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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

विघ्नेश्वर (विघ्नहर) गणपति मंदिर (अष्टविनायक), ओझर

Vighneshwar (Vighnahar) Ganapati Temple (Ashtavinayak), Ozar

पुणे, महाराष्ट्र श्री विघ्नेश्वर (विघ्नहर) गणपति, ऋद्धि-सिद्धि सहित निःशुल्क प्रवेश

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर, जिसे विघ्नहर गणपति भी कहते हैं, पुणे जिले के जुन्नर तालुका में कुकडी नदी के तट पर बसे ओझर गाँव में स्थित है। यह अष्टविनायक यात्रा का सातवाँ स्थान है। ऊँची पत्थर की चारदीवारी, सुनहरा शिखर और प्रवेश द्वार की दो विशाल दीपमालाएँ इसे अष्टविनायकों में सबसे भव्य दिखने वाले मंदिरों में शामिल करती हैं। यहाँ गणपति सभी विघ्नों को हरने वाले के रूप में पूजे जाते हैं।

विघ्नासुर की कथा

कथा के अनुसार राजा अभिनंदन ने एक महान यज्ञ आरंभ किया, जिसमें इंद्र को भाग नहीं दिया गया। क्रुद्ध इंद्र ने काल को विघ्नासुर के रूप में यज्ञ भंग करने भेजा। वह असुर यज्ञों और धर्म-कर्मों में बाधा डालने लगा। ऋषियों की प्रार्थना पर गणेश जी ने उससे युद्ध कर उसे परास्त किया। हारकर विघ्नासुर ने शरण ली और प्रार्थना की कि उसका नाम गणेश जी के नाम के साथ जुड़ा रहे। तब से गणपति यहाँ विघ्नेश्वर कहलाए और ऋषियों ने इसी स्थान पर उनकी प्रतिष्ठा की।

मंदिर और विग्रह

पूर्वाभिमुख विग्रह की सूंड बाईं ओर है, नेत्रों में माणिक, मस्तक पर हीरा और नाभि में रत्न जड़ा है। दोनों ओर ऋद्धि और सिद्धि की मूर्तियाँ हैं। माना जाता है कि पेशवा बाजीराव प्रथम के भाई चिमाजी अप्पा ने वसई किले पर पुर्तगालियों से विजय के बाद मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और शिखर को स्वर्ण से मंडित कराया। सन् 1967 में अप्पा शास्त्री जोशी के प्रयासों से इसका फिर जीर्णोद्धार हुआ। मंदिर चारों ओर ऊँची पत्थर की दीवार से घिरा है और प्रवेश द्वार के पास दो ऊँची पत्थर की दीपमालाएँ खड़ी हैं।

प्रमुख उत्सव

  • कार्तिक पूर्णिमा: पाँच दिन का उत्सव, जब दीपमालाएँ और पूरा मंदिर दीपों से जगमगाता है।
  • गणेश चतुर्थी (भाद्रपद) और माघी गणेश जयंती।
  • हर संकष्टी और अंगारकी चतुर्थी पर भारी भीड़।

यात्रा क्रम और आसपास के दर्शन

अष्टविनायक क्रम में ओझर लेण्याद्री (गिरिजात्मज) के बाद और रांजणगाँव (महागणपति) से पहले आता है। लेण्याद्री यहाँ से लगभग 15 किमी दूर है, इसलिए दोनों के दर्शन प्रायः एक साथ होते हैं। पास ही येडगाँव बाँध, नारायणगाँव और जुन्नर का शिवनेरी किला भी देखने योग्य हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 10:30 बजे तक
  • आरती: सुबह, मध्याह्न और संध्या

कार्तिक पूर्णिमा, गणेश चतुर्थी और अंगारकी चतुर्थी पर विशेष भीड़ रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • श्री विघ्नेश्वर – बाईं सूंड, माणिक जड़े नेत्र और मस्तक पर हीरे वाला पूर्वाभिमुख विग्रह।
  • चिमाजी अप्पा द्वारा मंडित स्वर्ण शिखर।
  • प्रवेश द्वार के पास दो ऊँची पत्थर की दीपमालाएँ।
  • कुकडी नदी का तट और पास का येडगाँव बाँध।
  • निकट अष्टविनायक – लेण्याद्री का गिरिजात्मज; जुन्नर का शिवनेरी किला।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: पुणे से लगभग 85 किमी (पुणे–नासिक राजमार्ग से नारायणगाँव होकर; नारायणगाँव से लगभग 9 किमी)। जुन्नर से भी सड़क मार्ग।
  • रेल मार्ग: पुणे जंक्शन (लगभग 85 किमी)।
  • हवाई मार्ग: पुणे हवाई अड्डा (लगभग 85 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अष्टविनायक में ओझर का क्रम क्या है?
पारंपरिक अष्टविनायक यात्रा में ओझर का विघ्नेश्वर सातवाँ स्थान है। यह लेण्याद्री के बाद और रांजणगाँव से पहले आता है।
गणपति को विघ्नेश्वर क्यों कहते हैं?
कथा के अनुसार राजा अभिनंदन के यज्ञ को भंग करने के लिए इंद्र ने काल को विघ्नासुर के रूप में भेजा। गणेश जी ने उसे परास्त किया तो उसने शरण ली और प्रार्थना की कि उसका नाम गणेश जी के साथ जुड़ जाए। इसलिए यहाँ गणपति विघ्नेश्वर या विघ्नहर कहलाते हैं।
ओझर मंदिर का शिखर सुनहरा क्यों है?
माना जाता है कि पेशवा बाजीराव प्रथम के भाई चिमाजी अप्पा ने वसई किले पर पुर्तगालियों से विजय के बाद मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और शिखर को स्वर्ण से मंडित कराया।
ओझर का प्रमुख उत्सव कौन सा है?
कार्तिक पूर्णिमा से पाँच दिन का उत्सव होता है, जिसमें दीपमालाएँ प्रज्वलित की जाती हैं। गणेश चतुर्थी और माघी गणेश जयंती भी धूमधाम से मनाई जाती हैं।
ओझर से लेण्याद्री कितनी दूर है?
ओझर और लेण्याद्री दोनों पुणे जिले के जुन्नर तालुका में हैं और सड़क मार्ग से लगभग 15 किमी दूर हैं, इसलिए दोनों के दर्शन एक ही दिन में हो जाते हैं।

विघ्नेश्वर (विघ्नहर) गणपति मंदिर (अष्टविनायक), ओझर इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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