मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

बाबा गरीबनाथ धाम, मुजफ्फरपुर

Baba Garibnath Dham, Muzaffarpur

Muzaffarpur, बिहार भगवान शिव (बाबा गरीबनाथ / गरीबेश्वर, मनोकामना लिंग) निःशुल्क प्रवेश

बाबा गरीबनाथ धाम बिहार के मुजफ्फरपुर शहर के बीच, पुरानी बाज़ार के पास स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ महादेव गरीबनाथ या गरीबेश्वर – यानी “गरीबों के नाथ” – नाम से पूजे जाते हैं। सावन में पहलेजा घाट से गंगाजल लेकर आने वाले लाखों कांवरियों के कारण इसे “बिहार का देवघर” कहा जाता है। भक्त यहाँ के शिवलिंग को मनोकामना लिंग मानते हैं। मंदिर की व्यवस्था बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अधीन है।

सात पीपल और शिवलिंग की कथा

धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा गरीबनाथ धाम का इतिहास लगभग तीन सौ वर्ष पुराना है। कहा जाता है कि पहले यहाँ घना जंगल था, जिसके बीच सात पीपल के पेड़ थे। जब इन पेड़ों को काटा जाने लगा, तो उनसे लाल रक्त जैसा द्रव निकलने लगा और वहीं एक विशाल शिवलिंग मिला। लोग बताते हैं कि बाबा ने उस भूमि के स्वामी को स्वप्न में दर्शन दिए, और तभी से यहाँ नियमित पूजा होने लगी।

पहलेजा घाट से कांवर यात्रा

श्रावण मास में कांवरिये सारण ज़िले के सोनपुर क्षेत्र में पहलेजा घाट से गंगाजल भरते हैं और लगभग 70 किमी पैदल चलकर बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक करते हैं। देवघर की तरह यहाँ भी डाक बम की परंपरा है – डाक बम बिना रुके जल लेकर लगभग 12 घंटे में यह यात्रा पूरी करते हैं। रास्ते भर सामाजिक संस्थाएँ कांवरियों के लिए सेवा शिविर लगाती हैं। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद से सावन में यहाँ आने वाले भक्तों की संख्या और बढ़ी है।

प्रमुख उत्सव

  • श्रावणी मेला: पूरे सावन, विशेषकर सोमवारी पर, जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें।
  • महाशिवरात्रि: बाबा का विशेष श्रृंगार और पूजा।
  • नाग पंचमी: विशेष पूजा-अर्चना।

कैसे पहुँचें

मंदिर मुजफ्फरपुर जंक्शन और इमलीचट्टी बस स्टैंड दोनों से ऑटो या ई-रिक्शा द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। पटना से मुजफ्फरपुर सड़क और रेल दोनों मार्गों से जुड़ा है। वैशाली के रास्ते आने वाले यात्री हाजीपुर के पातालेश्वरनाथ और रामचौरा मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 4:00–5:00 बजे से रात लगभग 9:00–10:00 बजे तक

सावन में, विशेषकर सोमवारी पर, जलाभिषेक के लिए भोर से देर रात तक लंबी कतारें लगती हैं; समय स्थानीय रूप से बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • बाबा गरीबनाथ – विशाल शिवलिंग, जिसे मनोकामना पूरी करने वाला माना जाता है।
  • सावन की कांवर यात्रा – पहलेजा घाट से गंगाजल लेकर लगभग 70 किमी की पैदल यात्रा।
  • डाक बम – बिना रुके जल लेकर पहुँचने वाले कांवरिये।
  • पुरानी बाज़ार क्षेत्र के बीच बसा भव्य शिखरयुक्त मंदिर।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: मुजफ्फरपुर जंक्शन (MFP) – वहाँ से ऑटो या ई-रिक्शा।
  • सड़क मार्ग: इमलीचट्टी सरकारी बस स्टैंड, मुजफ्फरपुर; पटना से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 75–80 किमी।
  • हवाई मार्ग: जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पटना, या दरभंगा हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गरीबनाथ मंदिर को 'बिहार का देवघर' क्यों कहते हैं?
जिस तरह सावन में कांवरिये देवघर के बाबा बैद्यनाथ पर गंगाजल चढ़ाते हैं, उसी तरह लाखों कांवरिये पहलेजा घाट से गंगाजल लेकर पैदल बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक करने आते हैं। इसी समानता और आस्था के कारण इसे 'बिहार का देवघर' कहा जाता है।
बाबा गरीबनाथ के शिवलिंग की कथा क्या है?
मान्यता है कि लगभग तीन सौ वर्ष पहले यहाँ घना जंगल था, जिसमें सात पीपल के पेड़ थे। पेड़ काटते समय उनसे लाल रक्त जैसा द्रव निकलने लगा और वहाँ एक विशाल शिवलिंग मिला। कहा जाता है कि बाबा ने भूस्वामी को स्वप्न में दर्शन दिए, तभी से यहाँ पूजा हो रही है।
पहलेजा घाट से गरीबनाथ धाम कितनी दूर है?
सारण ज़िले के सोनपुर क्षेत्र का पहलेजा घाट गरीबनाथ धाम से लगभग 70 किमी दूर है। सावन में कांवरिये यहीं से गंगाजल भरकर पैदल यात्रा करते हैं, और डाक बम यह दूरी बिना रुके लगभग 12 घंटे में पूरी करते हैं।
बाबा गरीबनाथ नाम का क्या अर्थ है?
गरीबनाथ या गरीबेश्वर का अर्थ है 'गरीबों के नाथ'। भक्त मानते हैं कि बाबा हर दीन-दुखी की पुकार सुनते हैं, इसलिए उन्हें मनोकामना लिंग भी कहा जाता है।
गरीबनाथ मंदिर में कौन-कौन से पर्व मनाए जाते हैं?
यहाँ का सबसे बड़ा आयोजन सावन का श्रावणी मेला है, जब कांवरियों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसके अलावा महाशिवरात्रि और नाग पंचमी भी धूमधाम से मनाई जाती हैं।

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook