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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री गोपीनाथ मंदिर, निंगथौखोंग (मणिपुर)

Shri Gopinath Mandir, Ningthoukhong

बिष्णुपुर, मणिपुर भगवान श्रीकृष्ण (गोपीनाथ) निःशुल्क प्रवेश

श्री गोपीनाथ मंदिर मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के निंगथौखोंग कस्बे में स्थित भगवान कृष्ण का वैष्णव मंदिर है। यहाँ कृष्ण की पूजा गोपीनाथ – गोपियों के स्वामी – के रूप में होती है। इंफाल से टिड्डिम रोड पर दक्षिण की ओर, लोकटक झील के क्षेत्र में बसा यह मंदिर मणिपुर के बड़े मंदिरों में गिना जाता है और आसपास के गाँवों के वैष्णव समाज का प्रमुख केंद्र है।

विग्रह की कथा

मान्यता है कि गोपीनाथ का विग्रह एक विशाल वृक्ष के तने के भीतरी भाग से गढ़ा गया था। स्थानीय परंपरा के अनुसार यह विग्रह पहले दूसरे स्थान पर पूजित था और बाद में निंगथौखोंग लाया गया, जहाँ आज तक इसकी सेवा-पूजा हो रही है। प्रचलित जानकारी के अनुसार वर्तमान मंदिर 1905 में मणिपुर के महाराजा के समय बना। विग्रह के पहले के इतिहास को लेकर अलग-अलग कथाएँ सुनाई जाती हैं।

मंदिर का स्वरूप

मंदिर एक विशाल श्वेत भवन है, जिसके भीतर राधा और गोपियों के साथ कृष्ण की रासलीला के दृश्य चित्रित हैं। मणिपुरी वैष्णव परंपरा के अनुसार यहाँ संकीर्तन और नाम-जप का विशेष महत्व है।

प्रमुख उत्सव

  • जन्माष्टमी: मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव।
  • होली (याओशांग), दीपावली और दुर्गा पूजा पर भी भीड़ रहती है।

आसपास के दर्शन

निंगथौखोंग से लोकटक झील और मोइरांग पास हैं। इंफाल लौटते समय राजमहल परिसर का श्री गोविंदजी मंदिर और कांचीपुर का राधा रमण मंदिर देखे जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से रात 8:00 बजे तक (दोपहर में कुछ समय पट बंद रह सकते हैं)
  • आरती: प्रातः और संध्या

जन्माष्टमी और रास के समय विशेष आयोजन होते हैं।

मुख्य आकर्षण

  • श्री गोपीनाथ का विग्रह।
  • मंदिर के भीतर रासलीला के चित्र।
  • पास में लोकटक झील और मोइरांग।
  • इंफाल का श्री गोविंदजी मंदिर (लगभग 36 किमी)।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: इंफाल से टिड्डिम रोड पर लगभग 30–36 किमी; बस और टैक्सी मिलती हैं।
  • हवाई मार्ग: इंफाल हवाई अड्डा, लगभग 28 किमी।
  • रेल मार्ग: निकटतम बड़ा रेलवे स्टेशन दीमापुर (नागालैंड), इंफाल होकर पहुँचना होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

निंगथौखोंग का गोपीनाथ मंदिर किस देवता को समर्पित है?
यह मंदिर भगवान कृष्ण को उनके गोपीनाथ रूप में समर्पित है। गोपीनाथ का अर्थ है गोपियों के स्वामी।
गोपीनाथ मंदिर कब बना?
प्रचलित जानकारी के अनुसार वर्तमान मंदिर 1905 में मणिपुर के महाराजा के समय बना। गोपीनाथ का विग्रह इससे पुराना माना जाता है और पहले दूसरे स्थान पर पूजित था।
गोपीनाथ विग्रह की क्या मान्यता है?
मान्यता है कि गोपीनाथ का विग्रह एक विशाल वृक्ष के तने के भीतरी भाग से गढ़ा गया था और बाद में निंगथौखोंग लाया गया, जहाँ आज भी इसकी पूजा होती है।
निंगथौखोंग इंफाल से कितनी दूर है?
निंगथौखोंग बिष्णुपुर जिले में इंफाल से टिड्डिम रोड पर लगभग 30–36 किमी दूर है। सड़क से लगभग एक घंटा लगता है।
गोपीनाथ मंदिर में कौन से उत्सव मनाए जाते हैं?
जन्माष्टमी यहाँ का प्रमुख उत्सव है। इसके अलावा होली, दीपावली और दुर्गा पूजा के समय भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं।

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