मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री नैना देवी मंदिर, बिलासपुर हिमाचल प्रदेश

Shri Naina Devi Temple, Bilaspur Himachal Pradesh

बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश माँ नैना देवी (महिषमर्दिनी); भैरव – क्रोधीश निःशुल्क प्रवेश

श्री नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर ज़िले में शिवालिक पहाड़ियों की एक चोटी पर स्थित माँ नैना देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। मंदिर से नीचे गोबिंद सागर झील और पंजाब के मैदान दूर तक दिखाई देते हैं। मान्यता है कि यहाँ सती के नेत्र गिरे थे, इसलिए देवी को नैना देवी कहा जाता है। तंत्र चूड़ामणि की सूची में यह पीठ शर्कररे (करवीर) नाम से आती है, जिसकी शक्ति महिषमर्दिनी और भैरव क्रोधीश हैं – उसके स्थान को लेकर मतभेद है और एक मत इसे नैना देवी से जोड़ता है। हिमाचल की देवी यात्रा में नैना देवी, चिंतपूर्णी, ज्वाला जी, ब्रजेश्वरी (कांगड़ा) और चामुंडा के दर्शन एक साथ किए जाते हैं।

नैना ग्वाले की कथा

लोककथा के अनुसार नैना नाम का एक ग्वाला इस पहाड़ी पर गाएँ चराता था। उसने देखा कि उसकी एक सफ़ेद गाय एक पत्थर पर अपने आप दूध गिरा देती है। रात को देवी ने उसे स्वप्न में दर्शन देकर बताया कि वह पत्थर उनकी पिंडी है। नैना ने यह बात राजा को बताई और वहीं मंदिर बनवाया गया। परंपरा के अनुसार यह मंदिर बिलासपुर के राजा बीर चंद ने बनवाया था। ग्वाले के नाम पर ही देवी और पूरा स्थान नैना देवी कहलाया।

महिषापीठ और गर्भगृह

एक अन्य कथा के अनुसार इसी पहाड़ी पर देवी ने महिषासुर का वध किया था, इसलिए इसे महिषापीठ भी कहते हैं। गर्भगृह में माँ नैना देवी दो नेत्रों के रूप में पिंडी स्वरूप में विराजती हैं। बाईं ओर माँ काली और दाईं ओर भगवान गणेश की प्रतिमाएँ हैं। मंदिर के प्रांगण में एक प्राचीन पीपल का वृक्ष और हवन कुंड है। मंदिर के द्वार पर चाँदी का सुंदर काम है।

यात्रा – सीढ़ियाँ और उड़न खटोला

नैना देवी बस अड्डे से मंदिर तक बाज़ार से होकर सीढ़ियों का रास्ता है, जिसमें लगभग 20–30 मिनट लगते हैं। बुज़ुर्गों और बच्चों के लिए पहाड़ी के नीचे से उड़न खटोला (रोपवे) भी चलता है। मेले के दिनों में दर्शन की कतार कई घंटे लंबी हो जाती है, इसलिए सुबह जल्दी पहुँचना अच्छा रहता है। सिख तीर्थ आनंदपुर साहिब पास ही है, इसलिए बहुत से यात्री दोनों स्थानों के दर्शन साथ करते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • श्रावण अष्टमी मेला: सावन मास में लगने वाला सबसे बड़ा मेला।
  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि: नौ दिनों तक विशेष पूजा, जागरण और भारी भीड़।
  • श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर माँ को चुनरी, नारियल और छत्र चढ़ाते हैं।

दर्शन का समय

  • गर्मी: सुबह लगभग 4:00 से रात 10:00 बजे तक
  • सर्दी: सुबह लगभग 5:00 से रात 9:00 बजे तक
  • आरती: सुबह मंगला आरती और संध्या आरती

नवरात्रि और श्रावण अष्टमी के मेलों में मंदिर लगभग पूरी रात खुला रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ नैना देवी की पिंडियाँ – गर्भगृह में नेत्र-स्वरूप।
  • उड़न खटोला – पहाड़ी के नीचे से मंदिर तक रोपवे।
  • गोबिंद सागर झील का ऊपर से दृश्य।
  • हवन कुंड और पीपल का प्राचीन वृक्ष।
  • आनंदपुर साहिब गुरुद्वारा (लगभग 20 किमी)।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: आनंदपुर साहिब या किरतपुर साहिब रेलवे स्टेशन (लगभग 20–30 किमी)।
  • सड़क मार्ग: चंडीगढ़ से लगभग 100 किमी; आनंदपुर साहिब से बस और टैक्सी। पहाड़ी के नीचे से सीढ़ियाँ या रोपवे।
  • हवाई मार्ग: चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 110 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नैना देवी शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
मान्यता है कि यहाँ सती के नेत्र गिरे थे, इसीलिए देवी नैना देवी कहलाती हैं। तंत्र चूड़ामणि की सूची में यह पीठ शर्कररे (करवीर) नाम से है, जिसका स्थान कुछ विद्वान पाकिस्तान में मानते हैं; एक मत इसे नैना देवी से जोड़ता है।
नैना देवी मंदिर का नाम नैना क्यों पड़ा?
लोककथा के अनुसार नैना नाम के ग्वाले ने देखा कि उसकी गाय एक पत्थर पर अपने आप दूध गिराती है। देवी ने स्वप्न में उसे दर्शन दिए और वहीं मंदिर बना, इसलिए इसे नैना देवी कहा गया।
नैना देवी मंदिर तक रोपवे है क्या?
हाँ, पहाड़ी के नीचे से मंदिर तक उड़न खटोला (रोपवे) चलता है। पैदल सीढ़ियों से भी मंदिर तक पहुँचा जा सकता है।
चंडीगढ़ से नैना देवी कितनी दूर है?
चंडीगढ़ से नैना देवी लगभग 100 किमी दूर है। सड़क मार्ग से आनंदपुर साहिब होते हुए लगभग 3 घंटे लगते हैं।
नैना देवी में मेला कब लगता है?
चैत्र और शारदीय नवरात्रि तथा श्रावण मास की अष्टमी पर बड़े मेले लगते हैं, जिनमें पंजाब, हरियाणा और हिमाचल से लाखों श्रद्धालु आते हैं।

श्री नैना देवी मंदिर, बिलासपुर हिमाचल प्रदेश इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook