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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

बाबा बूढ़ानाथ मंदिर, भागलपुर

Baba Budhanath Temple, Bhagalpur

Bhagalpur, बिहार भगवान शिव (बाबा बूढ़ानाथ / वृद्धेश्वरनाथ) निःशुल्क प्रवेश

बाबा बूढ़ानाथ मंदिर बिहार के भागलपुर नगर के जोगसर (आदमपुर) क्षेत्र में गंगा के तट पर स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। यहाँ महादेव बाबा बूढ़ानाथ या वृद्धेश्वरनाथ नाम से पूजे जाते हैं। इसे भागलपुर का ऐतिहासिक और पौराणिक शिवधाम माना जाता है, और सावन में यहाँ अंग क्षेत्र के सबसे बड़े शिव-पर्वों में से एक का दृश्य देखने को मिलता है। भागलपुर प्राचीन अंग जनपद की राजधानी चंपा के क्षेत्र में बसा है, और यह मंदिर उस विरासत का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है।

स्थल की कथा

प्रचलित मान्यता के अनुसार यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू है और इसकी प्रतिष्ठा महर्षि वशिष्ठ ने की थी। एक लोककथा इसे त्रेता युग से जोड़ती है, जिसमें वशिष्ठ मुनि का संबंध श्रीराम और लक्ष्मण से बताया जाता है; दूसरी परंपरा इसे और भी प्राचीन मानती है। मंदिर के निर्माण की कोई निश्चित ऐतिहासिक तिथि उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन कथाओं को आस्था की परंपरा के रूप में ही देखना चाहिए। “बूढ़ानाथ” नाम का अर्थ है वृद्ध (प्राचीन) नाथ, जो शिवलिंग की प्राचीनता की ओर संकेत करता है।

मंदिर और परिसर

मुख्य गर्भगृह में बाबा बूढ़ानाथ का शिवलिंग है और सामने नंदी विराजमान हैं। परिसर में माँ दुर्गा, राधा-कृष्ण, हनुमान और पार्वती के विग्रह भी हैं। मुख्य मंदिर के पास माँ भवानी का मंदिर है – स्थानीय मान्यता है कि देवी की प्रतिमा गंगा में बहकर मुंगेर की ओर से यहाँ आई थी। मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला से अधिक अपने आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है।

बूढ़ानाथ घाट

मंदिर से सटा बूढ़ानाथ घाट गंगा स्नान के लिए प्रसिद्ध है। श्रद्धालु घाट पर स्नान करके गंगाजल लेते हैं और बाबा का जलाभिषेक करते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • सावन: भोर में विधि-विधान से “सरकारी पूजा” और बाबा का श्रृंगार, उसके बाद पट खुलते ही जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें; सोमवारी को सबसे अधिक भीड़।
  • महाशिवरात्रि: रात भर पूजा और रुद्राभिषेक।
  • दुर्गा पूजा: मंदिर परिसर की विशेष सजावट।

यात्रा क्रम / आसपास के दर्शन

मंदिर भागलपुर जंक्शन से लगभग 1.6 किमी दूर है। भागलपुर आने वाले यात्री सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम और कहलगाँव के पास विक्रमशिला महाविहार के अवशेष भी देख सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सामान्यतः सुबह लगभग 5:00 से रात 9:00–10:00 बजे तक
  • सावन में: भोर में सरकारी पूजा के बाद पट खुलते हैं और देर रात तक जलाभिषेक चलता है।

मुख्य आकर्षण

  • बाबा बूढ़ानाथ शिवलिंग – स्वयंभू माना जाने वाला प्राचीन शिवलिंग।
  • बूढ़ानाथ घाट – गंगा का घाट, जहाँ स्नान और जलाभिषेक के लिए जल लिया जाता है।
  • माँ भवानी का मंदिर – परिसर में स्थित देवी मंदिर।
  • परिसर में दुर्गा, राधा-कृष्ण, हनुमान और नंदी के विग्रह।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: भागलपुर जंक्शन (लगभग 1.6 किमी) – खलीफाबाग होकर ऑटो या ई-रिक्शा से 10–20 मिनट।
  • सड़क मार्ग: भागलपुर पटना, मुंगेर, देवघर और पूर्णिया से सड़क मार्ग से जुड़ा है।
  • हवाई मार्ग: निकटतम बड़े हवाई अड्डे देवघर और पटना हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बूढ़ानाथ मंदिर किस देवता को समर्पित है?
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें यहाँ बाबा बूढ़ानाथ या वृद्धेश्वरनाथ कहा जाता है। परिसर में माँ भवानी और अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं।
बूढ़ानाथ मंदिर का इतिहास क्या है?
मान्यता है कि यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू है और इसकी प्रतिष्ठा महर्षि वशिष्ठ ने की थी। मंदिर को भागलपुर का ऐतिहासिक और पौराणिक शिवधाम माना जाता है, पर इसके निर्माण की कोई निश्चित तिथि उपलब्ध नहीं है।
बूढ़ानाथ मंदिर में सरकारी पूजा क्या है?
सावन के दिनों में भोर में पूर्ण विधि-विधान से 'सरकारी पूजा' और बाबा का श्रृंगार होता है, जिसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए पट खोले जाते हैं।
भागलपुर स्टेशन से बूढ़ानाथ मंदिर कितनी दूर है?
मंदिर भागलपुर जंक्शन से लगभग 1.6 किमी दूर है। खलीफाबाग और बूढ़ानाथ रोड होकर ऑटो या ई-रिक्शा से 10–20 मिनट में पहुँचा जा सकता है।
बूढ़ानाथ मंदिर गंगा के किनारे कहाँ है?
मंदिर भागलपुर में गंगा के दक्षिणी तट पर है; स्थानीय परंपरा में यहाँ की धारा को उत्तरवाहिनी गंगा कहा जाता है। मंदिर से सटा बूढ़ानाथ घाट स्नान और जलाभिषेक के लिए प्रसिद्ध है।

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