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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

अमराराम – श्री अमरेश्वर स्वामी मंदिर, अमरावती

Amararama – Sri Amareswara Swamy Temple, Amaravati

पलनाडु, आंध्र प्रदेश भगवान अमरेश्वर (अमरलिंगेश्वर) स्वामी, देवी बाल चामुंडिका निःशुल्क प्रवेश

अमराराम – श्री अमरेश्वर स्वामी मंदिर – आंध्र प्रदेश के अमरावती गाँव में कृष्णा नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। यह पंचाराम क्षेत्रों में से एक है – वे पाँच शिव धाम जहाँ तारकासुर के शिवलिंग के टुकड़े गिरे माने जाते हैं। बाकी चार पंचाराम गोदावरी क्षेत्र में हैं, जबकि अमराराम अकेला कृष्णा तट पर है। यहाँ शिव अमरेश्वर (अमरलिंगेश्वर) और देवी बाल चामुंडिका के रूप में पूजे जाते हैं।

पंचाराम की कथा

कथा के अनुसार असुरराज तारकासुर के पास एक शिवलिंग था, जिसके कारण वह अजेय था। कार्तिकेय ने युद्ध में उसके शरीर पर प्रहार किए, पर हर बार शरीर फिर जुड़ जाता। तब भगवान विष्णु ने बताया कि जब तक वह लिंग अखंड है, तारकासुर नहीं मरेगा। कार्तिकेय ने आग्नेयास्त्र से लिंग को तोड़ा, जो पाँच टुकड़ों में बँटकर अलग-अलग स्थानों पर गिरा। टुकड़े फिर जुड़ने न पाएँ, इसलिए उन्हें वहीं प्रतिष्ठित कर दिया गया – यही पाँच स्थान पंचाराम कहलाए। अमराराम का लिंग देवराज इंद्र द्वारा स्थापित माना जाता है; अमरों (देवताओं) के राजा से जुड़े होने के कारण स्थान का नाम अमराराम पड़ा।

मंदिर और शिवलिंग

मंदिर क्रौंच शैल नाम की छोटी पहाड़ी पर बना है। गर्भगृह में लगभग 15 फुट ऊँचा श्वेत शिवलिंग है, जो दो तलों तक जाता है – इसलिए अभिषेक ऊपरी तल से किया जाता है। लिंग पर एक लाल चिह्न भी दिखाया जाता है; लोककथा है कि लिंग लगातार बढ़ रहा था, उसे रोकने के लिए ऊपर कील ठोकी गई और यह उसी का निशान है। परिसर में वेणुगोपाल स्वामी का मंदिर भी है।

मंदिर के सबसे पुराने ज्ञात शिलालेख 12वीं शताब्दी के हैं। 18वीं शताब्दी के अंत में चिंतापल्ली के ज़मींदार वासिरेड्डी वेंकटाद्रि नायुडु ने मंदिर का जीर्णोद्धार और विस्तार कराया। अमरावती प्राचीन बौद्ध स्तूप के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसके अवशेष मंदिर के पास ही हैं।

प्रमुख उत्सव

  • महाशिवरात्रि: सबसे बड़ा उत्सव, कृष्णा स्नान और रात भर दर्शन।
  • कार्तिक मास और कार्तिक पूर्णिमा: दीपदान और विशेष अभिषेक।
  • नवरात्रि में देवी बाल चामुंडिका की विशेष पूजा, और वर्ष में कल्याण उत्सव।

पंचाराम यात्रा

कई श्रद्धालु विशेषकर कार्तिक मास में पाँचों पंचारामों के दर्शन एक यात्रा में करते हैं। अमराराम गुंटूर–विजयवाड़ा की ओर है, जबकि सोमाराम (भीमवरम) और क्षीराराम (पालकोल्लु) पश्चिम गोदावरी में, तथा द्राक्षाराम और कुमाराराम (सामर्लकोट) काकीनाडा की ओर हैं। विजयवाड़ा आने वाले यात्री कनक दुर्गा मंदिर के साथ अमराराम के दर्शन भी जोड़ सकते हैं।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक

महाशिवरात्रि और कार्तिक मास में समय बढ़ाया जा सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • अमरेश्वर लिंग – लगभग 15 फुट ऊँचा श्वेत शिवलिंग, जिसका अभिषेक ऊपरी तल से होता है।
  • देवी बाल चामुंडिका का सन्निधि।
  • वेणुगोपाल स्वामी का मंदिर – इसी परिसर में।
  • कृष्णा नदी का घाट।
  • पास में अमरावती बौद्ध स्तूप के अवशेष और पुरातत्व संग्रहालय।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: गुंटूर से लगभग 35 किमी और विजयवाड़ा से लगभग 40 किमी; दोनों शहरों से बसें मिलती हैं।
  • रेल मार्ग: निकटतम बड़े स्टेशन गुंटूर जंक्शन और विजयवाड़ा जंक्शन।
  • हवाई मार्ग: विजयवाड़ा हवाई अड्डा, गन्नवरम (लगभग 60 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पंचाराम क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
पंचाराम आंध्र प्रदेश के पाँच शिव मंदिर हैं – अमराराम (अमरावती), द्राक्षाराम (द्राक्षारामम), सोमाराम (भीमवरम), क्षीराराम (पालकोल्लु) और कुमाराराम (सामर्लकोट)। मान्यता है कि तारकासुर के कंठ के शिवलिंग के पाँच टुकड़े इन्हीं स्थानों पर गिरे थे।
अमराराम का शिवलिंग किसने स्थापित किया था?
परंपरा के अनुसार अमराराम का शिवलिंग देवराज इंद्र ने स्थापित किया था। देवताओं (अमरों) के राजा से जुड़े होने के कारण ही स्थान का नाम अमराराम और नगर का नाम अमरावती माना जाता है।
अमरेश्वर शिवलिंग कितना ऊँचा है?
अमरेश्वर स्वामी का श्वेत शिवलिंग लगभग 15 फुट ऊँचा बताया जाता है। इतना ऊँचा होने के कारण पुजारी ऊपरी तल से अभिषेक करते हैं।
अमराराम बाकी पंचारामों से अलग क्यों है?
अन्य चार पंचाराम गोदावरी क्षेत्र में हैं, जबकि अमराराम अकेला कृष्णा नदी के तट पर स्थित है। यह क्रौंच शैल नाम की छोटी पहाड़ी पर बना है।
विजयवाड़ा से अमरावती अमरेश्वर मंदिर कैसे पहुँचें?
विजयवाड़ा से अमरावती लगभग 40 किमी है। सड़क मार्ग से बस या टैक्सी द्वारा लगभग 1 से 1.5 घंटे लगते हैं; गुंटूर से भी नियमित बसें चलती हैं।

अमराराम – श्री अमरेश्वर स्वामी मंदिर, अमरावती इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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