मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

छतरपुर मंदिर (श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ), दिल्ली

Chhatarpur Temple (Shri Aadya Katyayani Shaktipeeth), Delhi

दक्षिण दिल्ली, दिल्ली माँ कात्यायनी (नवदुर्गा का छठा स्वरूप) निःशुल्क प्रवेश

छतरपुर मंदिर, जिसका पूरा नाम श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर है, दक्षिण दिल्ली के छतरपुर क्षेत्र में स्थित माँ कात्यायनी का विशाल मंदिर परिसर है। माँ कात्यायनी नवदुर्गा का छठा स्वरूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के छठे दिन होती है। 20 से अधिक छोटे-बड़े मंदिरों वाले इस परिसर को अक्षरधाम के बाद दिल्ली का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर परिसर कहा जाता है।

बाबा संत नागपाल जी और स्थापना

मंदिर की स्थापना 1974 में बाबा संत नागपाल जी ने की थी, जो माँ कात्यायनी के अनन्य उपासक थे। दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी छोर पर स्थित इस स्थान पर धीरे-धीरे एक के बाद एक मंदिर बनते गए। 1998 में बाबा जी के देहांत के बाद परिसर के शिव-गौरी नागेश्वर मंदिर में उनकी समाधि बनाई गई, जहाँ भक्त श्रद्धा से माथा टेकते हैं।

मंदिर और विग्रह

मुख्य मंदिर गोपुरम युक्त है और इसकी बनावट पर दक्षिण भारतीय शैली का प्रभाव दिखता है। गर्भगृह में माँ कात्यायनी विराजती हैं। इसके साथ एक विशेष कक्ष है जो केवल नवरात्रि में खुलता है। मंदिर में देवी का शयन कक्ष और बैठक भी है, जिनमें चाँदी का फर्नीचर रखा है। प्रवचन और भजन के लिए एक सत्संग भवन भी है।

परिसर तीन भागों में फैला है। इनमें राधा-कृष्ण और गणेश मंदिर (ऊपर एक और दुर्गा मंदिर), नंदी सहित शिव मंदिर और लक्ष्मी विनायक मंदिर प्रमुख हैं। प्रवेश के पास एक पुराना वृक्ष है, जिस पर भक्त मन्नत के धागे बाँधते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि: सबसे बड़ा उत्सव – विशेष श्रृंगार, सजावट और दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़।
  • नवरात्रि की षष्ठी माँ कात्यायनी का दिन होने से विशेष महत्व रखती है।
  • महाशिवरात्रि पर परिसर के शिव मंदिरों में विशेष पूजा।

यात्रा सुझाव

येलो लाइन का छतरपुर मेट्रो स्टेशन लगभग 1 किमी दूर है। नवरात्रि में भारी भीड़ के कारण सुबह जल्दी जाना अच्छा रहता है। परिसर बड़ा है, इसलिए सभी मंदिरों के दर्शन के लिए पर्याप्त समय रखें।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से रात लगभग 10:00 बजे तक

नवरात्रि में समय बढ़ाया जाता है और लंबी कतारें लगती हैं; सुबह जल्दी पहुँचना बेहतर है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ कात्यायनी का मुख्य मंदिर – साथ में एक कक्ष जो केवल नवरात्रि में खुलता है।
  • शयन कक्ष – चाँदी के फर्नीचर से सजा।
  • शिव-गौरी नागेश्वर मंदिर – बाबा नागपाल जी की समाधि।
  • लक्ष्मी विनायक मंदिर, राधा-कृष्ण और गणेश मंदिर।
  • प्रवेश के पास पुराना वृक्ष, जिस पर भक्त मन्नत के धागे बाँधते हैं।

कैसे पहुँचें

  • मेट्रो: छतरपुर मेट्रो स्टेशन (येलो लाइन), लगभग 1 किमी – पैदल या ई-रिक्शा से।
  • सड़क मार्ग: महरौली–गुड़गाँव रोड के पास; दिल्ली के हर भाग से बस, ऑटो और टैक्सी।
  • रेल मार्ग: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन।
  • हवाई मार्ग: इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

छतरपुर मंदिर किस देवी को समर्पित है?
छतरपुर मंदिर माँ कात्यायनी को समर्पित है, जो नवदुर्गा का छठा स्वरूप हैं। इसका पूरा नाम श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर है।
छतरपुर मंदिर की स्थापना किसने की?
मंदिर की स्थापना 1974 में बाबा संत नागपाल जी ने की थी। 1998 में उनके देहांत के बाद परिसर के शिव-गौरी नागेश्वर मंदिर में उनकी समाधि बनाई गई।
छतरपुर मंदिर का निकटतम मेट्रो स्टेशन कौन सा है?
निकटतम मेट्रो स्टेशन येलो लाइन का छतरपुर स्टेशन है, जो मंदिर से लगभग 1 किमी दूर है। वहाँ से पैदल या ई-रिक्शा से पहुँचा जा सकता है।
छतरपुर मंदिर में सबसे अधिक भीड़ कब होती है?
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहाँ सबसे अधिक भीड़ होती है। इन दिनों मुख्य मंदिर के साथ वह विशेष कक्ष भी खुलता है जो साल भर बंद रहता है।
छतरपुर मंदिर परिसर कितना बड़ा है?
परिसर में तीन भागों में बँटे 20 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर हैं। अक्षरधाम के बाद इसे दिल्ली का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर परिसर कहा जाता है।

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook