श्री राघवेंद्र स्वामी मठ, मंत्रालयम आंध्र प्रदेश के कर्नूल ज़िले में तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित दक्षिण भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थों में से एक है। यहाँ माध्व द्वैत परंपरा के महान संत श्री गुरु राघवेंद्र तीर्थ का मूल बृंदावन है, जिसमें परंपरा के अनुसार वे 1671 ई. में जीवित प्रविष्ट हुए थे। भक्त प्रेम से उन्हें “रायरु” कहते हैं, और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बृंदावन के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं।
गुरु राघवेंद्र तीर्थ
राघवेंद्र तीर्थ (लगभग 1595–1671) का पूर्व नाम वेंकटनाथ था और उनका जन्म तमिलनाडु के भुवनगिरि में संगीत और विद्या से जुड़े एक माध्व परिवार में हुआ। उन्होंने सुधींद्र तीर्थ से शिक्षा पाई और उनके बाद कुंभकोणम मठ के पीठाधिपति बने। उनके नाम से लगभग 45 संस्कृत ग्रंथ जुड़े हैं, जिनमें जयतीर्थ की न्याय सुधा पर टीका परिमल सबसे प्रसिद्ध है – इसी से उन्हें “सुधा परिमलाचार्य” कहा गया। वे वीणा-वादक भी थे और “वेणु गोपाल” नाम से गीत रचते थे। भक्त उन्हें प्रह्लाद का अवतार मानते हैं।
मंचाले से मंत्रालयम
मंत्रालयम का पुराना नाम मंचाले था। परंपरा के अनुसार आदोनी के नवाब सिद्दी मसूद खान ने तुंगभद्रा तट का यह गाँव गुरु को दिया। इस कथा में आदोनी के दीवान बने गुरु-भक्त वेंकण्णा का भी उल्लेख आता है। गाँव की देवी मंचालम्मा हैं; मान्यता है कि गुरु ने कहा था कि भक्त पहले देवी के और फिर उनके दर्शन करेंगे – यह परंपरा आज भी निभाई जाती है।
मठ और बृंदावन
यह मठ माध्वाचार्य की परंपरा के तीन प्रमुख मठों (मठत्रय) में से एक है। 15वीं सदी में विबुधेंद्र तीर्थ द्वारा कुंभकोणम में स्थापित इस मठ को पहले कुंभकोणम मठ या दक्षिणादि मठ कहा जाता था; बाद में यह राघवेंद्र मठ के नाम से प्रसिद्ध हुआ और अब इसका मुख्यालय मंत्रालयम है। मठ में मूल राम मुख्य आराध्य हैं, साथ में दिग्विजय राम, जय राम और अन्य विग्रहों की पूजा होती है। परिसर के केंद्र में गुरु का बृंदावन है, जहाँ दिन भर पूजा, अलंकार और भजन चलते हैं।
आराधना महोत्सव
गुरु के बृंदावन प्रवेश की स्मृति में हर वर्ष श्रावण मास (लगभग अगस्त) में तीन दिन का आराधना महोत्सव होता है – पूर्वाराधना, मध्याराधना और उत्तराराधना। इस समय विशेष पूजाएँ होती हैं और देश भर से भक्त आते हैं। सामान्य दिनों में भी गुरुवार को यहाँ विशेष भीड़ रहती है।
यात्रा क्रम
परंपरा के अनुसार भक्त पहले तुंगभद्रा में स्नान करते हैं, फिर मंचालम्मा मंदिर में दर्शन करके गुरु के बृंदावन के दर्शन करते हैं। मंत्रालयम रोड रेलवे स्टेशन लगभग 16 किमी और कर्नूल लगभग 90 किमी दूर है। मठ की ओर से भोजन प्रसाद और ठहरने की व्यवस्था रहती है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:00 बजे से रात लगभग 9:00 बजे तक, बीच में पूजा के समय कुछ अंतराल
आराधना महोत्सव और गुरुवार को भारी भीड़ रहती है। समय मठ की ओर से बदला जा सकता है; यात्रा से पहले पुष्टि कर लें।
मुख्य आकर्षण
- मूल बृंदावन – श्री राघवेंद्र तीर्थ का समाधि-स्थल, जहाँ परंपरा के अनुसार वे 1671 में जीवित बृंदावन में प्रविष्ट हुए।
- मूल राम – मठ के मुख्य आराध्य, साथ में दिग्विजय राम और जय राम।
- मंचालम्मा मंदिर – ग्राम देवी, जिनके दर्शन पहले करने की परंपरा है।
- तुंगभद्रा नदी – स्नान घाट।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: मंत्रालयम रोड रेलवे स्टेशन (लगभग 16 किमी), जहाँ से बसें मिलती हैं।
- सड़क मार्ग: कर्नूल से लगभग 90 किमी; आदोनी, रायचूर, बेंगलुरु और हैदराबाद से बसें।
- हवाई मार्ग: निकटतम बड़े हवाई अड्डे हैदराबाद और बेंगलुरु हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
श्री राघवेंद्र स्वामी कौन थे?
मंत्रालयम में बृंदावन क्या है?
मंत्रालयम का पुराना नाम क्या था?
राघवेंद्र स्वामी की आराधना कब होती है?
मंचालम्मा के दर्शन पहले क्यों किए जाते हैं?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, नारायणवनम भगवान श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी, देवी पद्मावती
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Kakinada, आंध्र प्रदेश श्री श्रृंगार वल्लभ स्वामी मंदिर, तोलि तिरुपति (चदलाड) श्री श्रृंगार वल्लभ स्वामी (भगवान वेंकटेश्वर का स्वरूप), श्रीदेवी और भूदेवी सहित
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श्रीकालहस्ती, आंध्र प्रदेश श्रीकालहस्तीश्वर मंदिर, श्रीकालहस्ती भगवान शिव (श्रीकालहस्तीश्वर) – वायु लिंगम; देवी ज्ञानप्रसूनाम्बा
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तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, श्रीनिवासमंगापुरम भगवान श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी (चतुर्भुज, पूर्वमुखी)
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Kakinada, आंध्र प्रदेश श्री सूर्यनारायण स्वामी मंदिर, गोल्लल मामिडाडा भगवान श्री सूर्यनारायण स्वामी
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तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी), तिरुमला भगवान श्री वेंकटेश्वर (बालाजी / श्रीनिवास)