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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री कुडमाडु कूत्तन पेरुमाल मंदिर, तिरु अरिमेय विण्णगरम (तिरुनांगूर)

Kudamadu Koothan Perumal Temple, Thiru Arimeya Vinnagaram (Thirunangur)

मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु भगवान कुडमाडु कूत्तन पेरुमाल (बैठी मुद्रा), देवी अमृतघटवल्ली थायार निःशुल्क प्रवेश

तिरु अरिमेय विण्णगरम सीरकाऴी के पास तिरुनांगूर गाँव में धान के खेतों से घिरा भगवान विष्णु का मंदिर है। यहाँ भगवान कुडमाडु कूत्तन के नाम से पूजे जाते हैं – अर्थात् “घड़ों के साथ नृत्य करने वाले”, जो बालकृष्ण की लीला की याद दिलाता है। देवी लक्ष्मी यहाँ अमृतघटवल्ली कहलाती हैं। यह 108 दिव्य देशमों और तिरुनांगूर के ग्यारह दिव्य देशमों में से एक है, जिसकी स्तुति तिरुमंगै आऴ्वार ने की है।

स्थल पुराण

तिरुनांगूर की मुख्य कथा के अनुसार सती के देहत्याग के बाद शिव के क्रोधपूर्ण नृत्य से ग्यारह रुद्र रूप प्रकट हुए। देवताओं की विनती पर विष्णु यहाँ आए और शिव के अनुरोध पर ग्यारह रूप धारण किए; तिरुनांगूर के ग्यारह मंदिर उन्हीं की स्मृति माने जाते हैं। मान्यता है कि उत्तंग ऋषि ने भी यहाँ तपस्या की थी।

मंदिर और विग्रह

द्रविड़ शैली के इस मंदिर में तीन स्तर का गोपुरम है। गर्भगृह के विमान को वेदामोद विमान कहा जाता है। भगवान पूर्व की ओर मुख किए बैठी मुद्रा में हैं। मंदिर का सरोवर उत्तर दिशा में है। 18वीं-19वीं सदी की रचना “108 तिरुपति अंतादि” में भी इस मंदिर का उल्लेख है।

तिरुनांगूर गरुड़ सेवै

तै मास (जनवरी–फरवरी) में तिरुमंगै आऴ्वार मंगलाशासन उत्सव मनाया जाता है। तै अमावस्या पर आऴ्वार की उत्सव मूर्ति तिरुवालि-तिरुनगरी से लाई जाती है, और गरुड़ सेवै में इस मंदिर सहित ग्यारह तिरुनांगूर मंदिरों के उत्सव विग्रह गरुड़ वाहन पर तिरुनांगूर पहुँचते हैं।

यात्रा सुझाव

  • मंदिर छोटा है और थोड़े समय के लिए खुलता है; सुबह जल्दी पहुँचना अच्छा है।
  • तिरुनांगूर के अन्य दिव्य देशम – मणिमाडक्कोविल, वैकुण्ठ विण्णगरम, तिरुत्तेट्रियम्बलम आदि – पास ही हैं।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 8:00 से 10:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 5:00 से 7:00 बजे तक
  • ध्यान दें: गाँव का छोटा मंदिर है, समय पुजारी की उपलब्धता के अनुसार बदल सकता है; उत्सव के दिनों में अधिक देर खुलता है।

मुख्य आकर्षण

  • कुडमाडु कूत्तन – पूर्वमुखी, बैठी मुद्रा में भगवान।
  • वेदामोद विमान – गर्भगृह का विमान।
  • धान के खेतों का परिवेश – शांत ग्रामीण वातावरण।
  • गरुड़ सेवै – तै मास का प्रमुख उत्सव।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: सीरकाऴी से तिरुवेंकाडु जाने वाले मार्ग पर लगभग 8–10 किमी; सीरकाऴी से ऑटो या टैक्सी सबसे सुविधाजनक है।
  • रेल मार्ग: सीरकाऴी रेलवे स्टेशन (लगभग 10 किमी); मयिलाडुतुरै जंक्शन भी विकल्प है।
  • हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 150 किमी) या चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 250 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

'कुडमाडु कूत्तन' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है 'घड़ों के साथ नृत्य करने वाले'। यह नाम भगवान कृष्ण की घड़ा-नृत्य लीला से जुड़ा है।
अरिमेय विण्णगरम में थायार का नाम क्या है?
यहाँ देवी लक्ष्मी अमृतघटवल्ली थायार के नाम से पूजी जाती हैं।
यहाँ भगवान किस मुद्रा में हैं?
भगवान पूर्व दिशा की ओर मुख किए बैठी मुद्रा में दर्शन देते हैं।
इस मंदिर से कौन से ऋषि जुड़े हैं?
मान्यता है कि उत्तंग ऋषि ने यहाँ तपस्या की थी।
तिरुनांगूर गरुड़ सेवै में क्या होता है?
तै मास में ग्यारह तिरुनांगूर मंदिरों के उत्सव विग्रह गरुड़ वाहन पर एक साथ लाए जाते हैं और तिरुमंगै आऴ्वार की उत्सव मूर्ति हंस वाहन पर आती है।

श्री कुडमाडु कूत्तन पेरुमाल मंदिर, तिरु अरिमेय विण्णगरम (तिरुनांगूर) इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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