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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

क्षीराराम – श्री क्षीर रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर, पालकोल्लु

Ksheerarama – Sri Ksheera Ramalingeswara Swamy Temple, Palakollu

पश्चिम गोदावरी, आंध्र प्रदेश भगवान क्षीर रामलिंगेश्वर स्वामी, देवी पार्वती निःशुल्क प्रवेश

क्षीराराम – श्री क्षीर रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर – आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी ज़िले के पालकोल्लु नगर में स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर है। यह पंचाराम क्षेत्रों में से एक है। यहाँ का दूधिया श्वेत शिवलिंग भगवान विष्णु द्वारा स्थापित माना जाता है, और देवी यहाँ पार्वती के रूप में पूजी जाती हैं। मंदिर भारत सरकार द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है।

स्थल पुराण

पंचाराम कथा के अनुसार कार्तिकेय ने तारकासुर के शिवलिंग को तोड़ा, जिसके पाँच टुकड़े पाँच स्थानों पर गिरे – उनमें से एक यहाँ गिरा। स्थान के नाम की कथा ऋषि उपमन्यु से जुड़ी है: उन्होंने पूजा के लिए दूध माँगा, तो शिव ने यहाँ की क्षीर पुष्करिणी को क्षीरसागर के दूध से भर दिया। इसी से स्थान क्षीराराम कहलाया, और तेलुगु में दूध (पालु) से पालकोल्लु नाम जोड़ा जाता है। प्राचीन ग्रंथों में इसे दुग्धोपवन भी कहा गया बताया जाता है।

मंदिर और गोपुरम

मंदिर का राजगोपुरम लगभग 120 फुट ऊँचा और नौ मंज़िला है, जिसे आंध्र प्रदेश के सबसे ऊँचे मंदिर गोपुरमों में गिना जाता है। गर्भगृह में दूधिया श्वेत क्षीर रामलिंगेश्वर लिंग है; बाईं ओर गोकर्णेश्वर और गणेश तथा दाईं ओर कार्तिकेय और विष्णु विराजते हैं। मंडप में काले पत्थर के 72 स्तंभ हैं। अन्य पंचारामों के दो मंज़िला गर्भगृहों से अलग, यहाँ का गर्भगृह एक ही तल का है।

मंदिर को पूर्वी चालुक्य काल से जोड़ा जाता है, और बाद के शासकों ने प्राकार, गोपुरम, कल्याण मंडप तथा अष्टभुज लक्ष्मीनारायण का सन्निधि जोड़ा। इसके निर्माण काल को लेकर स्रोतों में अलग-अलग तिथियाँ मिलती हैं।

प्रमुख उत्सव

  • महाशिवरात्रि: सबसे बड़ा उत्सव, दूर-दूर से भक्त आते हैं।
  • कार्तिक मास: सोमवार और पूर्णिमा पर अभिषेक और दीपदान, पंचाराम यात्रियों की भीड़।

आसपास के दर्शन

पालकोल्लु से लगभग 25 किमी दूर भीमवरम में सोमाराम है, इसलिए दोनों के दर्शन एक दिन में हो जाते हैं। पालकोल्लु से होकर बहने वाली गोस्तनी नदी नरसापुर के पास गोदावरी में मिलती है; गोदावरी के समुद्र-संगम पर अंतर्वेदी का लक्ष्मी नरसिंह मंदिर भी यात्री देखते हैं। आगे द्राक्षाराम, कुमाराराम (सामर्लकोट) और अमराराम (अमरावती) के साथ पंचाराम यात्रा पूरी होती है।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक

महाशिवरात्रि और कार्तिक मास में समय बढ़ाया जा सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • क्षीर रामलिंगेश्वर लिंग – दूधिया श्वेत शिवलिंग।
  • राजगोपुरम – लगभग 120 फुट ऊँचा, नौ मंज़िला, आंध्र के ऊँचे मंदिर गोपुरमों में से एक।
  • स्तंभ मंडप – काले पत्थर के 72 स्तंभ।
  • गर्भगृह के पास गोकर्णेश्वर, गणेश, कार्तिकेय और विष्णु की प्रतिमाएँ।
  • अष्टभुज लक्ष्मीनारायण सन्निधि और कल्याण मंडप।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: मंदिर पालकोल्लु बस अड्डे के पास है; भीमवरम से लगभग 25 किमी और नरसापुर से लगभग 10 किमी।
  • रेल मार्ग: पालकोल्लु रेलवे स्टेशन (भीमवरम–नरसापुर लाइन)।
  • हवाई मार्ग: राजमुंदरी हवाई अड्डा (लगभग 80 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्षीराराम नाम कैसे पड़ा?
कथा के अनुसार ऋषि उपमन्यु ने पूजा के लिए दूध की प्रार्थना की, तो भगवान शिव ने यहाँ की पुष्करिणी को क्षीर (दूध) से भर दिया। इसी से स्थान क्षीराराम कहलाया और तेलुगु में दूध (पालु) से पालकोल्लु नाम जोड़ा जाता है।
क्षीराराम का लिंग किसने स्थापित किया?
पंचाराम परंपरा के अनुसार क्षीराराम का लिंग भगवान विष्णु ने स्थापित किया था। एक अन्य कथा में विष्णु द्वारा यहाँ शिव की कमल पुष्पों से अर्चना करने का उल्लेख भी मिलता है।
क्षीराराम का गोपुरम कितना ऊँचा है?
क्षीराराम का राजगोपुरम लगभग 120 फुट ऊँचा और नौ मंज़िला बताया जाता है। इसे आंध्र प्रदेश के सबसे ऊँचे मंदिर गोपुरमों में गिना जाता है।
क्षीराराम मंदिर का मुख्य उत्सव कौन सा है?
महाशिवरात्रि यहाँ का सबसे बड़ा उत्सव है। कार्तिक मास में भी पंचाराम यात्रा करने वाले भक्तों की बड़ी भीड़ रहती है।
भीमवरम से पालकोल्लु कितनी दूर है?
भीमवरम से पालकोल्लु लगभग 25 किमी है। भीमवरम के सोमाराम और पालकोल्लु के क्षीराराम के दर्शन एक ही दिन में किए जा सकते हैं।

क्षीराराम – श्री क्षीर रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर, पालकोल्लु इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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