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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

चिंतल वेंकटरमण स्वामी मंदिर (चिंतलरायस्वामी), ताडिपत्री

Chintala Venkataramana Swamy (Chintalarayaswami) Temple, Tadipatri

Anantapur, आंध्र प्रदेश भगवान वेंकटेश्वर (श्री चिंतल वेंकटरमण स्वामी) निःशुल्क प्रवेश

चिंतल वेंकटरमण स्वामी मंदिर, जिसे चिंतलरायस्वामी मंदिर भी कहते हैं, आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले के ताडिपत्री नगर में पेन्ना नदी के तट पर स्थित भगवान वेंकटेश्वर का वैष्णव मंदिर है। 16वीं शताब्दी का यह मंदिर विजयनगर स्थापत्य के उत्तम उदाहरणों में गिना जाता है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है।

नाम की कथा

स्थानीय कथा के अनुसार मंदिर के मूल विग्रह एक इमली के पेड़ में मिले थे। तेलुगु में इमली को “चिंता” कहा जाता है, इसलिए भगवान चिंतल वेंकटरमण कहलाए। लोक में उन्हें प्रेम से चिंतलरायस्वामी भी कहते हैं।

इतिहास

मंदिर का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के अधीन पेम्मसानी नायक वंश के तिम्म नायुडु द्वितीय ने करवाया। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने स्वप्न में उन्हें ताडिपत्री में मंदिर बनवाने का आदेश दिया था। उन्होंने पूजा के लिए अर्चक और प्रधान पुजारी नियुक्त किए और मंदिर को भूमि दान की। कुछ विद्वानों का मत है कि मूल ढाँचा सालुव काल का और प्रवेश गोपुरम तुलुव काल के हो सकते हैं। ताडिपत्री का बुग्गा रामलिंगेश्वर मंदिर इसी वंश के रामलिंग नायुडु से जुड़ा है।

मंदिर और गरुड़ मंडप

मंदिर की सबसे प्रसिद्ध रचना गरुड़ मंडप है, जो पत्थर के पहियों वाले रथ के रूप में बना है – यह हम्पी के विट्ठल मंदिर के पत्थर के रथ की याद दिलाता है, हालाँकि आकार में छोटा है। ऊँचे गोपुरम, स्तंभों वाले मंडप और दीवारों पर देवताओं, याली पर सवार योद्धाओं, नर्तकों और हाथियों की ग्रेनाइट नक्काशी देखने लायक है।

प्रमुख उत्सव

  • वार्षिक ब्रह्मोत्सव: स्थानीय स्रोतों के अनुसार आश्विन मास (लगभग अक्टूबर) में।
  • वैकुंठ एकादशी: ज़िला प्रशासन इसे मंदिर के प्रमुख पर्वों में गिनता है।
  • इसी दिन पास के बुग्गा रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर के दर्शन भी किए जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम लगभग 4:00 से 8:00 बजे तक

ब्रह्मोत्सव और वैकुंठ एकादशी पर समय बदल सकता है; यात्रा से पहले स्थानीय रूप से पुष्टि कर लें।

मुख्य आकर्षण

  • श्री चिंतल वेंकटरमण स्वामी – गर्भगृह में भगवान वेंकटेश्वर।
  • गरुड़ मंडप – पत्थर के पहियों वाले रथ के रूप में बना मंडप, जो हम्पी के विट्ठल मंदिर के पत्थर के रथ की याद दिलाता है।
  • ऊँचा गोपुरम और देवताओं व पौराणिक प्रसंगों की ग्रेनाइट मूर्तियाँ।
  • स्तंभों वाला मंडप – याली, नर्तक और हाथियों की नक्काशी।
  • पास ही बुग्गा रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: ताडिपत्री रेलवे स्टेशन, नगर में ही।
  • सड़क मार्ग: अनंतपुर से लगभग 56 किमी; ताडिपत्री बस अड्डे से ऑटो उपलब्ध।
  • हवाई मार्ग: निकटतम बड़े हवाई अड्डे बेंगलुरु और हैदराबाद हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मंदिर का नाम 'चिंतल' वेंकटरमण क्यों पड़ा?
कथा के अनुसार यहाँ के मूल विग्रह इमली के पेड़ में मिले थे। तेलुगु में इमली को 'चिंता' कहते हैं, इसलिए भगवान चिंतल वेंकटरमण या चिंतलरायस्वामी कहलाए।
चिंतल वेंकटरमण मंदिर किसने बनवाया?
मंदिर पेम्मसानी नायक वंश के तिम्म नायुडु द्वितीय ने 16वीं शताब्दी में बनवाया। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने स्वप्न में उन्हें ताडिपत्री में मंदिर बनवाने को कहा था। उन्होंने अर्चक नियुक्त किए और मंदिर को भूमि दान की।
मंदिर का गरुड़ मंडप क्यों प्रसिद्ध है?
गरुड़ मंडप पत्थर के रथ के रूप में बना है, जिसके ग्रेनाइट पहिए घूमने वाले बताए जाते हैं। यह हम्पी के विट्ठल मंदिर के प्रसिद्ध पत्थर के रथ जैसा है, हालाँकि आकार में छोटा है।
यहाँ के प्रमुख उत्सव कौन से हैं?
ज़िला प्रशासन के अनुसार यहाँ वैकुंठ एकादशी और वार्षिक ब्रह्मोत्सव प्रमुख उत्सव हैं। स्थानीय स्रोतों के अनुसार ब्रह्मोत्सव आश्विन मास (लगभग अक्टूबर) में होता है।
क्या यह मंदिर संरक्षित स्मारक है?
हाँ, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसे राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित किया है। इसे विजयनगर स्थापत्य के उत्तम उदाहरणों में गिना जाता है।

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