विघ्नेश्वर गणपति मंदिर, जिसे विघ्नहर गणपति भी कहते हैं, पुणे जिले के जुन्नर तालुका में कुकडी नदी के तट पर बसे ओझर गाँव में स्थित है। यह अष्टविनायक यात्रा का सातवाँ स्थान है। ऊँची पत्थर की चारदीवारी, सुनहरा शिखर और प्रवेश द्वार की दो विशाल दीपमालाएँ इसे अष्टविनायकों में सबसे भव्य दिखने वाले मंदिरों में शामिल करती हैं। यहाँ गणपति सभी विघ्नों को हरने वाले के रूप में पूजे जाते हैं।
विघ्नासुर की कथा
कथा के अनुसार राजा अभिनंदन ने एक महान यज्ञ आरंभ किया, जिसमें इंद्र को भाग नहीं दिया गया। क्रुद्ध इंद्र ने काल को विघ्नासुर के रूप में यज्ञ भंग करने भेजा। वह असुर यज्ञों और धर्म-कर्मों में बाधा डालने लगा। ऋषियों की प्रार्थना पर गणेश जी ने उससे युद्ध कर उसे परास्त किया। हारकर विघ्नासुर ने शरण ली और प्रार्थना की कि उसका नाम गणेश जी के नाम के साथ जुड़ा रहे। तब से गणपति यहाँ विघ्नेश्वर कहलाए और ऋषियों ने इसी स्थान पर उनकी प्रतिष्ठा की।
मंदिर और विग्रह
पूर्वाभिमुख विग्रह की सूंड बाईं ओर है, नेत्रों में माणिक, मस्तक पर हीरा और नाभि में रत्न जड़ा है। दोनों ओर ऋद्धि और सिद्धि की मूर्तियाँ हैं। माना जाता है कि पेशवा बाजीराव प्रथम के भाई चिमाजी अप्पा ने वसई किले पर पुर्तगालियों से विजय के बाद मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और शिखर को स्वर्ण से मंडित कराया। सन् 1967 में अप्पा शास्त्री जोशी के प्रयासों से इसका फिर जीर्णोद्धार हुआ। मंदिर चारों ओर ऊँची पत्थर की दीवार से घिरा है और प्रवेश द्वार के पास दो ऊँची पत्थर की दीपमालाएँ खड़ी हैं।
प्रमुख उत्सव
- कार्तिक पूर्णिमा: पाँच दिन का उत्सव, जब दीपमालाएँ और पूरा मंदिर दीपों से जगमगाता है।
- गणेश चतुर्थी (भाद्रपद) और माघी गणेश जयंती।
- हर संकष्टी और अंगारकी चतुर्थी पर भारी भीड़।
यात्रा क्रम और आसपास के दर्शन
अष्टविनायक क्रम में ओझर लेण्याद्री (गिरिजात्मज) के बाद और रांजणगाँव (महागणपति) से पहले आता है। लेण्याद्री यहाँ से लगभग 15 किमी दूर है, इसलिए दोनों के दर्शन प्रायः एक साथ होते हैं। पास ही येडगाँव बाँध, नारायणगाँव और जुन्नर का शिवनेरी किला भी देखने योग्य हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 10:30 बजे तक
- आरती: सुबह, मध्याह्न और संध्या
कार्तिक पूर्णिमा, गणेश चतुर्थी और अंगारकी चतुर्थी पर विशेष भीड़ रहती है।
मुख्य आकर्षण
- श्री विघ्नेश्वर – बाईं सूंड, माणिक जड़े नेत्र और मस्तक पर हीरे वाला पूर्वाभिमुख विग्रह।
- चिमाजी अप्पा द्वारा मंडित स्वर्ण शिखर।
- प्रवेश द्वार के पास दो ऊँची पत्थर की दीपमालाएँ।
- कुकडी नदी का तट और पास का येडगाँव बाँध।
- निकट अष्टविनायक – लेण्याद्री का गिरिजात्मज; जुन्नर का शिवनेरी किला।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: पुणे से लगभग 85 किमी (पुणे–नासिक राजमार्ग से नारायणगाँव होकर; नारायणगाँव से लगभग 9 किमी)। जुन्नर से भी सड़क मार्ग।
- रेल मार्ग: पुणे जंक्शन (लगभग 85 किमी)।
- हवाई मार्ग: पुणे हवाई अड्डा (लगभग 85 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अष्टविनायक में ओझर का क्रम क्या है?
गणपति को विघ्नेश्वर क्यों कहते हैं?
ओझर मंदिर का शिखर सुनहरा क्यों है?
ओझर का प्रमुख उत्सव कौन सा है?
ओझर से लेण्याद्री कितनी दूर है?
विघ्नेश्वर (विघ्नहर) गणपति मंदिर (अष्टविनायक), ओझर इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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नासिक, महाराष्ट्र भद्रकाली मंदिर (जनस्थान शक्तिपीठ), नासिक माँ भद्रकाली; शक्तिपीठ – भ्रामरी, भैरव विकृताक्ष
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रायगढ़, महाराष्ट्र बल्लालेश्वर गणपति मंदिर, पाली श्री बल्लालेश्वर गणपति; ढुंढी विनायक
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पुणे, महाराष्ट्र चिंतामणि गणपति मंदिर (अष्टविनायक), थेऊर श्री चिंतामणि गणपति (स्वयंभू विग्रह)
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पुणे, महाराष्ट्र गिरिजात्मज गणपति मंदिर (अष्टविनायक), लेण्याद्री श्री गिरिजात्मज गणपति (गुफा की शिला में स्वयंभू विग्रह)
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पुणे, महाराष्ट्र महागणपति मंदिर (अष्टविनायक), रांजणगाँव श्री महागणपति, ऋद्धि-सिद्धि सहित
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