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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

पटन देवी मंदिर, पटना

Patan Devi Temple, Patna

Patna, बिहार माँ पटनेश्वरी – महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती निःशुल्क प्रवेश

पटन देवी मंदिर बिहार की राजधानी पटना के पुराने हिस्से पटना सिटी में स्थित माँ पटनेश्वरी का प्राचीन देवी स्थान है। यहाँ दो अलग मंदिर हैं – बड़ी पटन देवी और छोटी पटन देवी। दोनों में देवी के तीन रूप – महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती – पूजे जाते हैं। माँ पटनेश्वरी को पटना की नगर रक्षिका माना जाता है, और प्रचलित मान्यता है कि नगर का नाम भी इन्हीं से जुड़ा है।

शक्तिपीठ को लेकर मत

कई परंपराएँ बड़ी पटन देवी को शक्तिपीठ मानती हैं। इस मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर सती की दाहिनी जाँघ यहाँ गिरी थी। कुछ स्रोत इस पीठ को मगध शक्तिपीठ कहते हैं, जहाँ देवी सर्वानंदकरी और भैरव व्योमकेश हैं। शक्तिपीठों की सूचियाँ अलग-अलग ग्रंथों में भिन्न हैं, इसलिए इसे सभी सूचियों में स्थान नहीं मिलता। भक्तों के लिए यह बिहार का प्रमुख शक्ति स्थल है।

बड़ी और छोटी पटन देवी

छोटी पटन देवी को इतिहासकार बुकानन ने नगर की प्रमुख अधिष्ठात्री देवी बताया था। यहाँ त्रिदेवी स्वर्णाभूषणों, छत्र और चँवर से सजी रहती हैं। मंदिर के पीछे पटनदेवी खंदा नाम का बड़ा गड्ढा है, जिसके बारे में मान्यता है कि तीनों विग्रह वहीं से निकालकर स्थापित किए गए। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि इस स्थल पर पहले मध्यकालीन मंदिर रहा होगा।

बड़ी पटन देवी में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के काले पत्थर के विग्रह हैं और साथ में भैरव की प्रतिमा है। परिसर में एक योनि कुंड है, जिसके बारे में मान्यता है कि उसमें डाली गई हवन सामग्री भूमि में समा जाती है। यहाँ वैदिक और तांत्रिक दोनों विधियों से पूजा होती है; तांत्रिक पूजा के समय पट कुछ देर बंद रहता है।

प्रमुख उत्सव

  • शारदीय और चैत्र नवरात्रि: दोनों मंदिरों में भारी भीड़; सप्तमी की रात महानिशा पूजा, अष्टमी-नवमी को हवन और कुमारी पूजन।
  • विजयादशमी: अपराजिता पूजा और मेला।
  • मंगलवार: देवी दर्शन के लिए विशेष दिन माना जाता है।

आसपास के दर्शन

पटना सिटी में ही तख्त श्री हरिमंदिर साहिब (पटना साहिब) है, और पास के गुलज़ारबाग क्षेत्र में अगमकुआँ तथा शीतला माता मंदिर हैं। शहर के दूसरे छोर पर पटना जंक्शन के पास महावीर मंदिर के दर्शन भी किए जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन (बड़ी पटन देवी): सुबह लगभग 6:00 से रात लगभग 10:00 बजे तक
  • आरती: सुबह और संध्या

नवरात्रि की सप्तमी को मध्यरात्रि के बाद महानिशा पूजा होती है।

मुख्य आकर्षण

  • बड़ी पटन देवी – काले पत्थर के महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती विग्रह और भैरव।
  • छोटी पटन देवी – स्वर्णाभूषणों, छत्र और चँवर से सुसज्जित त्रिदेवी।
  • पटनदेवी खंदा – छोटी पटन देवी के पीछे का गड्ढा, जहाँ से विग्रह निकले माने जाते हैं।
  • योनि कुंड – बड़ी पटन देवी परिसर में।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: गुलज़ारबाग स्टेशन निकट है; पटना जंक्शन लगभग 10 किमी।
  • सड़क मार्ग: पटना शहर से ऑटो, टैक्सी और ई-रिक्शा।
  • हवाई मार्ग: जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पटना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पटन देवी शक्तिपीठ है?
कई परंपराएँ बड़ी पटन देवी को शक्तिपीठ मानती हैं और कहती हैं कि यहाँ सती की दाहिनी जाँघ गिरी थी। शक्तिपीठों की सूचियाँ अलग-अलग ग्रंथों में भिन्न हैं, इसलिए यह मान्यता सर्वमान्य नहीं है।
बड़ी पटन देवी और छोटी पटन देवी में क्या अंतर है?
दोनों पटना सिटी में अलग-अलग मंदिर हैं और दोनों में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती पूजी जाती हैं। छोटी पटन देवी को नगर रक्षिका माना जाता है, जबकि बड़ी पटन देवी को शक्तिपीठ की मान्यता से जोड़ा जाता है।
क्या पटना का नाम पटन देवी से पड़ा?
प्रचलित मान्यता है कि पटना नाम पटनेश्वरी देवी से जुड़ा है। हालाँकि कुछ इतिहासकार इस व्युत्पत्ति पर संदेह भी जताते हैं।
पटन देवी में नवरात्रि में क्या विशेष होता है?
नवरात्रि में दोनों मंदिरों में भारी भीड़ रहती है। सप्तमी की रात महानिशा पूजा होती है, अष्टमी-नवमी को विशेष पूजा, हवन और कुमारी पूजन होता है, और विजयादशमी पर मेला लगता है।
पटना जंक्शन से पटन देवी मंदिर कितनी दूर है?
बड़ी पटन देवी मंदिर पटना जंक्शन से लगभग 10 किमी दूर पटना सिटी में है। ऑटो या टैक्सी से पहुँचा जा सकता है; गुलज़ारबाग स्टेशन अधिक निकट है।

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