हरशाप विमोचन पेरुमाल मंदिर तंजावुर ज़िले के गाँव तिरुक्कण्डियूर में स्थित है, जो तंजावुर और तिरुवैयारु के बीच, कावेरी और कुडमुरुट्टि नदियों के मध्य बसा है। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है। यहाँ भगवान विष्णु हरशाप विमोचन पेरुमाल – “हर (शिव) को शाप से मुक्त करने वाले” – के रूप में और देवी लक्ष्मी कमलवल्ली नाच्चियार के रूप में पूजी जाती हैं।
शिव की शाप-मुक्ति की कथा
पुराणों के अनुसार ब्रह्मा के पहले पाँच सिर थे। शिव ने उनमें से एक सिर काट दिया, और ब्रह्महत्या के दोष के कारण वह कपाल उनके हाथ से चिपक गया। शिव भिक्षाटन रूप में भटकते हुए पहले तिरुक्करम्बनूर (उत्तमर कोविल) पहुँचे, जहाँ देवी लक्ष्मी ने उनका पात्र भरा। फिर उन्होंने यहाँ के कमल पुष्करिणी में स्नान किया और कपाल उनके हाथ से छूट गया – वे पूरी तरह शाप से मुक्त हो गए। तभी से यह सरोवर कपाल तीर्थ कहलाता है। मान्यता है कि ऋषि भृगु, राजा महाबली और चंद्रदेव ने भी यहाँ अपने दोषों से मुक्ति पाई।
मंदिर और विग्रह
मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व की ओर है और ग्रेनाइट की दीवार सभी सन्निधियों और जलाशयों को घेरती है। गरुड़ मंडपम और महा मंडपम से होकर गर्भगृह तक पहुँचते हैं, जहाँ भगवान खड़ी मुद्रा में दर्शन देते हैं। पहले प्राकार में कमलवल्ली नाच्चियार की सन्निधि है और दूसरे प्राकार में नरसिंह, सुदर्शन, आण्डाल, आऴ्वारों और वेदान्त देशिक की सन्निधियाँ हैं। मंदिर के पश्चिम में कपाल मोक्ष पुष्करिणी और उसके सामने महाबली तीर्थ है। मंदिर के सबसे प्राचीन विग्रह सन्तान गोपाल और नवनीत कृष्ण माने जाते हैं।
आऴ्वार और इतिहास
नालायिर दिव्य प्रबंधम में तिरुमंगै आऴ्वार ने इस दिव्य देशम की स्तुति की है। मंदिर मध्यकालीन चोल काल का माना जाता है, जिसमें बाद में विजयनगर और मदुरै नायकों ने योगदान दिया। आधुनिक काल में 1984 और 2003 में श्रीवैष्णव आचार्यों के नेतृत्व में इसका जीर्णोद्धार हुआ।
प्रमुख उत्सव
- पंगुनि ब्रह्मोत्सव (मार्च-अप्रैल): मंदिर का सबसे प्रमुख उत्सव।
- वैकुंठ एकादशी और अन्य वार्षिक उत्सव।
आसपास के दर्शन
कण्डियूर में ही शिव का प्राचीन कण्डीश्वरर मंदिर है, जो तिरुवैयारु के सप्त स्थान मंदिरों में गिना जाता है। पास ही तिरुवैयारु का पंचनदीश्वर मंदिर और संत त्यागराज की समाधि है, और तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर भी कुछ ही दूरी पर है।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 7:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
- शाम: लगभग 4:30 से रात 8:00 बजे तक
मुख्य आकर्षण
- हरशाप विमोचन पेरुमाल – खड़ी मुद्रा में भगवान विष्णु।
- कपाल मोक्ष पुष्करिणी – जहाँ स्नान से शिव ब्रह्महत्या से मुक्त हुए।
- कमलवल्ली नाच्चियार की सन्निधि।
- नरसिंह, सुदर्शन, आण्डाल, आऴ्वार और वेदान्त देशिक की सन्निधियाँ।
- पास ही कण्डीश्वरर (शिव) मंदिर।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: तंजावुर–तिरुवैयारु मार्ग पर, तंजावुर से लगभग 10 किमी और तिरुवैयारु से कुछ ही किमी; बसें नियमित चलती हैं।
- रेल मार्ग: तंजावुर जंक्शन (लगभग 10 किमी)।
- हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 60 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हरशाप विमोचन का क्या अर्थ है?
कपाल मोक्ष पुष्करिणी की कथा क्या है?
किस आऴ्वार ने इस मंदिर की स्तुति की?
क्या यहाँ त्रिमूर्ति की सन्निधियाँ हैं?
कण्डियूर तंजावुर से कितनी दूर है?
हरशाप विमोचन पेरुमाल मंदिर, तिरुक्कण्डियूर इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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