मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर, पेन्ना अहोबिलम

Sri Lakshmi Narasimha Swamy Temple, Penna Ahobilam

Anantapur, आंध्र प्रदेश भगवान लक्ष्मी नरसिंह (गर्भगृह में नरसिंह के चरण-चिह्न की पूजा) निःशुल्क प्रवेश

श्री लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर, पेन्ना अहोबिलम आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले के उरवकोंडा मंडल में पेन्ना नदी के बाएँ तट पर स्थित भगवान नरसिंह का प्रमुख वैष्णव मंदिर है। यह उरवकोंडा से लगभग 12 किमी दूर है। यहाँ गर्भगृह में कोई सामान्य मूर्ति नहीं, बल्कि ग्रेनाइट पर बने एक विशाल चरण-चिह्न की पूजा होती है, जिसे भगवान नरसिंह का पवित्र पदचिह्न माना जाता है।

स्थल पुराण

मान्यता है कि यहाँ की पहाड़ी पर उद्दालक ऋषि ने तपस्या की थी और भगवान नरसिंह ने उन्हें दर्शन दिए। “अहोबिलम” नाम को “अहो बलम” (कैसा बल!) से जोड़ा जाता है, जो हिरण्यकशिपु वध के समय नरसिंह के पराक्रम की स्मृति है। कर्नूल क्षेत्र के प्रसिद्ध अहोबिलम से अलग पहचान के लिए इसे पेन्ना अहोबिलम कहा जाता है।

इतिहास और स्थापत्य

अनंतपुर ज़िला प्रशासन के अनुसार मंदिर के दो शिलालेख 16वीं शताब्दी में विजयनगर सम्राट सदाशिवराय के समय के दानों का उल्लेख करते हैं, जिनमें महामंडलेश्वर रामराजु के पुत्र कोनप्पदेव का दान दर्ज है। पूर्वमुखी मंदिर में गर्भगृह, अंतराल और स्तंभों वाला मुखमंडप है, बगल में कल्याण मंडप है। ऊँची प्राकार दीवारें, चारों दिशाओं में गोपुरम और सामने लगभग 15 मीटर ऊँचे दो पत्थर के ध्वजस्तंभ हैं। पास ही उद्भव महालक्ष्मी की सन्निधि है, जिन्हें शिला से प्रकट माना जाता है।

उत्सव और परंपराएँ

  • वार्षिक रथोत्सव: स्रोतों के अनुसार अप्रैल के आसपास।
  • विवाह: मान्यता है कि यहाँ किया गया विवाह सुखी दांपत्य देता है, इसलिए कल्याण मंडप में बहुत से विवाह होते हैं।

यात्रा क्रम

पेन्ना अहोबिलम अनंतपुर से लगभग 36–40 किमी और गुंतकल जंक्शन से लगभग 30 किमी दूर है। अनंतपुर ज़िले की यात्रा में ताडिपत्री के बुग्गा रामलिंगेश्वर और चिंतल वेंकटरमण मंदिर भी देखे जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे तक और दोपहर लगभग 2:00 से शाम 7:00 बजे तक

स्रोतों में समय अलग-अलग मिलता है; यात्रा से पहले स्थानीय रूप से पुष्टि कर लें।

मुख्य आकर्षण

  • नरसिंह के चरण-चिह्न – गर्भगृह में ग्रेनाइट पर बना विशाल चरण-चिह्न, जिसे भगवान नरसिंह का पवित्र पदचिह्न माना जाता है।
  • उद्भव महालक्ष्मी – पास की सन्निधि, जिन्हें शिला से प्रकट माना जाता है।
  • दो पत्थर के ध्वजस्तंभ – मंदिर के सामने लगभग 15 मीटर ऊँचे।
  • प्राकार और गोपुरम – चारों दिशाओं में।
  • पेन्ना नदी – मंदिर नदी के बाएँ तट पर।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: उरवकोंडा से लगभग 12 किमी और अनंतपुर से लगभग 36–40 किमी।
  • रेल मार्ग: गुंतकल जंक्शन (लगभग 30 किमी); अनंतपुर स्टेशन भी विकल्प है।
  • हवाई मार्ग: निकटतम बड़े हवाई अड्डे बेंगलुरु और हैदराबाद हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पेन्ना अहोबिलम में किसकी पूजा होती है?
यहाँ भगवान लक्ष्मी नरसिंह स्वामी की पूजा होती है। गर्भगृह में ग्रेनाइट पर बने एक विशाल चरण-चिह्न की पूजा होती है, जिसे भगवान नरसिंह का पवित्र पदचिह्न माना जाता है।
पेन्ना अहोबिलम की कथा क्या है?
मान्यता है कि यहाँ की पहाड़ी पर उद्दालक ऋषि ने तपस्या की थी और भगवान नरसिंह ने उन्हें दर्शन दिए। 'अहोबिलम' नाम को 'अहो बलम' (कैसा बल!) से जोड़ा जाता है।
मंदिर कितना पुराना है?
ज़िला प्रशासन के अनुसार मंदिर के दो शिलालेख 16वीं शताब्दी में विजयनगर सम्राट सदाशिवराय के समय के दानों का उल्लेख करते हैं, जिनमें महामंडलेश्वर रामराजु के पुत्र कोनप्पदेव का दान दर्ज है। स्थल को इससे भी प्राचीन माना जाता है।
पेन्ना अहोबिलम विवाह के लिए क्यों प्रसिद्ध है?
मान्यता है कि यहाँ भगवान नरसिंह की सन्निधि में किया गया विवाह सुखी दांपत्य देता है, इसलिए मंदिर के कल्याण मंडप में बहुत से विवाह होते हैं।
पेन्ना अहोबिलम कहाँ है और कैसे पहुँचें?
मंदिर अनंतपुर ज़िले के उरवकोंडा मंडल में पेन्ना नदी के बाएँ तट पर, उरवकोंडा से लगभग 12 किमी और अनंतपुर से लगभग 36–40 किमी दूर है। गुंतकल रेलवे स्टेशन लगभग 30 किमी है।

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook