श्री राम जन्मभूमि मंदिर उत्तर प्रदेश की अयोध्या नगरी में सरयू नदी के पास भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर बना भव्य मंदिर है। 22 जनवरी 2024 को यहाँ बालरूप रामलला की नई मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई। अयोध्या सप्तपुरी की सात मोक्षदायिनी नगरियों में पहली गिनी जाती है – “अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची अवन्तिका…” श्लोक की शुरुआत ही अयोध्या से होती है।
अयोध्या – श्रीराम की जन्मभूमि
वाल्मीकि रामायण के अनुसार अयोध्या कोसल राज्य की राजधानी थी, जिसे सूर्यवंशी राजा मनु ने बसाया था। इसी वंश में राजा दशरथ के घर चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया – यही दिन राम नवमी के रूप में मनाया जाता है। चौदह वर्ष के वनवास और रावण वध के बाद श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में दीपावली मनाई जाती है। अयोध्या के कण-कण में रामकथा बसी है – सरयू के घाट, हनुमानगढ़ी, कनक भवन और दशरथ महल इसी कथा से जुड़े हैं।
नए मंदिर का निर्माण
सर्वोच्च न्यायालय के नवंबर 2019 के निर्णय के बाद मंदिर निर्माण के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बना। 5 अगस्त 2020 को भूमि पूजन हुआ। मंदिर पारंपरिक नागर शैली में बना है, जिसका डिज़ाइन सोमपुरा परिवार के वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा ने तैयार किया। तीन मंज़िला यह मंदिर राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के गुलाबी बलुआ पत्थर से बना है, जिसमें लोहे का उपयोग नहीं किया गया। इसमें लगभग 392 स्तंभ और 44 द्वार हैं, और स्तंभों पर देवी-देवताओं की नक्काशी की गई है।
रामलला की मूर्ति
गर्भगृह में विराजमान रामलला की लगभग 51 इंच ऊँची मूर्ति मैसूर के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने श्याम शिला (काले पत्थर) से बनाई है। इसमें श्रीराम पाँच वर्ष के बालक के रूप में धनुष-बाण लिए खड़े हैं और मूर्ति के चारों ओर प्रभामंडल में विष्णु के दशावतार अंकित हैं। पुरानी रामलला मूर्ति (उत्सव मूर्ति) भी गर्भगृह में ही विराजमान है।
दर्शन से जुड़ी ज़रूरी बातें
- मंदिर में मोबाइल फ़ोन, कैमरा, बैग और इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाना मना है – इन्हें बाहर निःशुल्क लॉकर में जमा करें।
- आरती में शामिल होने के लिए ट्रस्ट की वेबसाइट से निःशुल्क आरती पास पहले से बुक किए जा सकते हैं।
- राम नवमी, दीपावली और 22 जनवरी की वर्षगांठ पर बहुत भीड़ होती है; इन दिनों सुबह जल्दी पहुँचें।
- बुज़ुर्गों और दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर की सुविधा उपलब्ध है।
दर्शन का समय
- मंगला / श्रृंगार आरती: सुबह लगभग 4:30 और 6:30 बजे
- दर्शन: सुबह लगभग 6:30 से रात 9:30 बजे तक
- भोग आरती: दोपहर लगभग 12:00 बजे
- संध्या आरती: शाम लगभग 7:30 बजे
- शयन आरती: रात लगभग 9:30–10:00 बजे
आरती में शामिल होने के लिए ट्रस्ट की वेबसाइट से पास लें। पर्व और विशेष अवसरों पर समय बदलता है।
मुख्य आकर्षण
- हनुमानगढ़ी: 76 सीढ़ियों पर बना हनुमान जी का मंदिर – मान्यता है कि रामलला से पहले इनके दर्शन करने चाहिए।
- कनक भवन: माता कैकेयी द्वारा सीता जी को भेंट किया गया महल।
- राम की पैड़ी और सरयू घाट: शाम की सरयू आरती और दीपोत्सव।
- दशरथ महल, गुप्तार घाट और नागेश्वरनाथ मंदिर।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: अयोध्या धाम जंक्शन मंदिर से लगभग 1-2 किमी; दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी से सीधी ट्रेनें।
- हवाई मार्ग: महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अयोध्या (लगभग 15 किमी); लखनऊ हवाई अड्डा लगभग 140 किमी।
- सड़क मार्ग: लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज और वाराणसी से सीधी बसें; मंदिर के पास ई-रिक्शा और गोल्फ़ कार्ट सेवा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अयोध्या राम मंदिर में दर्शन का समय क्या है?
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कब हुई?
रामलला की मूर्ति किसने बनाई?
क्या राम मंदिर में मोबाइल ले जा सकते हैं?
अयोध्या को सप्तपुरी में क्यों गिना जाता है?
श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
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