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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

झंडेवालान माता मंदिर, दिल्ली

Jhandewalan Mata Temple, Delhi

मध्य दिल्ली, दिल्ली झंडेवाली माता (वैष्णो देवी स्वरूप, स्थानीय रूप से शेरांवाली) निःशुल्क प्रवेश

झंडेवालान माता मंदिर दिल्ली में करोल बाग के रास्ते पर, देशबंधु गुप्ता रोड और पंचकुइयाँ रोड के चौराहे के पास एक छोटी पहाड़ी पर स्थित झंडेवाली माता का प्रसिद्ध मंदिर है। देवी को माँ वैष्णो देवी का स्वरूप माना जाता है और स्थानीय लोग उन्हें शेरांवाली भी कहते हैं। नवरात्रि में यह दिल्ली के सबसे अधिक भीड़ वाले देवी मंदिरों में से एक होता है।

बद्री भगत की कथा

मान्यता के अनुसार चाँदनी चौक के वस्त्र व्यापारी और माँ वैष्णो देवी के भक्त बद्री भगत (श्री बद्री दास) इस पहाड़ी पर एक झरने के पास ध्यान किया करते थे। देवी की प्रेरणा से उन्होंने यहाँ खुदाई करवाई, जिसमें एक प्राचीन विग्रह मिला। खुदाई में विग्रह के हाथ खंडित हो गए, इसलिए उन्होंने उसे मूल स्थान पर ही रहने दिया और उसके ठीक ऊपर विधि-विधान से नया विग्रह स्थापित किया। फिर पहाड़ी पर एक बड़ा झंडा फहराया गया – इसी से यह स्थान “झंडे वाली माता” का कहलाया। स्रोत इसकी स्थापना 19वीं शताब्दी में बताते हैं, हालाँकि समय को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं।

मंदिर और विग्रह

ऊपरी मंदिर अष्टकोणीय है, जिसमें श्वेत संगमरमर का झंडेवाली माता का विग्रह है; सामने दालान और चारों ओर परिक्रमा पथ है। नीचे गुफा में मूल प्राचीन विग्रह गुफा वाली माता के रूप में पूजा जाता है, जिस पर चाँदी के हाथ लगाए गए हैं। परिसर में हनुमान मंदिर, शिव और काली के उप-मंदिर, उद्यान, धर्मशालाएँ और ठंडे पानी के लिए प्रसिद्ध एक पुराना कुआँ भी है।

बद्री भगत के बाद उनके पुत्र रामजी दास और पौत्र श्याम सुंदर ने मंदिर की देखरेख की। 1944 में श्याम सुंदर ने बद्री भगत झंडेवालान मंदिर सोसाइटी बनाई, जो आज मंदिर का संचालन करती है। मंदिर का लंगर प्रसिद्ध है – 2020 के लॉकडाउन में यहाँ से 50 दिनों में 18 लाख से अधिक भोजन बाँटे गए।

पूजा और उत्सव

  • नित्य पूजा: दिन में पाँच आरतियाँ; हर शुक्ल पक्ष की अष्टमी को जागरण।
  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि: सबसे बड़ा उत्सव – ज्योति कलश, कन्या पूजन और देवी माहात्म्य का पाठ।
  • दुर्गा अष्टमी, दुर्गा पूजा और दीपावली पर विशेष पूजा।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 10:00 बजे तक (दोपहर में कुछ समय पट बंद)
  • आरती: दिन में पाँच बार; समय गर्मी और सर्दी में बदलता है।

नवरात्रि में समय बढ़ जाता है। हर शुक्ल पक्ष की अष्टमी को जागरण होता है।

मुख्य आकर्षण

  • झंडेवाली माता – ऊपरी मंदिर में श्वेत संगमरमर का विग्रह।
  • गुफा वाली माता – खुदाई में मिला प्राचीन विग्रह, चाँदी के हाथों के साथ।
  • हनुमान मंदिर और शिव व काली के उप-मंदिर।
  • लंगर – निःशुल्क भोजन सेवा।

कैसे पहुँचें

  • मेट्रो: झंडेवालान मेट्रो स्टेशन (ब्लू लाइन), पैदल दूरी पर।
  • सड़क मार्ग: देशबंधु गुप्ता रोड और पंचकुइयाँ रोड के चौराहे के पास, करोल बाग के रास्ते में।
  • रेल मार्ग: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (लगभग 3 किमी)।
  • हवाई मार्ग: इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

झंडेवालान मंदिर का नाम कैसे पड़ा?
कथा के अनुसार बद्री भगत ने खुदाई में मिले प्राचीन विग्रह के स्थान पर मंदिर बनाकर पहाड़ी पर एक बड़ा झंडा फहराया। तभी से यह 'झंडे वाली माता' का स्थान कहलाया।
झंडेवालान मंदिर की स्थापना किसने की?
मंदिर की स्थापना चाँदनी चौक के वस्त्र व्यापारी और माँ वैष्णो देवी के भक्त बद्री भगत (श्री बद्री दास) ने की थी। 1944 में उनके पौत्र श्याम सुंदर ने बद्री भगत झंडेवालान मंदिर सोसाइटी बनाई।
गुफा वाली माता कौन हैं?
खुदाई के समय मिले प्राचीन विग्रह के हाथ खंडित हो गए थे, इसलिए उसे मूल स्थान पर ही रहने दिया गया और उस पर चाँदी के हाथ लगाए गए। नीचे गुफा में पूजित इसी विग्रह को गुफा वाली माता कहा जाता है।
झंडेवालान मंदिर का निकटतम मेट्रो स्टेशन कौन सा है?
निकटतम स्टेशन ब्लू लाइन का झंडेवालान मेट्रो स्टेशन है, जहाँ से मंदिर पैदल पहुँचा जा सकता है।
झंडेवालान मंदिर में नवरात्रि कैसे मनाई जाती है?
नवरात्रि यहाँ का सबसे बड़ा उत्सव है – ज्योति कलश, कन्या पूजन और देवी माहात्म्य के पाठ होते हैं और भारी भीड़ उमड़ती है। दुर्गा अष्टमी और दीपावली पर भी विशेष पूजा होती है।

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