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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

कालकाजी मंदिर, दिल्ली

Kalkaji Mandir, Delhi

दक्षिण-पूर्व दिल्ली, दिल्ली माँ कालका (काली) निःशुल्क प्रवेश

कालकाजी मंदिर दक्षिण दिल्ली के कालकाजी क्षेत्र में नेहरू प्लेस के सामने स्थित माँ कालका (काली) का प्राचीन और अत्यंत लोकप्रिय मंदिर है। स्थानीय परंपरा इसकी कथा को सतयुग से जोड़ती है, जबकि वर्तमान मूल ढाँचा 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध का है। नवरात्रि में यह दिल्ली के सबसे अधिक भीड़ वाले देवी मंदिरों में से एक होता है।

मंदिर की कथा

स्थानीय मान्यता के अनुसार सतयुग में असुरों से पीड़ित देवता ब्रह्मा जी के पास गए, जिन्होंने उन्हें माँ पार्वती की शरण में भेजा। पार्वती से कौशिकी देवी प्रकट हुईं और कौशिकी की भौंहों से माँ काली। रक्तबीज असुर के रक्त की हर बूँद से नया असुर जन्म लेता था, इसलिए माँ काली ने उसका रक्त धरती पर गिरने से पहले ही पी लिया और उसका वध किया। 1912 के एक गज़ेटियर में यह कथा भी दर्ज है कि कालिका देवी का प्राकट्य इसी स्थान पर हुआ था।

इतिहास

मंदिर का केंद्रीय ढाँचा 1764 से पहले का नहीं माना जाता। लगभग 1783 में दुर्गा सिंह नामक भक्त ने देवी के चारों ओर लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर की रेलिंग लगवाई, जिस पर फ़ारसी और हिंदी में देवी व उनके नाम के अभिलेख हैं। 1816 में पुजारी शिखर बनवाना चाहते थे; धनी भक्तों के नामों की पर्ची निकाली गई और नाम निकला अकबर द्वितीय के पेशकार मिर्ज़ा राजा केदारनाथ का। उन्होंने बारह बाहरी कक्ष, पिरामिड आकार का शिखर, लाल पत्थर के दो सिंह, एक घंटा और विशाल त्रिशूल बनवाया। अगले लगभग 50 वर्षों में स्थानीय व्यापारियों ने और कक्ष जोड़े।

मंदिर और विग्रह

मंदिर के केंद्र में लगभग 24 फुट चौड़ा बारह-कोणीय गर्भगृह है, जिसका फ़र्श संगमरमर का है। इसके चारों ओर 36 मेहराबदार द्वारों वाला बरामदा है। पूर्वी द्वार के सामने लाल पत्थर के चबूतरे पर काली प्रतिमा और त्रिशूल है। आँगन में हवनशाला, पवित्र नीम का पेड़, तुलसी, और शिव, हनुमान, गणेश, लक्ष्मी-नारायण, भैरव तथा सीता-राम के मंदिर हैं। शैली को मराठा-मुगल प्रभाव वाला माना जाता है।

उत्सव और यात्रा सुझाव

चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहाँ विशेष श्रृंगार होता है और दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं। निकटतम कालकाजी मंदिर मेट्रो स्टेशन वायलेट और मैजेंटा लाइन का इंटरचेंज है। पास ही इस्कॉन मंदिर (ईस्ट ऑफ कैलाश) और चित्तरंजन पार्क का काली मंदिर भी है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 4:00 से रात लगभग 11:30 बजे तक (दोपहर और संध्या आरती से पहले कुछ समय पट बंद)
  • आरती: सुबह और संध्या को

नवरात्रि में लंबी कतारें लगती हैं; समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ कालका – बारह-कोणीय गर्भगृह में।
  • लाल बलुआ पत्थर के दो सिंह और विशाल त्रिशूल।
  • पूर्वी द्वार के सामने काली प्रतिमा और त्रिशूल वाला चबूतरा।
  • आँगन में हवनशाला, नीम और तुलसी, तथा शिव, हनुमान, गणेश, लक्ष्मी-नारायण, भैरव और सीता-राम के मंदिर।

कैसे पहुँचें

  • मेट्रो: कालकाजी मंदिर मेट्रो स्टेशन (वायलेट और मैजेंटा लाइन), पैदल दूरी पर।
  • सड़क मार्ग: नेहरू प्लेस के सामने; बस, ऑटो और टैक्सी से।
  • रेल मार्ग: ओखला और हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन।
  • हवाई मार्ग: इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कालकाजी मंदिर में किस देवी की पूजा होती है?
यहाँ माँ काली के स्वरूप माँ कालका की पूजा होती है। मंदिर दक्षिण दिल्ली में नेहरू प्लेस के सामने स्थित है।
कालकाजी मंदिर की कथा क्या है?
स्थानीय मान्यता के अनुसार असुरों से पीड़ित देवता ब्रह्मा जी के कहने पर माँ पार्वती के पास गए। पार्वती से कौशिकी देवी प्रकट हुईं और कौशिकी की भौंहों से माँ काली, जिन्होंने रक्तबीज का रक्त धरती पर गिरने से पहले ही पी लिया।
कालकाजी मंदिर कितना पुराना है?
मंदिर की परंपरा बहुत प्राचीन मानी जाती है, पर वर्तमान मूल ढाँचा 1764 के बाद का है। 1816 में अकबर द्वितीय के पेशकार मिर्ज़ा राजा केदारनाथ ने बारह बाहरी कक्ष, शिखर, सिंह, घंटा और त्रिशूल बनवाए।
कालकाजी मंदिर का निकटतम मेट्रो स्टेशन कौन सा है?
निकटतम स्टेशन कालकाजी मंदिर मेट्रो स्टेशन है, जो वायलेट और मैजेंटा लाइन का इंटरचेंज है। यहाँ से मंदिर पैदल दूरी पर है।
कालकाजी मंदिर में सबसे अधिक भीड़ कब होती है?
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहाँ सबसे अधिक भीड़ होती है और दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं। सामान्य दिनों में सुबह का समय अपेक्षाकृत शांत रहता है।

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