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कार्तिक कृष्ण द्वादशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री देवीकूप भद्रकाली शक्तिपीठ, कुरुक्षेत्र

Shri Devikoop Bhadrakali Shaktipeeth, Kurukshetra

कुरुक्षेत्र, हरियाणा माँ भद्रकाली (सावित्री); भैरव – स्थाणु निःशुल्क प्रवेश

श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर हरियाणा के कुरुक्षेत्र नगर में झाँसा रोड पर स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार यहाँ सती का टखना (गुल्फ) गिरा था; स्थानीय परंपरा के अनुसार दायाँ टखना एक कूप (कुएँ) में गिरा, इसलिए यह स्थान देवीकूप कहलाता है। यहाँ की शक्ति सावित्री (भद्रकाली) और भैरव स्थाणु हैं – कुरुक्षेत्र का प्रसिद्ध स्थाणेश्वर महादेव मंदिर इन्हीं भैरव से जुड़ा माना जाता है।

पांडवों और घोड़ों की परंपरा

मान्यता है कि महाभारत युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने इसी मंदिर में माँ भद्रकाली की पूजा की और विजय का आशीर्वाद माँगा। युद्ध जीतने के बाद उन्होंने मन्नत पूरी होने पर देवी को अपने घोड़े अर्पित किए। इसी परंपरा में आज भी श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर माँ को मिट्टी, चाँदी या सोने के घोड़े चढ़ाते हैं – मंदिर में ऐसे हज़ारों छोटे घोड़े देखे जा सकते हैं। एक अन्य लोक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और बलराम का मुंडन संस्कार भी यहीं हुआ था।

देवीकूप और मंदिर की विशेषताएँ

मंदिर के भीतर वह पवित्र कूप है, जिसमें सती का टखना गिरा माना जाता है। कूप के ऊपर कमल के आकार की संगमरमर की संरचना पर देवी का चरण-चिह्न (टखने का प्रतीक) स्थापित है, जिसकी पूजा होती है। गर्भगृह में माँ भद्रकाली की प्रतिमा है। मंदिर परिसर साफ़-सुथरा और शांत है, और यहाँ नियमित भजन-कीर्तन होते हैं।

कुरुक्षेत्र – धर्मक्षेत्र

कुरुक्षेत्र को श्रीमद्भगवद्गीता में “धर्मक्षेत्र” कहा गया है – यहीं श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। 48 कोस की कुरुक्षेत्र भूमि में सैकड़ों तीर्थ हैं। भद्रकाली मंदिर के दर्शन के साथ ब्रह्म सरोवर, ज्योतिसर (गीता उपदेश स्थल), सन्निहित सरोवर और स्थाणेश्वर महादेव के दर्शन की परंपरा है।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि: मंदिर में विशाल मेला और जागरण।
  • अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव (मार्गशीर्ष / नवंबर-दिसंबर) के दौरान कुरुक्षेत्र में देशभर से श्रद्धालु आते हैं।
  • सूर्य ग्रहण पर ब्रह्म सरोवर और सन्निहित सरोवर में स्नान का विशेष महत्व है।

दर्शन का समय

  • गर्मी: सुबह लगभग 5:00 से दोपहर 12:00 बजे, शाम 4:00 से रात 9:00 बजे तक
  • सर्दी: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे, शाम 3:30 से रात 8:30 बजे तक
  • आरती: सुबह और शाम

नवरात्रि में मंदिर देर रात तक खुला रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • देवीकूप – कमलाकार संरचना पर देवी का चरण-चिह्न।
  • मन्नत के घोड़े – हज़ारों छोटे घोड़ों का संग्रह।
  • स्थाणेश्वर महादेव मंदिर – पास में, शक्तिपीठ के भैरव।
  • ब्रह्म सरोवर और ज्योतिसर (गीता उपदेश स्थल, लगभग 12 किमी)।
  • श्रीकृष्ण संग्रहालय और पैनोरमा, कुरुक्षेत्र।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: कुरुक्षेत्र जंक्शन (लगभग 3 किमी) – दिल्ली-अंबाला मार्ग पर, दिल्ली से सीधी ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: दिल्ली से NH-44 द्वारा लगभग 160 किमी; पिपली से लगभग 6 किमी।
  • हवाई मार्ग: चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 90 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि के अनुसार कुरुक्षेत्र में सती का टखना (गुल्फ) गिरा था। स्थानीय परंपरा के अनुसार यह एक कूप में गिरा, इसलिए मंदिर देवीकूप कहलाता है।
भद्रकाली मंदिर में घोड़े क्यों चढ़ाए जाते हैं?
मान्यता है कि महाभारत युद्ध जीतने के बाद पांडवों ने मन्नत पूरी होने पर यहाँ घोड़े अर्पित किए थे। उसी परंपरा में श्रद्धालु आज भी मिट्टी, चाँदी या सोने के घोड़े चढ़ाते हैं।
कुरुक्षेत्र भद्रकाली के भैरव कौन हैं?
यहाँ के भैरव स्थाणु हैं। कुरुक्षेत्र का स्थाणेश्वर महादेव मंदिर इन्हीं भैरव से जुड़ा माना जाता है।
कुरुक्षेत्र स्टेशन से भद्रकाली मंदिर कितनी दूर है?
कुरुक्षेत्र जंक्शन से भद्रकाली मंदिर लगभग 3 किमी दूर है। ऑटो और ई-रिक्शा आसानी से मिल जाते हैं।
कुरुक्षेत्र में और कौन से तीर्थ हैं?
ब्रह्म सरोवर, सन्निहित सरोवर, ज्योतिसर (गीता उपदेश स्थल) और स्थाणेश्वर महादेव कुरुक्षेत्र के प्रमुख तीर्थ हैं।

श्री देवीकूप भद्रकाली शक्तिपीठ, कुरुक्षेत्र इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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