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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

त्रिपुर सुंदरी मंदिर (माताबाड़ी), उदयपुर त्रिपुरा

Tripura Sundari Temple (Matabari), Udaipur Tripura

गोमती, त्रिपुरा माँ त्रिपुर सुंदरी; भैरव – त्रिपुरेश निःशुल्क प्रवेश

त्रिपुर सुंदरी मंदिर (माताबाड़ी) पूर्वोत्तर भारत के त्रिपुरा राज्य में उदयपुर नगर के पास एक छोटी पहाड़ी पर स्थित माँ त्रिपुर सुंदरी का प्राचीन मंदिर है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है – तंत्र चूड़ामणि के अनुसार यहाँ सती का दायाँ पैर गिरा था। यहाँ की शक्ति त्रिपुर सुंदरी और भैरव त्रिपुरेश हैं। माना जाता है कि त्रिपुरा राज्य का नाम भी इन्हीं देवी के नाम से जुड़ा है। स्थानीय लोग इस मंदिर को प्रेम से माताबाड़ी (माता का घर) कहते हैं।

कूर्म पीठ – कछुए के आकार की पहाड़ी

जिस पहाड़ी पर मंदिर बना है, उसका आकार कछुए (कूर्म) की पीठ जैसा है, इसलिए इस स्थान को कूर्म पीठ भी कहा जाता है। शाक्त परंपरा में कूर्म पीठ पर बने मंदिर को अत्यंत पवित्र माना गया है। मंदिर के पूर्व में विशाल कल्याण सागर सरोवर है, जिसमें बड़ी संख्या में कछुए और मछलियाँ रहती हैं। श्रद्धालु उन्हें मुरमुरे और बिस्किट खिलाते हैं; इन जीवों को पवित्र मानकर पकड़ना या नुकसान पहुँचाना पूरी तरह वर्जित है।

दो मूर्तियाँ – बड़ी माँ और छोटी माँ

गर्भगृह में लाल-काले कसौटी पत्थर की लगभग पाँच फ़ीट ऊँची माँ त्रिपुर सुंदरी (सोरोशी) की मूर्ति है। उसके साथ लगभग दो फ़ीट की छोटी मूर्ति है, जिसे छोटी माँ (चंडी माँ) कहा जाता है। परंपरा के अनुसार त्रिपुरा के राजा युद्ध में जाते समय छोटी माँ की मूर्ति अपने साथ ले जाते थे।

इतिहास

वर्तमान मंदिर का निर्माण 1501 ई. में त्रिपुरा के माणिक्य वंश के महाराजा धन्य माणिक्य ने कराया था। कथा के अनुसार राजा को स्वप्न में देवी ने आदेश दिया कि चटगाँव (अब बांग्लादेश) से उनकी मूर्ति लाकर उदयपुर की पहाड़ी पर स्थापित की जाए। मंदिर बंगाल की पारंपरिक एकरत्न शैली में बना है – चौकोर गर्भगृह और उसके ऊपर गुंबदनुमा शिखर। उदयपुर उस समय त्रिपुरा राज्य की राजधानी था। हाल के वर्षों में “प्रसाद” योजना के अंतर्गत मंदिर परिसर का बड़े स्तर पर सौंदर्यीकरण हुआ है।

प्रमुख उत्सव

  • दीपावली मेला: दीपावली पर लगने वाला सबसे बड़ा मेला, जिसमें त्रिपुरा, असम और बांग्लादेश सीमा क्षेत्र से लाखों श्रद्धालु आते हैं और कल्याण सागर दीपों से जगमगा उठता है।
  • दुर्गा पूजा और नवरात्रि में विशेष पूजा।
  • मंदिर का प्रसाद पेड़ा प्रसिद्ध है, जो परिसर की दुकानों में मिलता है।

दर्शन का समय

  • मंदिर खुलना: सुबह लगभग 5:00 बजे
  • दर्शन: सुबह 5:00 से रात लगभग 9:30 बजे तक, दोपहर भोग के समय (लगभग 12:00–1:00 बजे) थोड़ी देर बंद
  • आरती: सुबह और संध्या

दीपावली मेले के समय भारी भीड़ रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ त्रिपुर सुंदरी और छोटी माँ की मूर्तियाँ।
  • कल्याण सागर – कछुओं और मछलियों वाला सरोवर।
  • भुवनेश्वरी मंदिर, उदयपुर – गोमती नदी के तट पर।
  • नीरमहल (रुद्रसागर झील में जल महल, लगभग 30 किमी)।
  • उज्जयंत पैलेस, अगरतला।

कैसे पहुँचें

  • हवाई मार्ग: महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डा, अगरतला (लगभग 60 किमी)।
  • रेल मार्ग: उदयपुर (त्रिपुरा) रेलवे स्टेशन लगभग 5 किमी; अगरतला से ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: अगरतला से NH-8 द्वारा लगभग 55 किमी – बस और टैक्सी उपलब्ध।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

त्रिपुर सुंदरी शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि के अनुसार यहाँ सती का दायाँ पैर गिरा था। यहाँ की शक्ति त्रिपुर सुंदरी और भैरव त्रिपुरेश हैं।
त्रिपुर सुंदरी मंदिर को कूर्म पीठ क्यों कहते हैं?
जिस पहाड़ी पर मंदिर बना है उसका आकार कछुए (कूर्म) की पीठ जैसा है, इसलिए इसे कूर्म पीठ कहा जाता है।
माताबाड़ी मंदिर किसने बनवाया?
वर्तमान मंदिर 1501 ई. में त्रिपुरा के माणिक्य वंश के महाराजा धन्य माणिक्य ने बनवाया था।
अगरतला से त्रिपुर सुंदरी मंदिर कितनी दूर है?
अगरतला से त्रिपुर सुंदरी मंदिर लगभग 55-60 किमी दूर है। सड़क मार्ग से लगभग 1.5-2 घंटे लगते हैं।
त्रिपुर सुंदरी मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव कौन सा है?
दीपावली पर लगने वाला मेला सबसे बड़ा उत्सव है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं और कल्याण सागर दीपों से सजता है।

त्रिपुर सुंदरी मंदिर (माताबाड़ी), उदयपुर त्रिपुरा इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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