श्री कनक दुर्गा मंदिर आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा नगर में कृष्णा नदी के तट पर इंद्रकीलाद्रि पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ माँ दुर्गा कनक दुर्गा के नाम से पूजी जाती हैं और उनकी प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है। इसी पहाड़ी पर भगवान शिव मल्लेश्वर स्वामी के रूप में विराजते हैं, इसलिए मंदिर का आधिकारिक नाम श्री दुर्गा मल्लेश्वर स्वामी वारला देवस्थानम है। आंध्र प्रदेश के सबसे बड़े देवी मंदिरों में इसकी गिनती होती है।
इंद्रकील ऋषि और महिषासुर वध
स्थल कथा के अनुसार इंद्रकील नामक ऋषि ने कठोर तपस्या करके देवी से अपनी पहाड़ी पर निवास करने की प्रार्थना की। देवी ने यहीं निवास किया और बाद में राक्षसराज महिषासुर का वध किया। इसी से पहाड़ी का नाम इंद्रकीलाद्रि पड़ा। एक अन्य मान्यता है कि इंद्र और सभी देवताओं ने इस पहाड़ी पर कनक दुर्गा की आराधना की थी।
अर्जुन और मल्लेश्वर स्वामी
परंपरा के अनुसार महाभारत काल में अर्जुन ने इंद्रकीलाद्रि पर तपस्या करके भगवान शिव से पाशुपतास्त्र प्राप्त किया था। विजयवाड़ा नाम को भी अर्जुन (विजय) की इसी विजय से जोड़ा जाता है, और मल्लेश्वर स्वामी की स्थापना का श्रेय कथाओं में अर्जुन को दिया जाता है। मंदिर परंपरा यह भी कहती है कि आदि शंकराचार्य ने यहाँ श्रीचक्र की स्थापना की थी। ऐतिहासिक रूप से 1229 ई. के एक तेलुगु शिलालेख में इंद्रकीलाद्रि के मल्लेश्वर देव को दान का उल्लेख है, जिसमें इस स्थान को “दक्षिण वाराणसी” कहा गया है।
मंदिर और विग्रह
गर्भगृह में देवी की लगभग चार फुट ऊँची प्रतिमा है, जिसमें वे आठ भुजाओं में आयुध लिए महिषासुर पर खड़ी हैं। परिसर में मल्लेश्वर स्वामी के अलावा नटराज, वल्ली-देवसेना सहित कार्तिकेय, क्षेत्रपाल हनुमान, अपराजिता देवी और कामधेनु के छोटे मंदिर हैं। दैनिक पूजा भोर में सुप्रभात सेवा से आरंभ होती है, और खड्गमाला पूजा यहाँ की विशेष सेवाओं में है।
प्रमुख उत्सव
- दशहरा (शरद नवरात्रि): देवी को प्रतिदिन अलग रूप में सजाया जाता है, चंडी होम होता है और अंत में कृष्णा नदी में तेप्पोत्सव (नौका उत्सव) होता है – लाखों भक्त आते हैं।
- शाकंभरी उत्सव (आषाढ़) – देवी का सब्ज़ियों और फलों से अलंकार।
- वरलक्ष्मी व्रत – श्रावण मास के शुक्रवार।
- भवानी दीक्षा – भक्त दीक्षा लेकर देवी के दर्शन को आते हैं।
यात्रा
मंदिर विजयवाड़ा जंक्शन रेलवे स्टेशन और पंडित नेहरू बस स्टेशन दोनों के पास है। पहाड़ी पर वाहन के लिए घाट रोड और पैदल चढ़ने वालों के लिए सीढ़ियाँ हैं। पास ही कृष्णा नदी पर प्रकाशम बैराज है, और यहाँ से मंगलगिरि का नरसिंह मंदिर भी आसानी से जाया जा सकता है।
दर्शन का समय
- दर्शन: लगभग सुबह 4:00 बजे सुप्रभात सेवा से रात लगभग 9:00 बजे तक (दशहरा के दिनों में समय बदलता है)
मुख्य आकर्षण
- माँ कनक दुर्गा – स्वयंभू, अष्टभुजा महिषासुरमर्दिनी रूप।
- मल्लेश्वर स्वामी मंदिर – उसी पहाड़ी पर शिव मंदिर।
- दशहरा नवरात्रि – देवी के दस रूपों में अलंकार।
- कृष्णा नदी और प्रकाशम बैराज का दृश्य।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: विजयवाड़ा जंक्शन (लगभग 2–3 किमी) – देश के बड़े रेल जंक्शनों में से एक।
- सड़क मार्ग: पंडित नेहरू बस स्टेशन से नज़दीक; पहाड़ी पर घाट रोड और सीढ़ियाँ दोनों हैं।
- हवाई मार्ग: विजयवाड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, गन्नवरम।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कनक दुर्गा मंदिर कहाँ है?
इंद्रकीलाद्रि नाम कैसे पड़ा?
अर्जुन का इस पहाड़ी से क्या संबंध है?
कनक दुर्गा मंदिर में दशहरा कैसे मनाया जाता है?
मंदिर में और कौन से उत्सव होते हैं?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, नारायणवनम भगवान श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी, देवी पद्मावती
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