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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री कूर्मनाथ स्वामी मंदिर, श्रीकूर्मम

Sri Kurmanathaswamy Temple, Srikurmam

श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश भगवान श्री कूर्मनाथ स्वामी (विष्णु का कूर्म अवतार), देवी कूर्मनायकी निःशुल्क प्रवेश

श्री कूर्मनाथ स्वामी मंदिर आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम ज़िले के श्रीकूर्मम गाँव में स्थित है, जिसका नाम ही इस मंदिर से पड़ा है। यहाँ भगवान विष्णु अपने दूसरे अवतार कूर्म (कछुआ) के रूप में पूजे जाते हैं – ऐसा मंदिर देश में दुर्लभ है। गर्भगृह में कछुए के रूप वाला विग्रह और देवी लक्ष्मी (कूर्मनायकी) सहित विष्णु विराजते हैं। काले पत्थर का विग्रह नियमित चंदन लेप के कारण पीला दिखता है।

स्थल पुराण

कथा के अनुसार राजा श्वेत चक्रवर्ती की पत्नी विष्णुप्रिया भगवान की परम भक्त थीं। भगवान के सुदर्शन चक्र से यहाँ श्वेत पुष्करिणी सरोवर बना, जिसमें स्नान कर राजा स्वस्थ हुए। नारद मुनि से कूर्म नारायण मंत्र पाकर राजा ने तपस्या की और भगवान ने कूर्म रूप में दर्शन दिए। पद्म पुराण के अनुसार ब्रह्मा ने यहाँ विग्रह की प्रतिष्ठा की। मान्यता है कि एक वनवासी राजा की प्रार्थना पर भगवान ने अपना मुख पश्चिम की ओर कर लिया।

इतिहास

मंदिर में 11वीं से 19वीं शताब्दी तक के अभिलेख हैं। एक अभिलेख के अनुसार पूर्वी गंग राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव के काल में रामानुजाचार्य की परंपरा ने यहाँ वैष्णव उपासना स्थापित की। बाद में माध्वाचार्य के शिष्य नरहरि तीर्थ ने इसे वैष्णव गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनाया। आज भी यहाँ शैव और वैष्णव दोनों परंपराओं के अंश दिखते हैं, और श्रीकूर्मम को पितृ क्षेत्र भी माना जाता है।

स्थापत्य और कछुआ उद्यान

मंदिर में कलिंग और द्रविड़ शैलियों का मेल है। यहाँ पूर्व और पश्चिम दोनों ओर ध्वजस्तंभ हैं और 108 एकशिला स्तंभ हैं, जिनमें कोई दो एक जैसे नहीं। प्रदक्षिणा मंडप की दीवारों पर ओडिशा की पट्टचित्र शैली में कृष्ण-लीला के भित्तिचित्र हैं। परिसर में स्टार कछुओं का संरक्षण उद्यान भी है।

प्रमुख उत्सव

  • डोलोत्सव (फाल्गुन): तीन दिन का मुख्य उत्सव – कामदहन से आरंभ।
  • कल्याणोत्सव – वैशाख शुक्ल एकादशी।
  • कूर्म जयंती और मुक्कोटि (वैकुंठ) एकादशी।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक
  • उत्सवों पर समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • कूर्मनाथ स्वामी – कछुए के रूप में पश्चिममुखी विग्रह, चंदन लेप से पीला दिखता है।
  • दो ध्वजस्तंभ – पूर्व और पश्चिम दोनों ओर, वैष्णव मंदिरों में दुर्लभ।
  • 108 एकशिला स्तंभ – कोई दो एक जैसे नहीं।
  • भित्तिचित्र – प्रदक्षिणा मंडप में ओडिशा की पट्टचित्र शैली के कृष्ण-लीला चित्र।
  • श्वेत पुष्करिणी और स्टार कछुआ उद्यान।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: श्रीकाकुलम रोड (आमदालवलसा) रेलवे स्टेशन।
  • सड़क मार्ग: श्रीकाकुलम शहर से लगभग 15 किमी दक्षिण-पूर्व; विशाखापत्तनम से लगभग 130 किमी।
  • हवाई मार्ग: विशाखापत्तनम हवाई अड्डा (लगभग 130 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्रीकूर्मम मंदिर की क्या विशेषता है?
यह उन बहुत कम मंदिरों में से है जहाँ भगवान विष्णु की पूजा कूर्म (कछुआ) अवतार के रूप में होती है। विग्रह पश्चिम की ओर मुख किए है और मंदिर में दो ध्वजस्तंभ हैं।
श्रीकूर्मम का विग्रह पश्चिममुखी क्यों है?
स्थानीय कथा के अनुसार एक वनवासी राजा की प्रार्थना पर भगवान ने अपना मुख पश्चिम की ओर कर लिया। इसी कारण मंदिर में पश्चिम दिशा में भी ध्वजस्तंभ है।
श्वेत पुष्करिणी की क्या कथा है?
मान्यता है कि यह सरोवर भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से बना। राजा श्वेत चक्रवर्ती ने इसमें स्नान कर स्वास्थ्य पाया और नारद मुनि से कूर्म नारायण मंत्र पाकर भगवान के कूर्म रूप के दर्शन किए। श्रीकूर्मम को पितृ क्षेत्र भी माना जाता है।
श्रीकूर्मम में कछुआ उद्यान क्यों है?
भगवान के कूर्म रूप से जुड़ाव के कारण भक्त यहाँ स्टार कछुए अर्पित करते हैं। मंदिर परिसर में इनके संरक्षण के लिए एक उद्यान बनाया गया है, जहाँ भक्त उन्हें गोंगुरा के पत्ते खिलाते हैं।
श्रीकाकुलम से श्रीकूर्मम कितनी दूर है?
श्रीकूर्मम श्रीकाकुलम शहर से लगभग 15 किमी दक्षिण-पूर्व में है। बस या टैक्सी से लगभग आधे घंटे में पहुँचा जा सकता है।

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