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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

बाबा मुक्तेश्वरनाथ धाम, देवहार (मधुबनी)

Baba Mukteshwarnath Dham, Deohar (Madhubani)

मधुबनी, बिहार भगवान शिव (बाबा मुक्तेश्वरनाथ, स्वयंभू शिवलिंग); परिसर में माता पार्वती निःशुल्क प्रवेश

बाबा मुक्तेश्वरनाथ धाम बिहार के मिथिला क्षेत्र में मधुबनी ज़िले के अंधराठाढ़ी प्रखंड के देवहार गाँव में स्थित भगवान शिव का मंदिर है, जिसे स्थानीय लोग मुक्तेश्वर स्थान भी कहते हैं। मंदिर की परंपरा के अनुसार “मुक्तेश्वरनाथ” वे हैं जो जीवों को मोक्ष प्रदान करते हैं। यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है और वर्तमान मंदिर लगभग दो सौ वर्ष पुराना बताया जाता है।

अनोखा शिवलिंग और खुदाई की मूर्तियाँ

मंदिर की ओर से बताया जाता है कि कुछ दशक पहले एक संन्यासी ने शिवलिंग के चारों ओर खुदाई करवाई थी, पर जितना गहरा खोदा गया, लिंग उतना ही मोटा और चौड़ा दिखता गया – इसलिए खुदाई रोककर गड्ढा फिर भर दिया गया। इस स्थान पर पुरातात्विक महत्व की वस्तुएँ भी मिली हैं: मिट्टी में भगवान गणेश और माता पार्वती की सुंदर प्रतिमा मिली थी, जिसमें से पार्वती की प्रतिमा अब परिसर के पार्वती मंदिर में स्थापित है।

मिथिला की पंजी परंपरा से जुड़ी कथा

मुक्तेश्वरनाथ धाम का नाम मैथिल ब्राह्मणों की वंशावली-व्यवस्था “पंजी” से भी जुड़ता है। मंदिर से जुड़ी जानकारी में महामहोपाध्याय परमेश्वर झा की पुस्तक मिथिला तत्त्व विमर्श का हवाला देकर एक प्रसंग बताया जाता है – पास के गाँव की एक ब्राह्मण स्त्री पर लगे झूठे आरोप की जाँच के दौरान विवाह-संबंधों की गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद राजा हरिसिंहदेव के समय पंजी व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया। यह प्रसंग परंपरा पर आधारित है। एक लोक मान्यता यह भी है कि यहाँ भगवान परशुराम का आश्रम था और उन्होंने यहाँ तपस्या की थी।

प्रमुख उत्सव

  • महाशिवरात्रि महोत्सव: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को विशेष पूजा।
  • श्रावणी मेला: पूरे सावन जलाभिषेक और रुद्राभिषेक।
  • नरक निवारण चतुर्दशी: माघ कृष्ण चतुर्दशी को मिथिला का विशेष शिव-व्रत।
  • नवरात्र, बैसाखी और सोमवती अमावस्या पर भी भीड़; बड़े सामूहिक पार्थिव शिवलिंग पूजन के आयोजन।

आसपास के दर्शन

अंधराठाढ़ी क्षेत्र प्राचीन काल से कई राजवंशों की राजधानी रहा है और यहाँ मिले पुरावशेष गाँव के वाचस्पति संग्रहालय में सुरक्षित हैं। मधुबनी ज़िले के उगना महादेव (भवानीपुर) और कपिलेश्वर स्थान भी दर्शनीय शिवधाम हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम लगभग 4:00 से रात 9:00 बजे तक
  • महाश्रृंगार व आरती: सुबह लगभग 5:30 और रात लगभग 8:30 बजे

सावन और महाशिवरात्रि पर समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • बाबा मुक्तेश्वरनाथ – स्वयंभू माना जाने वाला अनोखा शिवलिंग।
  • पार्वती मंदिर – खुदाई में मिली माता पार्वती की प्रतिमा यहाँ स्थापित है।
  • पार्थिव शिवलिंग पूजा – बड़े सामूहिक अनुष्ठान।
  • मिथिला की पंजी परंपरा से जुड़ा ऐतिहासिक स्थान।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: मधुबनी ज़िला मुख्यालय से अंधराठाढ़ी होकर देवहार गाँव; स्थानीय वाहन उपलब्ध।
  • रेल मार्ग: निकटवर्ती झंझारपुर या मधुबनी रेलवे स्टेशन; वहाँ से सड़क मार्ग।
  • हवाई मार्ग: दरभंगा हवाई अड्डा (सबसे निकट); पटना हवाई अड्डा भी विकल्प।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बाबा मुक्तेश्वरनाथ धाम कहाँ है?
बाबा मुक्तेश्वरनाथ धाम बिहार के मधुबनी ज़िले के अंधराठाढ़ी प्रखंड के देवहार गाँव में है। स्थानीय लोग इसे मुक्तेश्वर स्थान भी कहते हैं।
मुक्तेश्वरनाथ नाम का क्या अर्थ है?
मंदिर की परंपरा के अनुसार 'मुक्तेश्वरनाथ' वह हैं जो जीवों को मोक्ष (मुक्ति) प्रदान करते हैं। यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है।
मुक्तेश्वरनाथ धाम का मिथिला की पंजी व्यवस्था से क्या संबंध है?
मंदिर से जुड़ी कथा और महामहोपाध्याय परमेश्वर झा की पुस्तक 'मिथिला तत्त्व विमर्श' के हवाले से बताया जाता है कि मैथिल ब्राह्मणों की वंशावली (पंजी) व्यवस्था को सुदृढ़ करने से जुड़ा एक प्रसंग इसी स्थान पर घटा था। इसे राजा हरिसिंहदेव के काल से जोड़ा जाता है।
क्या यहाँ खुदाई में मूर्तियाँ मिली हैं?
हाँ, मंदिर की जानकारी के अनुसार यहाँ मिट्टी में भगवान गणेश और माता पार्वती की सुंदर प्रतिमा मिली थी। पार्वती की प्रतिमा अब परिसर के पार्वती मंदिर में स्थापित है।
मुक्तेश्वरनाथ धाम में कौन-से पर्व मनाए जाते हैं?
यहाँ महाशिवरात्रि, सावन का श्रावणी मेला व रुद्राभिषेक, माघ की नरक निवारण चतुर्दशी, नवरात्र, बैसाखी और सोमवती अमावस्या प्रमुख रूप से मनाए जाते हैं।

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