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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्रीशैल महालक्ष्मी शक्तिपीठ, जोइनपुर सिलहट (बांग्लादेश)

Shri Shail Mahalakshmi Shaktipeeth, Joinpur Sylhet (Bangladesh)

सिलहट, बांग्लादेश माँ महालक्ष्मी; भैरव – शंबरानंद निःशुल्क प्रवेश

श्रीशैल शक्तिपीठ बांग्लादेश में सिलहट शहर से लगभग 3 किमी दूर दक्षिण सुरमा क्षेत्र के जोइनपुर गाँव में, गोटाटिकर के पास स्थित है। इसे 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहाँ सती की ग्रीवा (गर्दन) गिरी थी। यहाँ की शक्ति महालक्ष्मी और भैरव शंबरानंद हैं। मंदिर का पूरा नाम श्री श्री महालक्ष्मी भैरवी ग्रीवा महापीठ है।

ग्रीवा महापीठ

दक्ष यज्ञ में सती के देह-त्याग के बाद भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के खंड किए, और जहाँ-जहाँ अंग गिरे वहाँ शक्तिपीठ बने। सिलहट क्षेत्र का प्राचीन नाम श्रीहट्ट था। यहाँ गिरी ग्रीवा के कारण ही मंदिर “ग्रीवा महापीठ” कहलाता है। बताया जाता है कि यहाँ देवी की कोई गढ़ी हुई मूर्ति नहीं है, बल्कि पीठ-स्थान की ही पूजा होती है।

देवी महालक्ष्मी और भैरव शंबरानंद

यहाँ देवी की आराधना महालक्ष्मी रूप में होती है – जो धन, समृद्धि और कल्याण की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं – और उनके साथ भैरव शंबरानंद की पूजा होती है। दुर्गा पूजा और नवरात्रि के समय यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।

स्थान को लेकर मत

बांग्लादेश में श्रीशैल ग्रीवा पीठ की पहचान जोइनपुर से की जाती है, जबकि कुछ सूचियाँ “श्रीशैल” पीठ को आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम (मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग और भ्रमरांबा देवी का तीर्थ) से जोड़ती हैं। दोनों स्थान अपनी-अपनी परंपरा में पूज्य हैं। कुछ विवरणों में मंदिर की दिशा सिलहट शहर से दक्षिण-पूर्व के बजाय उत्तर-पूर्व भी बताई गई है।

सिलहट का दूसरा शक्तिपीठ

सिलहट ज़िले में ही जैंतियापुर क्षेत्र में जयंती शक्तिपीठ है, जहाँ सती की बायीं जंघा गिरी मानी जाती है। सिलहट शहर में ठहरकर दोनों पीठों के दर्शन एक ही यात्रा में किए जा सकते हैं।

यात्रा सुझाव

भारत से जाने के लिए पासपोर्ट और बांग्लादेश वीज़ा आवश्यक है; नियम बदलते रहते हैं, इसलिए वर्तमान आधिकारिक नियम पहले जाँच लें। पूर्वोत्तर भारत से आने वाले यात्रियों के लिए दावकी–तामाबिल सीमा सिलहट के सबसे निकट है। सिलहट में भारी वर्षा होती है, इसलिए अक्टूबर से मार्च के बीच यात्रा बेहतर रहती है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे और शाम लगभग 4:00 से 8:00 बजे तक

गाँव का मंदिर होने के कारण समय स्थानीय रूप से बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • श्री श्री महालक्ष्मी भैरवी ग्रीवा महापीठ – मुख्य मंदिर।
  • शंबरानंद भैरव का स्थान।
  • सुरमा नदी के किनारे बसा सिलहट शहर।
  • सिलहट ज़िले के जैंतियापुर क्षेत्र का जयंती शक्तिपीठ।

कैसे पहुँचें

  • भारत से: भारतीय नागरिकों को वैध पासपोर्ट और बांग्लादेश वीज़ा की आवश्यकता होती है। वीज़ा और सीमा-पार के नियम बदलते रहते हैं, इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक स्रोतों से वर्तमान नियम अवश्य जाँच लें।
  • सीमा मार्ग: मेघालय में शिलांग से दावकी होकर दावकी–तामाबिल सीमा पार करके सड़क मार्ग से सिलहट पहुँचा जा सकता है; कोलकाता की ओर से पेट्रापोल–बेनापोल सीमा या उड़ान द्वारा ढाका होकर भी।
  • हवाई मार्ग: सिलहट का ओस्मानी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे निकट है।
  • स्थानीय: मंदिर सिलहट शहर से लगभग 3 किमी दूर दक्षिण सुरमा क्षेत्र के जोइनपुर गाँव में है; शहर से ऑटो या रिक्शा द्वारा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्रीशैल शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
मान्यता है कि श्रीशैल शक्तिपीठ में सती की ग्रीवा (गर्दन) गिरी थी। यहाँ की शक्ति महालक्ष्मी और भैरव शंबरानंद हैं।
श्रीशैल शक्तिपीठ कहाँ है?
यह बांग्लादेश में सिलहट शहर से लगभग 3 किमी दूर दक्षिण सुरमा क्षेत्र के जोइनपुर गाँव में, गोटाटिकर के पास स्थित है।
क्या यह आंध्र प्रदेश का श्रीशैलम है?
नहीं, ये दो अलग स्थान हैं। आंध्र प्रदेश का श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग और भ्रमरांबा देवी का तीर्थ है। बांग्लादेश की परंपरा श्रीशैल ग्रीवा पीठ को सिलहट के जोइनपुर में मानती है, जबकि कुछ सूचियाँ इस पीठ को श्रीशैलम से जोड़ती हैं।
भारत से श्रीशैल शक्तिपीठ कैसे पहुँचें?
पासपोर्ट और बांग्लादेश वीज़ा लेकर शिलांग–दावकी होते हुए दावकी–तामाबिल सीमा से या ढाका होकर सिलहट पहुँचें। सिलहट शहर से मंदिर लगभग 3 किमी है। यात्रा से पहले वर्तमान नियम जाँच लें।
सिलहट में और कौन सा शक्तिपीठ है?
सिलहट ज़िले के जैंतियापुर क्षेत्र में जयंती शक्तिपीठ है, जहाँ सती की बायीं जंघा गिरी मानी जाती है। सिलहट में ठहरकर दोनों के दर्शन किए जा सकते हैं।

श्रीशैल महालक्ष्मी शक्तिपीठ, जोइनपुर सिलहट (बांग्लादेश) इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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