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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

बुग्गा रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर, ताडिपत्री

Bugga Ramalingeswara Swamy Temple, Tadipatri

Anantapur, आंध्र प्रदेश भगवान शिव (श्री रामलिंगेश्वर स्वामी, स्वयंभू लिंग) निःशुल्क प्रवेश

बुग्गा रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले के ताडिपत्री नगर में पेन्ना नदी के दक्षिणी तट पर स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। यहाँ शिव स्वयंभू लिंग के रूप में पूजे जाते हैं, और गर्भगृह में लिंग के नीचे से निरंतर जल रिसता रहता है। तेलुगु में जल-स्रोत को “बुग्गा” कहते हैं – इसी से मंदिर का नाम बुग्गा रामलिंगेश्वर पड़ा। विजयनगर काल का यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का संरक्षित स्मारक है।

इतिहास

मंदिर का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के अधीन गुत्ति-गंडिकोटा क्षेत्र के नायक पेम्मसानी रामलिंग नायुडु प्रथम से जोड़ा जाता है, और माना जाता है कि मंदिर का नाम भी उन्हीं के नाम से जुड़ा है। इसे 16वीं शताब्दी के आरंभ (लगभग 1490–1509 ई. के बीच) का माना जाता है, हालाँकि अलग-अलग स्रोतों में तिथियाँ कुछ भिन्न मिलती हैं। ताडिपत्री का दूसरा प्रसिद्ध मंदिर, चिंतल वेंकटरमण स्वामी मंदिर, इसी पेम्मसानी नायक वंश के बाद के शासक तिम्म नायुडु ने बनवाया था।

बुग्गा – लिंग के नीचे का जल-स्रोत

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता गर्भगृह का सदा बहने वाला जल-स्रोत है, जो शिवलिंग को निरंतर जल से सींचता रहता है। पेन्ना नदी वर्ष के अधिकांश समय सूखी रहती है, फिर भी यह जल बना रहता है। भक्त इस जल को तीर्थ मानते हैं और इसे दैवी स्रोत से जुड़ा मानते हैं। एक और विशेषता यह है कि यहाँ का शिवलिंग पश्चिममुखी है।

स्थापत्य और नक्काशी

गर्भगृह, अर्धमंडप और मुखमंडप एक ही अक्ष पर बने हैं। दीवारों और स्तंभों पर रामायण और महाभारत के प्रसंग उकेरे गए हैं। मंदिर के गोपुरम अधूरे रह गए, फिर भी उनकी बारीक कारीगरी की इतिहासकारों ने बहुत प्रशंसा की है। परिसर में विष्णु सन्निधि के सामने कुछ छोटे स्तंभ हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि थपथपाने पर उनसे सप्तस्वर निकलते हैं।

प्रमुख उत्सव और आसपास के दर्शन

  • महाशिवरात्रि: मंदिर का सबसे बड़ा पर्व, जब दूर-दूर से भक्त आते हैं।
  • ताडिपत्री में ही चिंतल वेंकटरमण स्वामी मंदिर है; अनंतपुर ज़िले में पेन्ना अहोबिलम का लक्ष्मी नरसिंह मंदिर भी देखा जा सकता है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम लगभग 4:00 से 8:00 बजे तक

समय पर्वों पर बदल सकता है; महाशिवरात्रि पर देर रात तक दर्शन होते हैं। यात्रा से पहले स्थानीय रूप से पुष्टि कर लें।

मुख्य आकर्षण

  • स्वयंभू शिवलिंग – जिसके नीचे से निरंतर जल रिसता है; इसी जल-स्रोत (तेलुगु में ‘बुग्गा’) से मंदिर का नाम पड़ा।
  • पश्चिममुखी लिंग – अधिकांश मंदिरों से अलग, यहाँ शिवलिंग पश्चिम की ओर है।
  • रामायण और महाभारत के प्रसंगों वाली दीवार और स्तंभों की नक्काशी।
  • अधूरे गोपुरम – जिनकी कारीगरी की इतिहासकारों ने प्रशंसा की है।
  • सप्तस्वर स्तंभ – विष्णु सन्निधि के सामने के छोटे स्तंभ, जिन्हें थपथपाने पर स्वर निकलते हैं।
  • पास ही चिंतल वेंकटरमण स्वामी मंदिर।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: ताडिपत्री रेलवे स्टेशन (लगभग 4 किमी)।
  • सड़क मार्ग: अनंतपुर से लगभग 56 किमी; ताडिपत्री से ऑटो उपलब्ध।
  • हवाई मार्ग: निकटतम बड़े हवाई अड्डे बेंगलुरु और हैदराबाद हैं; पुट्टपर्थी (श्री सत्य साई) हवाई अड्डा भी अपेक्षाकृत पास है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मंदिर का नाम 'बुग्गा' क्यों है?
तेलुगु में 'बुग्गा' का अर्थ है जल-स्रोत या झरना। यहाँ गर्भगृह में शिवलिंग के नीचे से निरंतर जल रिसता रहता है, जिसे भक्त पवित्र जल मानते हैं। इसी कारण मंदिर बुग्गा रामलिंगेश्वर कहलाता है।
बुग्गा रामलिंगेश्वर मंदिर किसने बनवाया?
मंदिर का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के अधीन गुत्ति-गंडिकोटा क्षेत्र के नायक पेम्मसानी रामलिंग नायुडु प्रथम से जोड़ा जाता है। इसे 16वीं शताब्दी के आरंभ का माना जाता है; कुछ स्रोत अन्य स्थानीय दाताओं के योगदान का भी उल्लेख करते हैं।
क्या यह मंदिर पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है?
हाँ, अनंतपुर ज़िला प्रशासन के अनुसार यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का संरक्षित स्मारक है।
यहाँ का शिवलिंग किस दिशा में है?
इस मंदिर का शिवलिंग पश्चिम की ओर मुख किए हुए है, जो दक्षिण भारत के अधिकांश पूर्वमुखी मंदिरों से अलग है।
ताडिपत्री में और कौन सा प्रसिद्ध मंदिर है?
ताडिपत्री में पेन्ना नदी के तट पर ही चिंतल वेंकटरमण स्वामी (चिंतलरायस्वामी) मंदिर है, जो अपने पत्थर के गरुड़ रथ-मंडप के लिए प्रसिद्ध है। दोनों मंदिर एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

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