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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री मुखलिंगेश्वर मंदिर, श्रीमुखलिंगम

Sri Mukhalingeswara (Madhukeswara) Temple, Srimukhalingam

श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश भगवान शिव – श्री मुखलिंगेश्वर (मधुकेश्वर) निःशुल्क प्रवेश

श्रीमुखलिंगम आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम ज़िले में वंशधारा नदी के बाएँ तट पर बसा एक प्राचीन शैव तीर्थ है। यहाँ भगवान शिव के तीन प्रसिद्ध मंदिर हैं – मुख्य मधुकेश्वर (मुखलिंगेश्वर), सोमेश्वर और भीमेश्वर। ओडिशा सीमा के पास होने के कारण यहाँ आंध्र और ओडिशा दोनों के भक्त बड़ी श्रद्धा से आते हैं।

नाम और मुखयुक्त लिंग

भक्तों की मान्यता है कि मुख्य मंदिर के शिवलिंग पर भगवान का मुख अंकित है, इसी से स्थान का नाम “श्रीमुखलिंगम” पड़ा। एक अन्य व्याख्या के अनुसार यह नाम “मधुकलिंग” का बदला हुआ रूप है – मधुक अर्थात महुआ वृक्ष, जिससे मंदिर का नाम मधुकेश्वर जुड़ा है।

गंगों की राजधानी कलिंगनगर

यह गाँव कभी कलिंगनगर कहलाता था और लगभग 6वीं से 12वीं शताब्दी तक पूर्वी गंग राजवंश की राजधानी रहा। मुख्य मंदिर राजा कामार्णव द्वितीय के काल का माना जाता है। 1122 ई. के आसपास राजा अनंतवर्मन चोडगंग ने उत्कल पर विजय के बाद राजधानी कटक स्थानांतरित की। इतिहासकार इन मंदिरों को 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच अलग-अलग समय का मानते हैं। 17वीं शताब्दी में परलाखेमुंडी के महाराजा ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।

स्थापत्य

तीनों मंदिर कलिंग शैली के रेखा देउल रूप में बने हैं। दीवारों और शिखर पर देवी-देवताओं, त्रिमूर्ति और अलंकरणों की बारीक नक्काशी है। इनके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इन्हें यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की माँग भी उठी है।

प्रमुख उत्सव

  • महाशिवरात्रि: सबसे बड़ा उत्सव, जो कई दिनों तक चलता है; आंध्र और ओडिशा से बड़ी संख्या में भक्त।
  • चक्रतीर्थ स्नान: वार्षिक पवित्र स्नान, वंशधारा नदी में।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक
  • महाशिवरात्रि पर समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • मधुकेश्वर (मुखलिंगेश्वर) मंदिर – मुख्य मंदिर, जिसके लिंग पर मुख की आकृति मानी जाती है।
  • भीमेश्वर मंदिर और सोमेश्वर मंदिर – कलिंग स्थापत्य के सुंदर नमूने।
  • नक्काशी – शिखर पर त्रिमूर्ति और देवी-देवताओं की मूर्तियाँ।
  • वंशधारा नदी – चक्रतीर्थ स्नान।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: श्रीकाकुलम रोड (आमदालवलसा) रेलवे स्टेशन।
  • सड़क मार्ग: श्रीकाकुलम से लगभग 48 किमी, APSRTC बसें उपलब्ध; ओडिशा का परलाखेमुंडी पास में है।
  • हवाई मार्ग: विशाखापत्तनम हवाई अड्डा (लगभग 160 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्रीमुखलिंगम नाम का क्या अर्थ है?
मान्यता है कि मुख्य मंदिर के शिवलिंग पर भगवान के मुख की आकृति है, इसलिए इसे 'मुखलिंगम' कहा जाता है। कुछ विद्वान इस नाम को 'मधुकलिंग' (मधुक या महुआ वृक्ष से जुड़ा) का बदला हुआ रूप मानते हैं।
श्रीमुखलिंगम में कौन-कौन से मंदिर हैं?
यहाँ तीन प्रमुख शिव मंदिर हैं – मधुकेश्वर (मुखलिंगेश्वर), सोमेश्वर और भीमेश्वर। तीनों कलिंग शैली में बने हैं और इन्हें 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच का माना जाता है।
श्रीमुखलिंगम का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
यह स्थान पूर्वी गंग राजवंश की प्राचीन राजधानी कलिंगनगर था। 1122 ई. के आसपास राजा अनंतवर्मन चोडगंग ने राजधानी कटक स्थानांतरित की। इन्हीं गंग राजाओं ने बाद में पुरी का जगन्नाथ मंदिर बनवाया।
श्रीमुखलिंगम में महाशिवरात्रि कैसे मनाई जाती है?
महाशिवरात्रि यहाँ का सबसे बड़ा उत्सव है, जिसमें आंध्र प्रदेश और ओडिशा दोनों से बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। भक्त वंशधारा नदी में चक्रतीर्थ स्नान कर भगवान शिव के दर्शन करते हैं।
श्रीकाकुलम से श्रीमुखलिंगम कितनी दूर है?
श्रीमुखलिंगम श्रीकाकुलम से लगभग 48 किमी दूर है। APSRTC की बसें श्रीकाकुलम से नियमित चलती हैं।

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