मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

शीतला माता मंदिर, पटना

Shitala Mata Temple, Patna

Patna, बिहार माँ शीतला, सप्तमातृकाएँ निःशुल्क प्रवेश

शीतला माता मंदिर पटना के पुराने हिस्से में गुलज़ारबाग क्षेत्र के प्राचीन अगमकुआँ के ठीक पास स्थित माँ शीतला का प्रसिद्ध स्थान है। माँ शीतला को देवी दुर्गा का ही एक रूप माना जाता है, और भक्तों का विश्वास है कि वे चेचक, खसरा जैसे रोगों से रक्षा करती हैं। पटना के लोगों के लिए यह सदियों से आस्था का केंद्र रहा है।

मंदिर और पिंडियाँ

मंदिर की विशेषता यह है कि गर्भगृह में माँ शीतला के साथ सप्तमातृकाओं – सात मातृ देवियों – की पत्थर की पिंडियाँ पूजी जाती हैं। यहाँ भैरव और चंडी के विग्रह भी स्थापित हैं। महिलाएँ देवी को सोलह श्रृंगार अर्पित करती हैं, नवविवाहित जोड़े यहाँ चौठारी पूजा करने आते हैं, और संतान या स्वास्थ्य की कामना से भी लोग मन्नत माँगते हैं।

अगमकुआँ

मंदिर से सटा अगमकुआँ एक प्राचीन कुआँ है, जिसे परंपरा से मौर्य सम्राट अशोक के काल से जोड़ा जाता है। यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है। मंदिर और कुआँ एक ही परिसर के निकट होने से दर्शनार्थी दोनों को साथ देखते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • शीतला अष्टमी (चैत्र): मंदिर का सबसे बड़ा पर्व, जब दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
  • नवरात्रि और दशहरा: विशेष पूजा और भीड़।
  • मंगलवार: सबसे शुभ दिन; भक्त दीप जलाते हैं और विशेष प्रार्थना करते हैं।

आसपास के दर्शन

पटना सिटी में ही पटन देवी के मंदिर और तख्त श्री हरिमंदिर साहिब हैं। पटना जंक्शन के पास महावीर मंदिर के दर्शन के साथ यह यात्रा एक दिन में पूरी की जा सकती है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से रात लगभग 8:00 बजे तक
  • विशेष दिन: मंगलवार को अधिक भीड़ रहती है

मुख्य आकर्षण

  • सप्तमातृकाओं की पिंडियाँ – माँ शीतला के साथ गर्भगृह में पूजित।
  • भैरव और चंडी के विग्रह।
  • अगमकुआँ – मौर्य काल से जोड़ा जाने वाला प्राचीन कुआँ, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: गुलज़ारबाग स्टेशन निकट; पटना जंक्शन लगभग 8 किमी।
  • सड़क मार्ग: पटना शहर से ऑटो, टैक्सी और ई-रिक्शा।
  • हवाई मार्ग: जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पटना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शीतला माता मंदिर पटना में कहाँ है?
यह मंदिर पटना के गुलज़ारबाग क्षेत्र में प्राचीन अगमकुआँ के ठीक पास है। पटना जंक्शन से लगभग 8 किमी दूर है।
इस मंदिर में किसकी पूजा होती है?
यहाँ माँ शीतला के साथ सप्तमातृकाओं की पिंडियों की पूजा होती है। मंदिर में भैरव और चंडी के विग्रह भी हैं।
शीतला माता की पूजा क्यों की जाती है?
मान्यता है कि माँ शीतला चेचक, खसरा जैसे रोगों से रक्षा करती हैं। इसलिए बीमारी से मुक्ति और परिवार की कुशलता के लिए भक्त यहाँ आते हैं।
शीतला माता मंदिर में सबसे बड़ा पर्व कौन-सा है?
चैत्र मास की शीतला अष्टमी (शीतला पूजा) यहाँ का सबसे बड़ा पर्व है। नवरात्रि में भी भारी भीड़ रहती है और हर मंगलवार को श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं।
अगमकुआँ क्या है?
अगमकुआँ मंदिर के पास स्थित एक प्राचीन कुआँ है, जिसे परंपरा से सम्राट अशोक के काल से जोड़ा जाता है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्थल है।

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook