माँ ताराचंडी मंदिर बिहार के रोहतास जिले के मुख्यालय सासाराम के पास, विंध्य पर्वतमाला की कैमूर पहाड़ी की एक प्राकृतिक गुफा में स्थित देवी का प्राचीन स्थान है। यहाँ माँ शक्ति तारा रूप में पूजी जाती हैं। इसे सासाराम के सबसे पुराने और पवित्र मंदिरों में गिना जाता है, और रोहतास-कैमूर क्षेत्र के लोगों की यह प्रमुख आराध्य देवी हैं।
शक्तिपीठ को लेकर मत
प्रचलित मान्यता के अनुसार यह शक्तिपीठ है, जहाँ भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर सती का दाहिना नेत्र गिरा था। शक्तिपीठों की सूचियाँ अलग-अलग ग्रंथों में भिन्न हैं और यह स्थान सभी सूचियों में नहीं मिलता, पर स्थानीय श्रद्धालु इसे शक्तिपीठ के रूप में ही पूजते हैं।
इतिहास और शिलालेख
मंदिर के पास चट्टान पर खरवार वंश के राजा महानायक प्रताप धवलदेव का 12वीं शताब्दी का बड़ा शिलालेख है, जिसे उनके पुत्र शत्रुघ्न ने उत्कीर्ण कराया था। इससे पता चलता है कि उस समय तक ताराचंडी देवी की ख्याति दूर तक फैल चुकी थी। परिसर में माँ तारा और सूर्य की प्रतिमाएँ तथा बाहर रखी अग्नि की खंडित मूर्ति उत्तर गुप्तकाल की मानी जाती हैं।
मंदिर और विग्रह
जिला प्रशासन के विवरण के अनुसार माँ तारा की प्रतिमा चतुर्भुजा, नील वर्ण और लंबोदर है। देवी का बायाँ पैर शव पर रखा है और वे बाघंबर धारण किए हैं। गुफा के प्राकृतिक परिवेश में स्थित होने से यहाँ का वातावरण शांत और साधना के अनुकूल है।
प्रमुख उत्सव और आसपास
- चैत्र और शारदीय नवरात्रि: सबसे बड़े पर्व, भारी भीड़।
- महाशिवरात्रि: विशेष पूजा।
- कैमूर पहाड़ियों में गुप्ता महादेव, पार्वती मंदिर, माँझर कुंड और धुआँ कुंड जैसे स्थल।
- शेरशाह सूरी का मकबरा – सासाराम नगर में।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 9:00 बजे तक
नवरात्रि में भीड़ अधिक रहती है; समय स्थानीय सूचना से जाँच लें।
मुख्य आकर्षण
- माँ तारा – चतुर्भुजा, नील वर्ण, शव पर बायाँ पैर रखे हुए।
- प्राकृतिक गुफा – कैमूर पहाड़ी (विंध्य पर्वतमाला) में।
- प्रताप धवलदेव का शिलालेख – 12वीं शताब्दी का।
- उत्तर गुप्तकालीन प्रतिमाएँ – तारा, सूर्य और बाहर अग्नि की खंडित मूर्ति।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: सासाराम जंक्शन – दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर।
- सड़क मार्ग: राष्ट्रीय राजमार्ग 2 (ग्रैंड ट्रंक रोड) पर; पटना, आरा, वाराणसी से बसें।
- हवाई मार्ग: वाराणसी, गया या पटना हवाई अड्डा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ताराचंडी मंदिर शक्तिपीठ है?
ताराचंडी मंदिर कहाँ है?
ताराचंडी मंदिर का शिलालेख किसका है?
माँ तारा की प्रतिमा कैसी है?
ताराचंडी मंदिर में कौन-से पर्व मनाए जाते हैं?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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Patna, बिहार शीतला माता मंदिर, पटना माँ शीतला, सप्तमातृकाएँ
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मधुबनी, बिहार मिथिला शक्तिपीठ (उच्चैठ भगवती), मधुबनी माँ उच्चैठ भगवती (उमा / वनदुर्गा, छिन्नमस्तिका दुर्गा); भैरव – महोदर
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गोपालगंज, बिहार थावे भवानी मंदिर, गोपालगंज माँ थावेवाली (सिंहासिनी भवानी / रहषु भवानी) – देवी दुर्गा
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Gaya, बिहार मंगला गौरी मंदिर, गया माँ मंगला गौरी (सती / गौरी)
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मधुबनी, बिहार उगना महादेव मंदिर, भवानीपुर (मधुबनी) भगवान शिव (उगना महादेव / उग्रनाथ)
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Chapra, बिहार अंबिका भवानी मंदिर (आमी मंदिर), दिघवारा, सारण माँ अंबिका भवानी (सती), साथ में भगवान शिव