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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

थावे भवानी मंदिर, गोपालगंज

Thawe Bhawani Temple, Gopalganj

गोपालगंज, बिहार माँ थावेवाली (सिंहासिनी भवानी / रहषु भवानी) – देवी दुर्गा निःशुल्क प्रवेश

थावे भवानी मंदिर बिहार के गोपालगंज जिले में, जिला मुख्यालय से लगभग 6 किमी दूर गोपालगंज–सीवान मार्ग पर बसे थावे गाँव में स्थित माँ दुर्गा का प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ देवी को माँ थावेवाली, सिंहासिनी भवानी और रहषु भवानी के नाम से पूजा जाता है। उत्तर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों भक्तों के लिए यह आस्था का बड़ा केंद्र है।

रहषु भगत और माँ के आगमन की कथा

लोककथा के अनुसार थावे में माँ कामाख्या का एक सच्चा भक्त रहषु भगत रहता था। उस समय चेरो वंश के राजा मनन सिंह का राज्य था, जहाँ भयंकर अकाल पड़ा। लोग मानते थे कि रहषु देवी की कृपा से भूखों को अन्न दिलाते हैं। राजा ने उन्हें पाखंडी कहा और माँ को बुलाने की चुनौती दी। रहषु ने चेताया कि माँ आईं तो राज्य नष्ट हो जाएगा, पर राजा नहीं माना। रहषु की पुकार पर माँ कामरूप (असम) से थावे पहुँचीं, राजा के भवन ढह गए और राजा की मृत्यु हो गई। तभी से माँ यहाँ थावेवाली के रूप में पूजी जाती हैं।

स्थान को लेकर मत

स्थानीय परंपरा थावे को बिहार के प्रमुख शक्तिपीठों में गिनती है। हालाँकि यह सती के अंग गिरने वाले पारंपरिक 51 पीठों की सूचियों में नहीं आता; इसकी महिमा माँ के कामाख्या से आगमन की कथा पर आधारित है।

पूजा और प्रसाद

सोमवार और शुक्रवार को यहाँ विशेष भीड़ रहती है। भक्त लड्डू, पेड़ा, नारियल और चुनरी चढ़ाते हैं, और यहाँ का पारंपरिक प्रसाद पिड़किया माना जाता है। श्रावण में देवघर जाने वाले कई काँवरिये भी पहले माँ थावेवाली का आशीर्वाद लेते हैं। थावे गाँव में हथुआ राज का पुराना किला और महल भी है, जो अब जर्जर अवस्था में है।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल): बड़ा मेला।
  • शारदीय नवरात्रि (आश्विन): दूसरा बड़ा मेला; सप्तमी को विशेष पूजा और भारी भीड़।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 9:00 बजे तक
  • विशेष दिन: सोमवार और शुक्रवार

नवरात्रि, विशेषकर सप्तमी को भारी भीड़ रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ थावेवाली – सिंहासिनी भवानी के रूप में पूजित।
  • प्राचीन वृक्ष – मंदिर परिसर का पेड़, जिसकी प्रजाति पहचानी नहीं जा सकी है।
  • हथुआ राज का पुराना किला – थावे गाँव में।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: थावे जंक्शन और गोपालगंज स्टेशन निकट।
  • सड़क मार्ग: गोपालगंज से सीवान मार्ग पर लगभग 6 किमी; पटना से गोपालगंज लगभग 144 किमी।
  • हवाई मार्ग: जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पटना; गोरखपुर हवाई अड्डा भी विकल्प।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

थावे मंदिर कहाँ है?
थावे मंदिर बिहार के गोपालगंज जिले में, जिला मुख्यालय से लगभग 6 किमी दूर गोपालगंज–सीवान मार्ग पर थावे गाँव में स्थित है।
थावेवाली माता की कथा क्या है?
लोककथा के अनुसार चेरो वंश के राजा मनन सिंह ने देवी भक्त रहषु भगत को पाखंडी कहकर माँ को बुलाने की चुनौती दी। रहषु की पुकार पर माँ कामाख्या से थावे आईं, और राजा का महल ढह गया तथा राजा की मृत्यु हो गई।
क्या थावे मंदिर शक्तिपीठ है?
स्थानीय परंपरा थावे को बिहार के प्रमुख शक्ति स्थलों में गिनती है और कई लोग इसे शक्तिपीठ कहते हैं। यह 51 शक्तिपीठों की पारंपरिक सूचियों में नहीं आता; यहाँ की मान्यता माँ के कामाख्या से आगमन की कथा पर आधारित है।
थावे में मेला कब लगता है?
माँ थावेवाली का मुख्य मेला वर्ष में दो बार, चैत्र (मार्च-अप्रैल) और आश्विन (सितंबर-अक्टूबर) की नवरात्रि में लगता है। नवरात्रि की सप्तमी को विशेष पूजा होती है।
थावे मंदिर में क्या प्रसाद चढ़ाया जाता है?
भक्त लड्डू, पेड़ा, नारियल और चुनरी चढ़ाते हैं। यहाँ का पारंपरिक प्रसाद पिड़किया माना जाता है।

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