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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

महादेव मंदिर, देवबलौदा (भिलाई-चरोदा)

Mahadev Temple, Deobaloda

Bhilai, छत्तीसगढ़ भगवान शिव (शिवलिंग) निःशुल्क प्रवेश

महादेव मंदिर, देवबलौदा छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भिलाई-चरोदा क्षेत्र के देवबलौदा गाँव में स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। कलचुरी काल में लगभग 13वीं शताब्दी में बना यह मंदिर बलुआ पत्थर की सुंदर नक्काशी के लिए जाना जाता है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है और आज भी यहाँ नियमित पूजा होती है।

मंदिर और शिवलिंग

नागर शैली का यह मंदिर पूर्वमुखी है। इसमें गर्भगृह और स्तंभों वाला नवरंग मंडप है। गर्भगृह में लगभग डेढ़ फुट ऊँचा शिवलिंग स्थापित है और मंदिर के सामने नंदी विराजमान हैं। मंदिर का शिखर आज मौजूद नहीं है, इसलिए दूर से यह सपाट छत वाला दिखता है।

मंडप के स्तंभों और बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं, पौराणिक प्रसंगों, शिकार के दृश्यों और पशुओं की बारीक आकृतियाँ उकेरी गई हैं, जो कलचुरी शिल्पकला का अच्छा उदाहरण हैं।

कुंड और लोककथाएँ

मंदिर परिसर में एक पवित्र कुंड है, जिसमें 23 सीढ़ियाँ हैं और पास में दो कुएँ हैं – मान्यता है कि इनमें से एक कभी नहीं सूखता। लोककथा के अनुसार मंदिर छह महीने में बना था, इसलिए इसे “छमासी मंदिर” भी कहते हैं। एक अन्य कथा मंदिर बनाने वाले मूर्तिकार और उसकी बहन के कुंड में कूद जाने की है। स्थानीय लोगों का यह भी मानना है कि कुंड से आरंग तक एक गुप्त सुरंग जाती है। पास ही कसरा तालाब है, जिसका नाम वहाँ मिले कलश के आकार के पत्थर से पड़ा बताया जाता है।

प्रमुख उत्सव

  • महाशिवरात्रि: आसपास के गाँवों से भारी भीड़ और मंदिर के पास छोटा मेला।
  • सावन मास: सोमवार को जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु आते हैं।

यात्रा सुझाव

देवबलौदा रायपुर और भिलाई के बीच है – देवबलौदा चरोदा रेलवे स्टेशन मंदिर के पास ही है। रायपुर या भिलाई में ठहरकर कुछ घंटों में आराम से दर्शन किए जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से संध्या लगभग 7:00 बजे तक

महाशिवरात्रि और सावन के सोमवार को सुबह से भारी भीड़ रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • शिवलिंग – गर्भगृह में लगभग डेढ़ फुट ऊँचा।
  • नवरंग मंडप – स्तंभों और दीवारों पर देवताओं, पौराणिक प्रसंगों, शिकार और पशुओं की नक्काशी।
  • नंदी – मंदिर के सामने।
  • पवित्र कुंड – 23 सीढ़ियाँ और पास में दो कुएँ।
  • कसरा तालाब – मंदिर के पास।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: देवबलौदा चरोदा रेलवे स्टेशन मंदिर के पास है।
  • सड़क मार्ग: रायपुर से लगभग 20 किमी, भिलाई से लगभग 15 किमी।
  • हवाई मार्ग: स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

देवबलौदा का महादेव मंदिर कितना पुराना है?
यह मंदिर कलचुरी काल का माना जाता है और इसका निर्माण लगभग 13वीं शताब्दी ई. में पूरा हुआ माना जाता है।
इस मंदिर को छमासी मंदिर क्यों कहते हैं?
लोकमान्यता है कि यह मंदिर छह महीने में बनकर तैयार हुआ था, इसलिए इसे छमासी मंदिर भी कहा जाता है।
देवबलौदा मंदिर का शिखर क्यों नहीं है?
मंदिर का शिखर आज मौजूद नहीं है। कुछ लोग इसे मंदिर बनाने वाले मूर्तिकार की कथा से जोड़ते हैं, जो कुंड में कूद गया था, पर इसका कोई निश्चित ऐतिहासिक कारण ज्ञात नहीं है।
देवबलौदा मंदिर में कौन सा मेला लगता है?
महाशिवरात्रि पर यहाँ आसपास के गाँवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और एक छोटा मेला भी लगता है।
देवबलौदा कैसे पहुँचें?
देवबलौदा भिलाई-चरोदा क्षेत्र में है, रायपुर से लगभग 20 किमी और भिलाई से लगभग 15 किमी। देवबलौदा चरोदा रेलवे स्टेशन मंदिर के पास ही है।

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