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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री गोविंदजी मंदिर, इंफाल (मणिपुर)

Shree Govindajee Temple, Imphal

इंफाल, मणिपुर श्री राधा-गोविंद (कृष्ण); साथ में जगन्नाथ-बलभद्र-सुभद्रा और कृष्ण-बलराम निःशुल्क प्रवेश

श्री गोविंदजी मंदिर मणिपुर की राजधानी इंफाल में पुराने राजमहल (सना कोनुंग) के पास स्थित भगवान कृष्ण का प्रमुख वैष्णव मंदिर है। मणिपुरी में इसे श्री श्री गोविंदजी लाइशांग कहा जाता है। मुख्य गर्भगृह में श्री राधा के साथ भगवान कृष्ण गोविंदजी रूप में विराजमान हैं। मणिपुर के राजवंश ने अठारहवीं शताब्दी से वैष्णव परंपरा को अपनाया, और यह मंदिर उसी परंपरा का केंद्र माना जाता है – रथयात्रा (कांग) और रासलीला जैसे बड़े उत्सवों का आरंभ यहीं से होता है।

मंदिर का इतिहास

गोविंदजी के पहले मंदिर का निर्माण महाराजा नर सिंह ने 1846 में करवाया था। 1868 के भूकंप में मंदिर और विग्रहों को भारी क्षति पहुँची, जिसके बाद महाराजा चंद्रकीर्ति ने उसे पुराने रूप में फिर बनवाया। 1891 के आंग्ल-मणिपुर युद्ध के समय विग्रहों को सुरक्षा के लिए कोंगमा ले जाया गया। बाद में वर्तमान राजमहल परिसर में नया मंदिर बना, जिसे महाराजा चूड़ाचाँद के समय का माना जाता है, और 1908 में विग्रह यहाँ फिर से प्रतिष्ठित हुए।

मंदिर और विग्रह

मंदिर ऊँचे चबूतरे पर ईंट और गारे से बना है और इसका मुख पूर्व की ओर है। इसकी पहचान सोने से मढ़े दो गुंबद हैं। गर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा पथ है। मुख्य कक्ष में राधा-गोविंद, एक ओर के कक्ष में जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा तथा दूसरी ओर कृष्ण-बलराम के विग्रह हैं। सामने का दोमंजिला विशाल मंडप संकीर्तन और रासलीला के लिए उपयोग होता है।

प्रमुख उत्सव

  • कांग (रथयात्रा): आषाढ़ में जगन्नाथ जी की रथयात्रा, जिसमें भारी भीड़ जुटती है।
  • जन्माष्टमी: भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव।
  • रासलीला: होली (याओशांग), वसंत पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर मंडप में मणिपुरी रास।

प्रबंधन और आसपास के दर्शन

पहले मंदिर का प्रबंधन राजपरिवार के हाथ में था; अब पुरोहित समुदाय और शहर के प्रतिष्ठित लोगों का एक बोर्ड इसकी देखरेख करता है। मंदिर के पास ही ऐतिहासिक कांगला किला है, जो मणिपुर की प्राचीन राजधानी रहा। इंफाल आने वाले श्रद्धालु दक्षिण में कांचीपुर का राधा रमण मंदिर और बिष्णुपुर जिले में निंगथौखोंग का गोपीनाथ मंदिर भी देख सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से दोपहर 12:00 बजे और शाम लगभग 4:00 से 8:00 बजे तक
  • आरती: प्रातः, मध्याह्न और संध्या

रथयात्रा, जन्माष्टमी और रास पूर्णिमा पर समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • श्री राधा-गोविंद का मुख्य गर्भगृह।
  • सोने से मढ़े दो गुंबद और विशाल मंडप।
  • मणिपुरी रासलीला और संकीर्तन।
  • कांग (रथयात्रा) उत्सव।
  • पास में कांगला किला और इंफाल का पुराना राजमहल क्षेत्र।

कैसे पहुँचें

  • हवाई मार्ग: इंफाल (बीर टिकेंद्रजीत) हवाई अड्डा, लगभग 8 किमी।
  • रेल मार्ग: निकटतम बड़ा रेलवे स्टेशन दीमापुर (नागालैंड), सड़क से लगभग 215 किमी।
  • सड़क मार्ग: मंदिर इंफाल शहर के बीच राजमहल परिसर के पास है; शहर में ऑटो और टैक्सी मिलती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्री गोविंदजी मंदिर में किस देवता की पूजा होती है?
मुख्य गर्भगृह में श्री राधा के साथ भगवान कृष्ण गोविंदजी के रूप में विराजमान हैं। साथ के कक्षों में जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा तथा कृष्ण-बलराम के विग्रह हैं।
गोविंदजी मंदिर किसने बनवाया?
पहला मंदिर महाराजा नर सिंह ने 1846 में बनवाया था। 1868 के भूकंप के बाद महाराजा चंद्रकीर्ति ने इसे फिर बनवाया। 1891 के युद्ध के बाद विग्रह कुछ समय बाहर रहे और 1908 में वर्तमान मंदिर में प्रतिष्ठित हुए, जिसे महाराजा चूड़ाचाँद के समय का माना जाता है।
मणिपुर में रथयात्रा को क्या कहते हैं?
मणिपुर में रथयात्रा को कांग कहा जाता है। यह आषाढ़ (जून-जुलाई) में मनाई जाती है और इसका प्रमुख आयोजन श्री गोविंदजी मंदिर से होता है।
क्या गोविंदजी मंदिर में रासलीला होती है?
हाँ, होली (याओशांग), वसंत पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे अवसरों पर मंदिर के मंडप में मणिपुरी रासलीला का आयोजन होता है।
इंफाल हवाई अड्डे से गोविंदजी मंदिर कितनी दूर है?
इंफाल हवाई अड्डे से मंदिर लगभग 8 किमी दूर शहर के बीच राजमहल परिसर के पास है। टैक्सी से लगभग 20–25 मिनट लगते हैं।

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