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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री लोकनाथ पेरुमाल मंदिर, तिरुकण्णंगुडि

Sri Loganatha Perumal Temple, Thirukannangudi

नागपट्टिनम, तमिलनाडु भगवान श्री लोकनाथ पेरुमाल, देवी लोकनायकी थायार निःशुल्क प्रवेश

श्री लोकनाथ पेरुमाल मंदिर तमिलनाडु के नागपट्टिनम ज़िले में, तिरुवारूर–नागपट्टिनम राजमार्ग पर सिक्कल के पास गाँव तिरुकण्णंगुडि में स्थित है। यहाँ भगवान विष्णु लोकनाथ पेरुमाल और देवी लक्ष्मी लोकनायकी के रूप में पूजे जाते हैं। यह 108 दिव्य देशमों और पंच कृष्णारण्य क्षेत्रों में से एक है। परंपरा में इसकी स्तुति तिरुमंगै आऴ्वार के पाशुरमों से जोड़ी जाती है।

स्थल पुराण: वसिष्ठ और माखन कृष्ण

कथा के अनुसार वसिष्ठ ऋषि मक्खन से बनी कृष्ण-मूर्ति की पूजा करते थे। एक दिन कृष्ण बालक रूप में प्रकट हुए, मूर्ति खाकर भाग निकले, और वसिष्ठ उनका पीछा करते-करते यहाँ आ पहुँचे। यहाँ तपस्या कर रहे ऋषियों ने अपनी भक्ति से बालक कृष्ण को ‘बाँध’ लिया और प्रार्थना की कि भगवान यहीं रहकर भक्तों को दर्शन दें। मान्यता है कि ब्रह्मा, गौतम, भृगु और उपरिचर वसु ने भी यहाँ भगवान के दर्शन किए।

मंदिर और स्थापत्य

मंदिर का निर्माण मध्यकालीन चोलों के समय का माना जाता है, और बाद में विजयनगर तथा नायक शासकों ने इसमें योगदान दिया। पाँच-स्तरीय राजगोपुरम से होकर ध्वजस्तंभ, मुख मंडप और अर्ध मंडप के बाद गर्भगृह आता है। लोकनायकी थायार और अन्य देवताओं के सन्निधि प्राकारों में हैं, और मंदिर सरोवर परिसर के बाहर है।

आलवार और लोक-कहावतें

अधिकतर स्रोत इस दिव्य देशम की स्तुति तिरुमंगै आऴ्वार के पेरिय तिरुमोऴि के पाशुरमों में बताते हैं। तिरुकण्णंगुडि से जुड़ी एक प्रसिद्ध तमिल कहावत है – उरंगा पुळि (कभी न सोने वाली इमली), काया मगिऴ (बिना फल का मगिऴ वृक्ष), ऊरा किणरु (जिस कुएँ में पानी नहीं भरता) और तोला वऴक्कु (कभी न खत्म होने वाला मुकदमा)। स्थानीय परंपरा इन सबको तिरुमंगै आऴ्वार के यहाँ आगमन की कथाओं से जोड़ती है।

प्रमुख उत्सव

  • पंगुनि ब्रह्मोत्सव: मंदिर का सबसे प्रमुख वार्षिक उत्सव।
  • वैकुंठ एकादशी और अन्य वैष्णव पर्व।

आसपास के दर्शन

पास ही सिक्कल सिंगारवेलन का प्रसिद्ध मुरुगन मंदिर है। नागपट्टिनम का सौन्दरराज पेरुमाल मंदिर, तिरुकण्णपुरम और तिरुकण्णमंगै के दिव्य देशम भी इसी क्षेत्र में हैं।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 7:30 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 5:00 से रात 8:00 बजे तक
  • नोट: समय उत्सवों के दिनों में बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • भगवान लोकनाथ पेरुमाल – गर्भगृह में भव्य विग्रह।
  • राजगोपुरम – पाँच-स्तरीय प्रवेश गोपुरम और ध्वजस्तंभ।
  • लोकनायकी थायार – प्राकार में अलग सन्निधि।
  • लोक-कहावतें – ‘उरंगा पुळि, काया मगिऴ, ऊरा किणरु, तोला वऴक्कु’ जैसी स्थानीय कहावतें।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: तिरुवारूर–नागपट्टिनम राजमार्ग पर सिक्कल से लगभग 2 किमी; नागपट्टिनम से लगभग 10 किमी।
  • रेल मार्ग: नागपट्टिनम रेलवे स्टेशन (लगभग 10 किमी)।
  • हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 140 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तिरुकण्णंगुडि मंदिर कहाँ है?
यह मंदिर नागपट्टिनम ज़िले में तिरुवारूर–नागपट्टिनम राजमार्ग पर सिक्कल से लगभग 2 किमी दूर है।
यहाँ के देवता और थायार कौन हैं?
यहाँ भगवान विष्णु लोकनाथ पेरुमाल और देवी लक्ष्मी लोकनायकी थायार के रूप में पूजे जाते हैं।
तिरुकण्णंगुडि से जुड़ी प्रसिद्ध कहावत क्या है?
'उरंगा पुळि, काया मगिऴ, ऊरा किणरु, तोला वऴक्कु' – यानी न सोने वाली इमली, बिना फल का मगिऴ, न भरने वाला कुआँ और न खत्म होने वाला मुकदमा। स्थानीय परंपरा इन्हें तिरुमंगै आऴ्वार की कथाओं से जोड़ती है।
मंदिर की मुख्य कथा क्या है?
मान्यता है कि वसिष्ठ ऋषि की मक्खन की कृष्ण-मूर्ति खाकर बालक कृष्ण यहाँ आए और ऋषियों की प्रार्थना पर यहीं निवास करने लगे।
यहाँ का मुख्य उत्सव कौन सा है?
पंगुनि मास का ब्रह्मोत्सव यहाँ का प्रमुख वार्षिक उत्सव है।

श्री लोकनाथ पेरुमाल मंदिर, तिरुकण्णंगुडि इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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