चट्टल शक्तिपीठ बांग्लादेश के चट्टोग्राम ज़िले में सीताकुंड के पास चंद्रनाथ पहाड़ी पर स्थित है। इसे 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहाँ सती की दायीं भुजा गिरी थी। यहाँ की शक्ति भवानी और भैरव चंद्रशेखर हैं। पहाड़ी की चोटी पर स्थित शिव का चंद्रनाथ मंदिर इस तीर्थ की पहचान है, इसलिए पूरा क्षेत्र चंद्रनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध है।
भवानी और चंद्रनाथ
हर शक्तिपीठ की तरह यहाँ भी देवी और भैरव दोनों की पूजा होती है। देवी भवानी रूप में पूजी जाती हैं, और शिव चंद्रशेखर – माथे पर चंद्रमा धारण करने वाले – अर्थात् चंद्रनाथ के रूप में। पीठ निर्णय तंत्र में इस पीठ का उल्लेख “चट्टल” नाम से मिलता है, और सीताकुंड का भवानी मंदिर इसी पीठ से जोड़ा जाता है।
इतिहास
वर्तमान मंदिर लगभग 11वीं शताब्दी का माना जाता है। त्रिपुरा के इतिहास-ग्रंथ राजमाला में चंद्रनाथ की यात्रा का उल्लेख मिलता है, और त्रिपुरा के राजा धन्य माणिक्य ने मंदिर को अनेक दान दिए थे। एक परंपरा के अनुसार कवि जयदेव भी कुछ समय यहाँ रहे थे। चोटी से नीचे पहाड़ी पर स्थित विरूपाक्ष मंदिर भी दिखाई देता है।
शिव चतुर्दशी मेला
फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी (महाशिवरात्रि) पर सीताकुंड में विशाल शिव चतुर्दशी मेला लगता है, जो सामान्यतः फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में पड़ता है। इसे उपमहाद्वीप के पुराने धार्मिक मेलों में गिना जाता है। बांग्लादेश और भारत से लाखों श्रद्धालु सीढ़ियाँ चढ़कर चंद्रनाथ के दर्शन करते हैं।
स्थान को लेकर मत
चट्टल पीठ की पहचान सीताकुंड की चंद्रनाथ पहाड़ी से सामान्यतः स्वीकार की जाती है, और इस पर बड़ा मतभेद नहीं है। अंतर मुख्यतः नामों में है – कुछ स्रोत भैरव को चंद्रशेखर कहते हैं, तो कुछ सीधे चंद्रनाथ, जबकि शक्ति-मंदिर को चट्टल भवानी या सीताकुंड भवानी मंदिर भी कहा जाता है।
यात्रा सुझाव
भारत से जाने के लिए पासपोर्ट और बांग्लादेश वीज़ा आवश्यक है; नियम बदलते रहते हैं, इसलिए वर्तमान आधिकारिक नियम पहले जाँच लें। चढ़ाई लंबी है, इसलिए सुबह जल्दी शुरू करें, पानी साथ रखें और अंधेरे से पहले लौट आएँ। मेले के दिनों में भारी भीड़ रहती है, ऐसे में सीढ़ियों पर विशेष सावधानी रखें। ठहरने के लिए चट्टोग्राम शहर सुविधाजनक है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सामान्यतः सुबह लगभग 6:00 से शाम ढलने तक
मंदिर पहाड़ी की चोटी पर है, इसलिए चढ़ाई सुबह जल्दी शुरू करें और अंधेरा होने से पहले नीचे लौट आएँ। समय स्थानीय रूप से बदल सकता है।
मुख्य आकर्षण
- चंद्रनाथ पहाड़ी की चोटी पर स्थित चंद्रनाथ (शिव) मंदिर।
- माँ भवानी का शक्तिपीठ मंदिर।
- चोटी से नीचे दिखाई देने वाला विरूपाक्ष मंदिर।
- फाल्गुन मास का शिव चतुर्दशी मेला।
- पहाड़ी की सीढ़ियाँ और ऊपर से दिखने वाला प्राकृतिक दृश्य।
कैसे पहुँचें
- भारत से: भारतीय नागरिकों को वैध पासपोर्ट और बांग्लादेश वीज़ा की आवश्यकता होती है। वीज़ा और सीमा-पार के नियम बदलते रहते हैं, इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक स्रोतों से वर्तमान नियम अवश्य जाँच लें।
- सीमा मार्ग: पूर्वोत्तर भारत से अगरतला–अखौड़ा सीमा होकर चट्टोग्राम की ओर जाया जा सकता है; कोलकाता की ओर से पेट्रापोल–बेनापोल सीमा या ढाका की उड़ान लेकर।
- हवाई मार्ग: चट्टोग्राम का शाह अमानत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे निकट है।
- सड़क / रेल: सीताकुंड चट्टोग्राम शहर के उत्तर में ढाका–चट्टोग्राम राजमार्ग और रेलमार्ग पर है; वहाँ से पहाड़ी के नीचे तक ऑटो या रिक्शा, फिर पैदल चढ़ाई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चट्टल शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
चंद्रनाथ मंदिर कहाँ है?
सीताकुंड का शिव चतुर्दशी मेला कब लगता है?
भारत से चंद्रनाथ मंदिर कैसे पहुँचें?
चंद्रनाथ पहाड़ी की चढ़ाई कैसी है?
चट्टल (चंद्रनाथ) शक्तिपीठ, सीताकुंड चट्टोग्राम (बांग्लादेश) इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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बोगुड़ा, बांग्लादेश करतोयातट (भवानीपुर) शक्तिपीठ, शेरपुर बोगुड़ा (बांग्लादेश) माँ अपर्णा (माँ भवानी / तारा); भैरव – वामन
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सिलहट, बांग्लादेश जयंती शक्तिपीठ, जैंतियापुर सिलहट (बांग्लादेश) माँ जयंती; भैरव – क्रमदीश्वर
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सातखीरा, बांग्लादेश यशोरेश्वरी काली मंदिर, ईश्वरीपुर सातखीरा बांग्लादेश माँ यशोरेश्वरी (काली)
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सिलहट, बांग्लादेश श्रीशैल महालक्ष्मी शक्तिपीठ, जोइनपुर सिलहट (बांग्लादेश) माँ महालक्ष्मी; भैरव – शंबरानंद
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बरिशाल, बांग्लादेश सुगंधा शक्तिपीठ, शिकारपुर बरिशाल (बांग्लादेश) माँ सुनंदा (सुगंधा देवी); भैरव – त्र्यंबक
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पुणे, महाराष्ट्र विघ्नेश्वर (विघ्नहर) गणपति मंदिर (अष्टविनायक), ओझर श्री विघ्नेश्वर (विघ्नहर) गणपति, ऋद्धि-सिद्धि सहित