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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

चित्तरंजन पार्क काली मंदिर, दिल्ली

Chittaranjan Park Kali Mandir, Delhi

दक्षिण-पूर्व दिल्ली, दिल्ली माँ काली (साथ में भगवान शिव और राधा-कृष्ण) निःशुल्क प्रवेश

चित्तरंजन पार्क काली मंदिर दक्षिण-पूर्व दिल्ली के चित्तरंजन पार्क (सी.आर. पार्क) में स्थित माँ काली का मंदिर और दिल्ली के बंगाली समाज का प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र है। बंगाल की टेराकोटा शैली में बना यह मंदिर अपनी पारंपरिक दुर्गा पूजा के लिए पूरी दिल्ली में प्रसिद्ध है।

मंदिर का इतिहास

चित्तरंजन पार्क 1960 के दशक में पूर्वी पाकिस्तान से आए विस्थापित बंगाली परिवारों के लिए बसाई गई कॉलोनी है। मार्च 1973 में यहाँ के निवासियों ने मिलकर चित्तरंजन पार्क काली मंदिर सोसाइटी बनाई और उसी वर्ष कॉलोनी के किनारे एक छोटी पहाड़ी पर एक छोटा शिव मंदिर स्थापित किया, जो आज भी परिसर में है। फरवरी 1984 में माँ काली का मुख्य मंदिर बना और साथ में शिव तथा राधा-कृष्ण के मंदिर जोड़े गए।

मंदिर और विग्रह

परिसर में तीन प्रमुख मंदिर हैं – माँ काली, भगवान शिव और राधा-कृष्ण। काली मंदिर बंगाल की पारंपरिक टेराकोटा मंदिर शैली में बना है, और लगभग 2006 से 2009 के बीच इस पर टेराकोटा की सुंदर नक्काशी जोड़ी गई। सोसाइटी मंदिर के साथ पुस्तकालय और धर्मार्थ होम्योपैथी व प्राकृतिक चिकित्सा औषधालय भी चलाती है।

प्रमुख उत्सव

  • दुर्गा पूजा: पाँच दिन का सबसे बड़ा उत्सव, जो अधिकतर स्रोतों के अनुसार 1977 से हो रहा है – बंगाली परंपरा की प्रतिमा, आरती, भोग और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  • काली पूजा (दीपावली की अमावस्या) पर विशेष रात्रि पूजा।
  • लक्ष्मी पूजा, सरस्वती पूजा और गणेश चतुर्थी।

यात्रा सुझाव

दुर्गा पूजा के दिनों में पूरे सी.आर. पार्क में अनेक पंडाल लगते हैं और शाम को भारी भीड़ होती है, इसलिए सार्वजनिक परिवहन से जाना बेहतर है। पास में ही कालकाजी मंदिर और इस्कॉन मंदिर के दर्शन भी किए जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर लगभग 12:00 बजे और संध्या लगभग 4:00 से रात लगभग 9:00 बजे तक
  • आरती: सुबह और संध्या को

दुर्गा पूजा और काली पूजा के दिनों में समय और व्यवस्था बदल जाती है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ काली का मंदिर – बंगाल की टेराकोटा शैली में।
  • शिव मंदिर – 1973 का सबसे पुराना मंदिर, छोटी पहाड़ी पर।
  • राधा-कृष्ण मंदिर।
  • दुर्गा पूजा – सी.आर. पार्क की सबसे पुरानी और पारंपरिक पूजाओं में से एक।

कैसे पहुँचें

  • मेट्रो: नेहरू एन्क्लेव (मैजेंटा लाइन) और नेहरू प्लेस (वायलेट लाइन) निकट के स्टेशन हैं; वहाँ से ऑटो या ई-रिक्शा।
  • सड़क मार्ग: दक्षिण-पूर्व दिल्ली के चित्तरंजन पार्क में; बस, ऑटो और टैक्सी से आसानी से।
  • रेल मार्ग: हज़रत निज़ामुद्दीन और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन।
  • हवाई मार्ग: इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सी.आर. पार्क काली मंदिर कब बना?
1973 में स्थानीय निवासियों ने काली मंदिर सोसाइटी बनाई और एक छोटी पहाड़ी पर शिव मंदिर स्थापित किया। माँ काली का मुख्य मंदिर फरवरी 1984 में बना, जिसके साथ शिव और राधा-कृष्ण मंदिर भी जोड़े गए।
चित्तरंजन पार्क काली मंदिर किस शैली में बना है?
मंदिर बंगाल की टेराकोटा मंदिर शैली में बना है। लगभग 2006 से 2009 के बीच इस पर टेराकोटा की सुंदर नक्काशी जोड़ी गई।
काली मंदिर में दुर्गा पूजा कब से हो रही है?
अधिकतर स्रोतों के अनुसार यहाँ दुर्गा पूजा 1977 से हो रही है। पाँच दिन की यह पूजा सी.आर. पार्क की सबसे पुरानी और पारंपरिक पूजाओं में गिनी जाती है।
काली मंदिर में और कौन से उत्सव मनाए जाते हैं?
दुर्गा पूजा के अलावा काली पूजा, लक्ष्मी पूजा, सरस्वती पूजा और गणेश चतुर्थी यहाँ धूमधाम से मनाई जाती हैं।
चित्तरंजन पार्क को 'मिनी बंगाल' क्यों कहते हैं?
चित्तरंजन पार्क 1960 के दशक में पूर्वी पाकिस्तान से आए विस्थापित बंगाली परिवारों के लिए बसाई गई कॉलोनी है। काली मंदिर यहाँ के बंगाली समाज का धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है।

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