाली माना जाता है, इसलिए भक्त हर शुभ कार्य से पहले यहाँ मन्नत माँगते हैं।
राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी
माँ हरसिद्धि उज्जैन के प्रतापी राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी मानी जाती हैं। लोककथा के अनुसार विक्रमादित्य ने देवी को प्रसन्न करने के लिए ग्यारह बार अपना शीश काटकर अर्पित किया और हर बार देवी ने उसे फिर से जोड़ दिया। गर्भगृह में महालक्ष्मी और महासरस्वती के बीच गहरे सिंदूरी रंग में माँ हरसिद्धि (अन्नपूर्णा स्वरूप) विराजती हैं, और वहीं श्री यंत्र की पूजा होती है।
दीपस्तंभ और दीपमाला
मंदिर के सामने दो ऊँचे दीपस्तंभ हैं, जो मराठा काल के माने जाते हैं। नवरात्रि और विशेष पर्वों पर इन पर हज़ारों दीप जलाए जाते हैं – संध्या के समय दीपों से जगमगाते स्तंभ उज्जैन का सबसे सुंदर दृश्य माने जाते हैं। श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर दीपमाला जलवाने का संकल्प भी लेते हैं, जिसके लिए पहले से बुकिंग होती है।
प्रमुख उत्सव
- चैत्र और शारदीय नवरात्रि: दीपस्तंभों पर दीपमाला, विशेष श्रृंगार और भारी भीड़।
- सिंहस्थ कुंभ के समय लाखों श्रद्धालु महाकाल के साथ हरसिद्धि के दर्शन करते हैं।
- महाशिवरात्रि और श्रावण में महाकाल आने वाले यात्री भी यहाँ अवश्य आते हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात 10:00 बजे तक
- आरती: सुबह लगभग 6:30 और संध्या लगभग 7:00 बजे
संध्या आरती के समय दीपस्तंभों पर दीप जलाने का दृश्य देखने लायक होता है (विशेष रूप से नवरात्रि में)।
मुख्य आकर्षण
- माँ हरसिद्धि – महालक्ष्मी और महासरस्वती के बीच गहरे सिंदूरी रंग की प्रतिमा।
- दो दीपस्तंभ – नवरात्रि में हज़ारों दीपों से जगमगाते हैं।
- श्री यंत्र – गर्भगृह में पूजित।
- महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (लगभग 500 मीटर)।
- रुद्र सागर और बड़े गणेश जी का मंदिर।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: उज्जैन जंक्शन (लगभग 2 किमी) – देश के कई शहरों से ट्रेनें।
- सड़क मार्ग: इंदौर से लगभग 55 किमी; शहर में ऑटो और ई-रिक्शा।
- हवाई मार्ग: देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा, इंदौर (लगभग 55 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हरसिद्धि मंदिर में सती का कौन सा अंग गिरा था?
हरसिद्धि माता किसकी कुलदेवी हैं?
हरसिद्धि मंदिर के दीपस्तंभ कब जलाए जाते हैं?
महाकाल मंदिर से हरसिद्धि मंदिर कितनी दूर है?
हरसिद्धि नाम का क्या अर्थ है?
हरसिद्धि माता मंदिर, उज्जैन इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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अमरकंटक, मध्य प्रदेश नर्मदा उद्गम मंदिर (शोणदेश शक्तिपीठ), अमरकंटक माँ नर्मदा; भैरव – भद्रसेन
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उज्जैन, मध्य प्रदेश
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
शिव
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खंडवा, मध्य प्रदेश
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
शिव
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तिरुवन्नामलई, तमिलनाडु अरुणाचलेश्वर मंदिर, तिरुवन्नामलई भगवान शिव (अरुणाचलेश्वर / अण्णामलैयार) – अग्नि लिंगम; देवी उण्णामुलै अम्मन
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जयपुर, राजस्थान
श्री गोविंद देव जी मंदिर
श्री राधा कृष्णा
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अहोबिलम मंदिर