चामुंडेश्वरी मंदिर कर्नाटक के मैसूरु नगर से लगभग 13 किमी दूर चामुंडी पहाड़ी की चोटी पर स्थित माँ चामुंडेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर है। आदि शंकराचार्य से जुड़े अष्टादश महाशक्तिपीठ स्तोत्र में यह चौथा पीठ है – “क्रौंचपट्टणे चामुंडेश्वरी”। पुराणकाल में यह क्षेत्र क्रौंचपुरी कहलाता था, इसलिए इसे क्रौंच पीठ भी कहते हैं, और मान्यता है कि यहाँ सती के केश गिरे थे। माँ चामुंडेश्वरी मैसूरु के वाडियार राजवंश की कुलदेवी हैं।
महिषासुर वध की कथा
कथा के अनुसार असुरराज महिषासुर के अत्याचार से त्रस्त देवताओं की प्रार्थना पर देवी दुर्गा ने चामुंडेश्वरी रूप में इसी पहाड़ी पर उसका वध किया। महिषासुर के नाम से यह क्षेत्र “महिषूरु” कहलाया, जो आगे चलकर मैसूरु बना। इसी कारण देवी को महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है, और पहाड़ी की चोटी पर महिषासुर की एक बड़ी रंगीन प्रतिमा भी बनी है।
मंदिर, सीढ़ियाँ और नंदी
मूल मंदिर 12वीं शताब्दी के होयसल काल का माना जाता है, जबकि ऊँचा गोपुरम बाद के काल का है। मैसूरु के वाडियार राजाओं ने मंदिर का विस्तार किया। 17वीं शताब्दी में चोटी तक लगभग एक हज़ार सीढ़ियाँ बनवाई गईं, और राजा दोड्ड देवराज वाडियार ने सीढ़ियों के मार्ग पर एक ही पत्थर से तराशी गई विशाल नंदी प्रतिमा स्थापित करवाई, जिसके पास एक छोटा शिव मंदिर है। आज बहुत से भक्त मन्नत के रूप में पैदल सीढ़ियाँ चढ़कर दर्शन करते हैं।
प्रमुख उत्सव
- नवरात्रि / मैसूरु दशहरा: सबसे बड़ा उत्सव – नौ दिनों तक नवदुर्गा रूपों में श्रृंगार; विजयादशमी की प्रसिद्ध जंबू सवारी में देवी की प्रतिमा स्वर्ण हौदे में निकाली जाती है।
- आषाढ़ शुक्रवार: आषाढ़ मास के हर शुक्रवार को विशेष पूजा और भारी भीड़।
- चामुंडी वर्धंती: आषाढ़ में उत्सव मूर्ति को स्वर्ण पालकी में निकाला जाता है।
शक्तिपीठ परंपरा और आसपास के दर्शन
चामुंडेश्वरी अष्टादश महाशक्तिपीठों में प्रमुखता से गिनी जाती हैं, जबकि 51 शक्तिपीठों की प्रचलित सूचियों में इस स्थल का नाम सामान्यतः नहीं आता। मैसूरु आने वाले यात्री मंदिर के साथ मैसूरु महल, श्रीरंगपट्टण के श्री रंगनाथस्वामी मंदिर और नंजनगूड के श्रीकंठेश्वर मंदिर के दर्शन भी करते हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 7:30 से रात 9:00 बजे तक (दोपहर में कुछ समय के लिए विराम)
आषाढ़ मास के शुक्रवार, नवरात्रि और त्योहारों पर समय बदल सकता है और भीड़ बहुत अधिक रहती है।
मुख्य आकर्षण
- माँ चामुंडेश्वरी – मैसूरु राजवंश की कुलदेवी।
- एक हज़ार सीढ़ियाँ – पैदल चढ़ाई का प्राचीन मार्ग।
- विशाल नंदी – सीढ़ियों के मार्ग पर एक ही पत्थर से बनी नंदी प्रतिमा।
- महिषासुर की प्रतिमा – पहाड़ी की चोटी पर।
- पहाड़ी से मैसूरु नगर का दृश्य।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: मैसूरु जंक्शन, वहाँ से पहाड़ी लगभग 13 किमी।
- सड़क मार्ग: मैसूरु सिटी बस स्टैंड से चामुंडी पहाड़ी के लिए नियमित बसें; टैक्सी और ऑटो भी उपलब्ध। बेंगलुरु से मैसूरु लगभग 145 किमी।
- हवाई मार्ग: केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बेंगलुरु; मैसूरु में छोटा हवाई अड्डा भी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चामुंडेश्वरी मंदिर किस शक्तिपीठ से जुड़ा है?
मैसूरु नाम का चामुंडेश्वरी से क्या संबंध है?
चामुंडी पहाड़ी पर कितनी सीढ़ियाँ हैं?
चामुंडेश्वरी मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
चामुंडेश्वरी मंदिर मैसूरु शहर से कितनी दूर है?
चामुंडेश्वरी मंदिर, चामुंडी पहाड़ी, मैसूरु इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
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