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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

हिंगलाज माता मंदिर, लसबेला बलूचिस्तान

Hinglaj Mata Temple, Lasbela Balochistan

लसबेला, पाकिस्तान माँ हिंगलाज (कोट्टरी / हिंगुला देवी) निःशुल्क प्रवेश

हिंगलाज माता मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के लसबेला ज़िले में, मकरान तट के पास हिंगोल नेशनल पार्क के बीच एक संकरी पहाड़ी घाटी में स्थित गुफा मंदिर है। यह हिंगोल नदी के पश्चिमी तट पर है। हिंगलाज 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है – मान्यता है कि यहाँ सती का ब्रह्मरंध्र (सिर का ऊपरी भाग) गिरा था। यहाँ की शक्ति कोट्टरी (हिंगुला) और भैरव भीमलोचन हैं। कुछ ग्रंथों, जैसे बंगाल के चंडीमंगल, में यहाँ सती का माथा गिरने का उल्लेख है।

गुफा में विराजती माँ हिंगलाज

माँ हिंगलाज को दुर्गा का ही रूप माना जाता है। देवी का स्थान पहाड़ की एक प्राकृतिक गुफा में है, जहाँ कोई विशाल भवन नहीं बल्कि सादा, प्राचीन वातावरण है। राजस्थान, गुजरात और सिंध के अनेक समुदाय माँ हिंगलाज को अपनी कुलदेवी मानते हैं, और भारत में भी कई स्थानों पर हिंगलाज माता के मंदिर बने हैं। स्थानीय मुस्लिम समुदाय इस स्थान को आदर से “नानी मंदिर” कहता है।

हिंगलाज यात्रा

हर वर्ष सामान्यतः अप्रैल में चार दिन की हिंगलाज यात्रा होती है, जिसे पाकिस्तान का सबसे बड़ा हिंदू उत्सव माना जाता है। इसमें दूर-दूर से हज़ारों श्रद्धालु आते हैं। यात्रा के क्रम में श्रद्धालु पहले चंद्रकूप (चंद्रगुप) कीचड़ ज्वालामुखी के शिखर तक चढ़ते हैं, जिसे शिव का रूप माना जाता है, फिर हिंगोल नदी में स्नान करके गुफा में माता के दर्शन करते हैं। स्थानीय बलोच समुदाय यात्रियों की सेवा और सहायता करता है।

प्रमुख पर्व

  • वार्षिक हिंगलाज यात्रा (सामान्यतः अप्रैल) – सबसे बड़ा मेला।
  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि में देवी की विशेष आराधना।

यात्रा सुझाव

हिंगलाज कराची से मकरान कोस्टल हाईवे होकर लगभग चार घंटे की सड़क यात्रा पर है। क्षेत्र पहाड़ी और अर्ध-मरुस्थली है, जहाँ सुविधाएँ सीमित हैं, इसलिए पानी और ज़रूरी सामान साथ रखें और गर्मी से बचाव करें। भारत से जाने वाले श्रद्धालुओं को पासपोर्ट और पाकिस्तान का वीज़ा चाहिए; नियम बदलते रहते हैं, इसलिए वर्तमान आधिकारिक जानकारी अवश्य लें। अधिकतर लोग यात्रा के समय समूह में जाना पसंद करते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सामान्यतः दिन के समय; निश्चित समय-सारिणी नहीं
  • हिंगलाज यात्रा: हर वर्ष लगभग अप्रैल में (चार दिन का मेला)

दुर्गम क्षेत्र होने के कारण अधिकतर श्रद्धालु दिन में ही दर्शन करके लौटते हैं। यात्रा की तिथियाँ हर वर्ष बदलती हैं।

मुख्य आकर्षण

  • हिंगलाज माता की गुफा – हिंगोल नदी के किनारे संकरी घाटी में।
  • चंद्रकूप (चंद्रगुप) – कीचड़ ज्वालामुखी, जिसे शिव का रूप मानकर पूजा जाता है।
  • हिंगोल नदी में पवित्र स्नान।
  • हिंगोल नेशनल पार्क का पहाड़ी-मरुस्थली प्राकृतिक दृश्य।

कैसे पहुँचें

  • भारत से: भारतीय नागरिकों को पाकिस्तान जाने के लिए पासपोर्ट और वीज़ा आवश्यक है। धार्मिक यात्रा के नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं, इसलिए यात्रा से पहले वर्तमान आधिकारिक नियम अवश्य जाँच लें।
  • कराची से: मकरान कोस्टल हाईवे से सड़क मार्ग द्वारा लगभग चार घंटे।
  • हवाई मार्ग: निकटतम बड़ा हवाई अड्डा कराची।
  • सड़क मार्ग: यात्रा के समय कराची से बसें और समूह वाहन चलते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हिंगलाज शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
मान्यता है कि यहाँ सती का ब्रह्मरंध्र (सिर का ऊपरी भाग) गिरा था। कुछ ग्रंथों, जैसे बंगाल के चंडीमंगल, में यहाँ माथा गिरने का उल्लेख मिलता है।
हिंगलाज की शक्ति और भैरव कौन हैं?
यहाँ की शक्ति कोट्टरी (हिंगुला या हिंगलाज देवी) और भैरव भीमलोचन माने जाते हैं।
हिंगलाज यात्रा कब होती है?
हिंगलाज यात्रा हर वर्ष सामान्यतः अप्रैल में होती है और लगभग चार दिन चलती है। इसमें पाकिस्तान के कोने-कोने से हज़ारों श्रद्धालु आते हैं। सटीक तिथि हर वर्ष घोषित होती है।
चंद्रकूप क्या है?
चंद्रकूप (चंद्रगुप) हिंगोल नेशनल पार्क में स्थित एक कीचड़ ज्वालामुखी है, जिसे शिव का रूप माना जाता है। यात्री माता के दर्शन से पहले इसके शिखर तक चढ़कर भेंट अर्पित करते हैं।
हिंगलाज माता को नानी मंदिर क्यों कहते हैं?
स्थानीय मुस्लिम समुदाय इस स्थान को आदर से 'नानी मंदिर' कहता है और इस यात्रा को 'नानी की हज' भी कहा जाता है। स्थानीय लोग यात्रा में श्रद्धालुओं की सहायता भी करते हैं।

हिंगलाज माता मंदिर, लसबेला बलूचिस्तान इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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