कामाक्षी अम्मन मंदिर तमिलनाडु के कांचीपुरम नगर के बीच स्थित माता पार्वती के कामाक्षी स्वरूप का प्राचीन मंदिर है। कांचीपुरम सप्तपुरी की सात मोक्षदायिनी नगरियों में से एक है और यहाँ के मंदिरों के कारण इसे “हज़ार मंदिरों का नगर” भी कहा जाता है। कामाक्षी, मदुरै की मीनाक्षी और काशी की विशालाक्षी को देवी के तीन प्रमुख स्थान माना जाता है। कई परंपराओं में कामाक्षी मंदिर को शक्तिपीठ भी माना जाता है।
कामाक्षी नाम का अर्थ और कथा
“कामाक्षी” का अर्थ है – जिनकी आँखों (अक्षी) में प्रेम और कृपा (काम) बसती है, या जिनके नेत्र ही भक्तों की कामनाएँ पूरी करते हैं। स्थल पुराण के अनुसार माता पार्वती ने कांची में आम के वृक्ष के नीचे बालू का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की तपस्या की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें दर्शन दिए और यहीं उनका विवाह हुआ। देवी ने यहाँ भंडासुर नामक असुर का वध भी किया था।
गर्भगृह और श्रीचक्र
गर्भगृह में माँ कामाक्षी पद्मासन में बैठी हुई योग मुद्रा में विराजमान हैं। उनके चार हाथों में पाश, अंकुश, गन्ने का धनुष और पुष्प-बाण हैं – यह स्वरूप देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी का है। देवी के सामने श्रीचक्र स्थापित है, जिसे परंपरा के अनुसार आदि शंकराचार्य ने प्रतिष्ठित किया था। कांची कामकोटि पीठ और इस मंदिर का गहरा संबंध है। एक अनोखी मान्यता यह भी है कि कांचीपुरम में पार्वती का कोई और अलग मंदिर नहीं है – नगर के सभी शिव मंदिरों की शक्ति कामाक्षी ही हैं।
इतिहास और वास्तुकला
मंदिर की शुरुआत पल्लव काल (लगभग 6ठी-8वीं शताब्दी) में मानी जाती है, जब कांचीपुरम पल्लवों की राजधानी था। बाद में चोल और विजयनगर शासकों ने मंदिर का विस्तार किया। द्रविड़ शैली में बने इस मंदिर में स्वर्ण-मंडित विमान (गर्भगृह का शिखर), ऊँचे गोपुरम और पवित्र सरोवर है।
प्रमुख उत्सव
- ब्रह्मोत्सवम: तमिल माह मासी (फरवरी-मार्च) में होने वाला वार्षिक महोत्सव, जिसमें देवी की रथ यात्रा निकलती है।
- नवरात्रि: शरद नवरात्रि में नौ दिन विशेष अलंकार और पूजा।
- शुक्रवार: हर शुक्रवार को देवी की स्वर्ण रथ यात्रा मंदिर परिसर में निकलती है।
पहनावा: मंदिर में पारंपरिक वस्त्र पहनकर जाना उचित है – पुरुषों के लिए धोती/पैंट-शर्ट और महिलाओं के लिए साड़ी या सलवार-कुर्ता।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 5:30 से दोपहर 12:30 बजे तक
- दोपहर विश्राम: 12:30 से 4:00 बजे तक
- शाम: 4:00 से रात लगभग 9:00 बजे तक
शुक्रवार, नवरात्रि और ब्रह्मोत्सवम के दिनों में समय बदल सकता है।
मुख्य आकर्षण
- श्रीचक्र और देवी का पद्मासन स्वरूप।
- स्वर्ण विमान – गर्भगृह का सोने से मढ़ा शिखर।
- एकाम्बरेश्वर मंदिर (पृथ्वी तत्व का पंचभूत स्थल) और वरदराज पेरुमल मंदिर (दिव्य देशम) – दोनों पास ही।
- कैलासनाथर मंदिर: पल्लव काल का प्राचीन पत्थर मंदिर।
- कांचीपुरम सिल्क साड़ियाँ – नगर की विश्व प्रसिद्ध बुनाई।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: कांचीपुरम रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 2 किमी; चेन्नई से लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनें।
- सड़क मार्ग: चेन्नई से लगभग 75 किमी – हर कुछ मिनट में बसें।
- हवाई मार्ग: चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 65 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कामाक्षी अम्मन मंदिर में किस देवी की पूजा होती है?
कामाक्षी मंदिर में श्रीचक्र किसने स्थापित किया?
कामाक्षी मंदिर का दर्शन समय क्या है?
कांचीपुरम को सप्तपुरी में क्यों गिना जाता है?
कांचीपुरम में और कौन से प्रमुख मंदिर हैं?
कामाक्षी अम्मन मंदिर, कांचीपुरम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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कन्याकुमारी, तमिलनाडु आदिकेशव पेरुमाळ मंदिर, तिरुवट्टार भगवान आदिकेशव पेरुमाळ (शयन मुद्रा), देवी मरगतवल्ली थायार
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मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु श्री गोपालकृष्ण पेरुमाल मंदिर, तिरुक्कावळम्पाडि (तिरुनांगूर) भगवान गोपालकृष्ण (रुक्मिणी और सत्यभामा सहित), देवी सेंकमल नाच्चियार
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मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु श्री नाण्मदिय पेरुमाल मंदिर, तलैच्चंगाडु (तिरुतलैच्चंग नाण्मदियम) भगवान श्री नाण्मदिय पेरुमाल (चन्द्रशापहर पेरुमाल), देवी तलैच्चंग नाच्चियार
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कुंभकोणम, तमिलनाडु श्री सारनाथन पेरुमाल मंदिर, तिरुच्चेरै भगवान श्री सारनाथ पेरुमाल, देवी सारनायकी थायार
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कांचीपुरम, तमिलनाडु श्री वैकुण्ठ पेरुमाळ मंदिर (तिरु परमेश्वर विण्णगरम), कांचीपुरम भगवान श्री वैकुण्ठनाथ (परमपदनाथ), देवी वैकुण्ठवल्ली थायार
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तूतुकुड़ी, तमिलनाडु श्री आदिनाथ पेरुमाळ मंदिर, आऴ्वार्तिरुनगरी भगवान आदिनाथ (पोलिन्दु निन्र पिरान); देवी आदिनाथवल्ली, कुरुगूरवल्ली