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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

माँ ताराचंडी मंदिर, सासाराम

Maa Tara Chandi Temple, Sasaram

Sasaram, बिहार माँ ताराचंडी (देवी तारा / दुर्गा) निःशुल्क प्रवेश

माँ ताराचंडी मंदिर बिहार के रोहतास जिले के मुख्यालय सासाराम के पास, विंध्य पर्वतमाला की कैमूर पहाड़ी की एक प्राकृतिक गुफा में स्थित देवी का प्राचीन स्थान है। यहाँ माँ शक्ति तारा रूप में पूजी जाती हैं। इसे सासाराम के सबसे पुराने और पवित्र मंदिरों में गिना जाता है, और रोहतास-कैमूर क्षेत्र के लोगों की यह प्रमुख आराध्य देवी हैं।

शक्तिपीठ को लेकर मत

प्रचलित मान्यता के अनुसार यह शक्तिपीठ है, जहाँ भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर सती का दाहिना नेत्र गिरा था। शक्तिपीठों की सूचियाँ अलग-अलग ग्रंथों में भिन्न हैं और यह स्थान सभी सूचियों में नहीं मिलता, पर स्थानीय श्रद्धालु इसे शक्तिपीठ के रूप में ही पूजते हैं।

इतिहास और शिलालेख

मंदिर के पास चट्टान पर खरवार वंश के राजा महानायक प्रताप धवलदेव का 12वीं शताब्दी का बड़ा शिलालेख है, जिसे उनके पुत्र शत्रुघ्न ने उत्कीर्ण कराया था। इससे पता चलता है कि उस समय तक ताराचंडी देवी की ख्याति दूर तक फैल चुकी थी। परिसर में माँ तारा और सूर्य की प्रतिमाएँ तथा बाहर रखी अग्नि की खंडित मूर्ति उत्तर गुप्तकाल की मानी जाती हैं।

मंदिर और विग्रह

जिला प्रशासन के विवरण के अनुसार माँ तारा की प्रतिमा चतुर्भुजा, नील वर्ण और लंबोदर है। देवी का बायाँ पैर शव पर रखा है और वे बाघंबर धारण किए हैं। गुफा के प्राकृतिक परिवेश में स्थित होने से यहाँ का वातावरण शांत और साधना के अनुकूल है।

प्रमुख उत्सव और आसपास

  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि: सबसे बड़े पर्व, भारी भीड़।
  • महाशिवरात्रि: विशेष पूजा।
  • कैमूर पहाड़ियों में गुप्ता महादेव, पार्वती मंदिर, माँझर कुंड और धुआँ कुंड जैसे स्थल।
  • शेरशाह सूरी का मकबरा – सासाराम नगर में।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 9:00 बजे तक

नवरात्रि में भीड़ अधिक रहती है; समय स्थानीय सूचना से जाँच लें।

मुख्य आकर्षण

  • माँ तारा – चतुर्भुजा, नील वर्ण, शव पर बायाँ पैर रखे हुए।
  • प्राकृतिक गुफा – कैमूर पहाड़ी (विंध्य पर्वतमाला) में।
  • प्रताप धवलदेव का शिलालेख – 12वीं शताब्दी का।
  • उत्तर गुप्तकालीन प्रतिमाएँ – तारा, सूर्य और बाहर अग्नि की खंडित मूर्ति।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: सासाराम जंक्शन – दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर।
  • सड़क मार्ग: राष्ट्रीय राजमार्ग 2 (ग्रैंड ट्रंक रोड) पर; पटना, आरा, वाराणसी से बसें।
  • हवाई मार्ग: वाराणसी, गया या पटना हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ताराचंडी मंदिर शक्तिपीठ है?
प्रचलित मान्यता इसे शक्तिपीठ मानती है और कहती है कि यहाँ सती का दाहिना नेत्र गिरा था। शक्तिपीठों की सूचियाँ ग्रंथों में भिन्न हैं, इसलिए यह मान्यता सभी सूचियों में नहीं मिलती।
ताराचंडी मंदिर कहाँ है?
यह बिहार के रोहतास जिले के मुख्यालय सासाराम के पास, कैमूर पहाड़ी (विंध्य पर्वतमाला) की एक प्राकृतिक गुफा में स्थित है।
ताराचंडी मंदिर का शिलालेख किसका है?
मंदिर के पास चट्टान पर खरवार वंश के राजा महानायक प्रताप धवलदेव का 12वीं शताब्दी का शिलालेख है, जिसे उनके पुत्र शत्रुघ्न ने उत्कीर्ण कराया। इससे पता चलता है कि उस समय तक ताराचंडी की ख्याति फैल चुकी थी।
माँ तारा की प्रतिमा कैसी है?
रोहतास जिला प्रशासन के विवरण के अनुसार माँ तारा की प्रतिमा चतुर्भुजा, नील वर्ण और लंबोदर है। दाहिने हाथ में खड्ग और कैंची तथा बाएँ हाथ में कमल है, बायाँ पैर शव पर रखा है और देवी बाघंबर धारण किए हैं।
ताराचंडी मंदिर में कौन-से पर्व मनाए जाते हैं?
चैत्र और शारदीय नवरात्रि यहाँ के सबसे बड़े पर्व हैं, जब दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। महाशिवरात्रि पर भी विशेष पूजा होती है।

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