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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

उत्तर स्वामीमलै मंदिर (मलै मंदिर), आर.के. पुरम, दिल्ली

Uttara Swami Malai Temple (Malai Mandir), R. K. Puram, Delhi

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली, दिल्ली श्री स्वामीनाथ स्वामी (भगवान मुरुगन / कार्तिकेय) निःशुल्क प्रवेश

उत्तर स्वामीमलै मंदिर, जिसे लोग प्यार से मलै मंदिर (तमिल में “पहाड़ी का मंदिर”) कहते हैं, नई दिल्ली के आर.के. पुरम सेक्टर 7 में पालम मार्ग पर एक छोटी पहाड़ी पर बना भगवान स्वामीनाथ स्वामी (मुरुगन) का मंदिर है। मुरुगन के मंदिर पहाड़ियों पर बनाने की तमिल परंपरा यहाँ भी निभाई गई है। दिल्ली के तमिल और दक्षिण भारतीय समाज के लिए यह प्रमुख आस्था-केंद्र है, और हर पृष्ठभूमि के भक्त यहाँ आते हैं।

मंदिर का इतिहास

मंदिर की आधारशिला 8 सितंबर 1965 को तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. भक्तवत्सलम ने रखी थी; समारोह की अध्यक्षता प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने की थी। मुख्य स्वामीनाथ स्वामी मंदिर की प्रतिष्ठा 7 जून 1973 को हुई। 1990 में कर्पग विनायक, सुंदरेश्वर और मीनाक्षी के मंदिर प्रतिष्ठित हुए, 1995 में नवग्रह और इडुंबन स्वामी के स्थान बने और 1997 में आदि शंकर सभागार का उद्घाटन हुआ। 2001 में कांची कामकोटि पीठ के श्री जयेंद्र सरस्वती स्वामीगल ने महाकुंभाभिषेक संपन्न कराया।

उत्तर स्वामीमलै नाम क्यों

तमिलनाडु में कुंभकोणम के पास स्वामीमलै मुरुगन के छह प्रमुख धामों (आरुपडै वीडु) में से एक है, जहाँ कथा के अनुसार बाल मुरुगन ने अपने पिता शिव को प्रणव (ॐ) का अर्थ समझाया और “स्वामीनाथ” कहलाए। दिल्ली के मंदिर में भी मूलवर स्वामीनाथ स्वामी स्वामीमलै की तरह खड़ी मुद्रा में हैं, इसलिए इसे उत्तर भारत का स्वामीमलै कहा गया।

मंदिर और विग्रह

मुख्य मंदिर पूरी तरह ग्रेनाइट से चोल कालीन द्रविड़ शैली में बना है, जबकि उप-मंदिर मदुरै के मीनाक्षी मंदिर जैसी पांड्य शैली में हैं। मुख्य मंदिर पर तमिल में “यामिरुक्क बयमेन” लिखा है – अर्थात “जब मैं हूँ तो डर कैसा”। परिसर में कर्पग विनायक (गणेश), सुंदरेश्वर (शिव) और देवी मीनाक्षी – यानी मुरुगन का पूरा परिवार – के साथ नवग्रह और इडुंबन स्वामी के स्थान हैं। मुरुगन के वाहन मोर यहाँ परिसर में घूमते दिखाई देते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • स्कंद षष्ठी: सूरसंहार की स्मृति में विशेष पूजा, साथ में शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम।
  • कुंभाभिषेक और यज्ञ जैसे बड़े अनुष्ठान समय-समय पर।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 7:00 से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम लगभग 5:00 से 9:00 बजे तक

स्कंद षष्ठी और विशेष पर्वों पर समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • श्री स्वामीनाथ स्वामी – स्वामीमलै की तरह खड़ी मुद्रा में मुरुगन।
  • कर्पग विनायक, सुंदरेश्वर और मीनाक्षी के उप-मंदिर।
  • नवग्रह मंदिर और इडुंबन स्वामी का स्थान।
  • मोर – मुरुगन का वाहन, परिसर में दिखते और सुनाई देते हैं।
  • पहाड़ी से वसंत विहार और आसपास का दृश्य।

कैसे पहुँचें

  • मेट्रो: वसंत विहार (मैजेंटा लाइन) – लगभग 2 किमी।
  • सड़क मार्ग: पालम मार्ग, आर.के. पुरम सेक्टर 7; बस, ऑटो और कैब उपलब्ध।
  • रेल मार्ग: नई दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन।
  • हवाई मार्ग: इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (पास ही)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मलै मंदिर का अर्थ क्या है?
तमिल में 'मलै' का अर्थ पहाड़ी है। यह मंदिर आर.के. पुरम की एक छोटी पहाड़ी पर बना है, इसलिए इसे मलै मंदिर कहा जाता है। मुरुगन के मंदिर पहाड़ियों पर बनाने की परंपरा रही है।
इसे उत्तर स्वामीमलै क्यों कहा जाता है?
यहाँ स्वामीनाथ स्वामी का विग्रह तमिलनाडु के कुंभकोणम के पास स्थित स्वामीमलै मंदिर की तरह खड़ी मुद्रा में है, इसलिए इसे उत्तर भारत का स्वामीमलै यानी उत्तर स्वामीमलै कहा जाता है।
मलै मंदिर कब बना?
मंदिर की आधारशिला 8 सितंबर 1965 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. भक्तवत्सलम ने रखी थी और मुख्य मंदिर की प्रतिष्ठा 7 जून 1973 को हुई।
मंदिर परिसर में और कौन से देवता हैं?
परिसर में कर्पग विनायक (गणेश), सुंदरेश्वर (शिव), देवी मीनाक्षी, नवग्रह और इडुंबन स्वामी के मंदिर हैं, साथ ही आदि शंकर सभागार भी है।
मलै मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव कौन सा है?
मुरुगन से जुड़ा स्कंद षष्ठी यहाँ का प्रमुख उत्सव है, जिसमें विशेष पूजा के साथ संगीत कार्यक्रम भी होते हैं।

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