जयंती शक्तिपीठ बांग्लादेश के सिलहट ज़िले के जैंतियापुर क्षेत्र में माना जाता है। इसे 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहाँ सती की बायीं जंघा गिरी थी। यहाँ की शक्ति जयंती और भैरव क्रमदीश्वर हैं। बांग्लादेश की परंपरा में यह मंदिर जैंतियापुर उपज़िले के फालजूर क्षेत्र के बाउरभाग (कालाजोर) गाँव में बताया जाता है और स्थानीय रूप से फालजूर कालीबाड़ी कहलाता है।
जयंती नाम और जयंतिया क्षेत्र
“जयंती” का अर्थ है विजय देने वाली। जैंतियापुर कभी जयंतिया राज्य की राजधानी रहा, और कई इतिहासकार मानते हैं कि इस क्षेत्र का नाम देवी जयंती (जयंतेश्वरी) से जुड़ा है। एक स्थानीय परंपरा के अनुसार गाँव का पुराना नाम “बामुर” था, जिसे बायीं (वाम) जंघा गिरने की कथा से जोड़ा जाता है।
देवी जयंती और भैरव क्रमदीश्वर
यहाँ देवी की आराधना जयंती रूप में होती है और उनके साथ भैरव क्रमदीश्वर की पूजा होती है। अलग-अलग स्रोतों में भैरव का नाम क्रमदीश्वर, क्रमदीश या कमदीश्वर भी लिखा मिलता है। स्थानीय रूप से यह स्थान एक ग्रामीण कालीबाड़ी के रूप में जाना जाता है।
स्थान को लेकर मत
जयंती पीठ का स्थान विवादित है। बांग्लादेश में इसे जैंतियापुर के बाउरभाग गाँव में माना जाता है, जबकि भारत में बहुत से स्रोत मेघालय की जयंतिया पहाड़ियों में स्थित नर्तियांग दुर्गा मंदिर को जयंती शक्तिपीठ मानते हैं। जैंतियापुर और नर्तियांग दोनों जयंतिया राजाओं से जुड़े थे, इसलिए दोनों स्थानों का दावा है। ठोस प्रमाणों की कमी के कारण इसे निश्चित रूप से तय नहीं माना जा सकता, और श्रद्धालु दोनों स्थानों पर दर्शन करते हैं।
सिलहट का दूसरा शक्तिपीठ
सिलहट ज़िले में ही, सिलहट शहर के पास दक्षिण सुरमा के जोइनपुर गाँव में श्रीशैल (महालक्ष्मी) शक्तिपीठ है, जहाँ सती की ग्रीवा गिरी मानी जाती है। सिलहट शहर में ठहरकर दोनों पीठों के दर्शन एक ही यात्रा में किए जा सकते हैं।
यात्रा सुझाव
भारत से जाने के लिए पासपोर्ट और बांग्लादेश वीज़ा आवश्यक है; नियम बदलते रहते हैं, इसलिए वर्तमान आधिकारिक नियम पहले जाँच लें। गाँव का रास्ता पूछने के लिए जैंतियापुर में स्थानीय लोगों की मदद लें। यह क्षेत्र भारी वर्षा वाला है, इसलिए अक्टूबर से मार्च के बीच यात्रा बेहतर रहती है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे और शाम लगभग 4:00 से 7:00 बजे तक
गाँव का मंदिर होने के कारण समय स्थानीय रूप से बदल सकता है।
मुख्य आकर्षण
- माँ जयंती का मंदिर (स्थानीय रूप से फालजूर कालीबाड़ी)।
- क्रमदीश्वर भैरव का स्थान।
- जैंतियापुर – जयंतिया राज्य की पुरानी राजधानी का क्षेत्र।
- सिलहट के पास श्रीशैल (महालक्ष्मी) शक्तिपीठ।
कैसे पहुँचें
- भारत से: भारतीय नागरिकों को वैध पासपोर्ट और बांग्लादेश वीज़ा की आवश्यकता होती है। वीज़ा और सीमा-पार के नियम बदलते रहते हैं, इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक स्रोतों से वर्तमान नियम अवश्य जाँच लें।
- सीमा मार्ग: मेघालय में शिलांग से दावकी होकर दावकी–तामाबिल सीमा पार करके सिलहट क्षेत्र में पहुँचा जा सकता है; जैंतियापुर सिलहट और तामाबिल के बीच के क्षेत्र में पड़ता है।
- हवाई मार्ग: सिलहट का ओस्मानी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा; कोलकाता की ओर से ढाका होकर भी सिलहट पहुँचा जा सकता है।
- स्थानीय: सिलहट शहर से बस या टैक्सी द्वारा जैंतियापुर, फिर स्थानीय वाहन से गाँव तक।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जयंती शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
जयंती शक्तिपीठ कहाँ है?
क्या जयंती शक्तिपीठ मेघालय में भी माना जाता है?
भारत से जयंती शक्तिपीठ कैसे पहुँचें?
सिलहट में और कौन सा शक्तिपीठ है?
जयंती शक्तिपीठ, जैंतियापुर सिलहट (बांग्लादेश) इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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बोगुड़ा, बांग्लादेश करतोयातट (भवानीपुर) शक्तिपीठ, शेरपुर बोगुड़ा (बांग्लादेश) माँ अपर्णा (माँ भवानी / तारा); भैरव – वामन
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चट्टोग्राम, बांग्लादेश चट्टल (चंद्रनाथ) शक्तिपीठ, सीताकुंड चट्टोग्राम (बांग्लादेश) माँ भवानी; भैरव – चंद्रशेखर (चंद्रनाथ)
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सातखीरा, बांग्लादेश यशोरेश्वरी काली मंदिर, ईश्वरीपुर सातखीरा बांग्लादेश माँ यशोरेश्वरी (काली)
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सिलहट, बांग्लादेश श्रीशैल महालक्ष्मी शक्तिपीठ, जोइनपुर सिलहट (बांग्लादेश) माँ महालक्ष्मी; भैरव – शंबरानंद
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बरिशाल, बांग्लादेश सुगंधा शक्तिपीठ, शिकारपुर बरिशाल (बांग्लादेश) माँ सुनंदा (सुगंधा देवी); भैरव – त्र्यंबक
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पुणे, महाराष्ट्र विघ्नेश्वर (विघ्नहर) गणपति मंदिर (अष्टविनायक), ओझर श्री विघ्नेश्वर (विघ्नहर) गणपति, ऋद्धि-सिद्धि सहित