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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा

Maa Bagalamukhi Temple, Nalkheda

आगर मालवा, मध्य प्रदेश माँ बगलामुखी (त्रिशक्ति स्वरूप – मध्य में बगलामुखी, साथ में लक्ष्मी और सरस्वती) निःशुल्क प्रवेश

माँ बगलामुखी मंदिर मध्य प्रदेश के आगर मालवा ज़िले के नलखेड़ा कस्बे में लखुंदर नदी के तट पर स्थित है। माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक मानी जाती हैं और उन्हें पीला रंग प्रिय होने के कारण पीतांबरा भी कहा जाता है। दतिया के पीतांबरा पीठ और कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) के बनखंडी मंदिर के साथ नलखेड़ा को देवी के प्रमुख स्थानों में गिना जाता है। शत्रु बाधा, मुकदमे और संकट से मुक्ति की कामना लेकर दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ आते हैं।

स्थल की मान्यता

स्थानीय परंपरा के अनुसार महाभारत काल में संकट के समय भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को यहाँ माँ बगलामुखी की उपासना करने को कहा था। कुछ कथाओं में युधिष्ठिर द्वारा पूजा का उल्लेख आता है। ये कथाएँ परंपरा पर आधारित हैं; मंदिर की प्रतिमा की स्थापना का कोई ऐतिहासिक लेख नहीं मिलता, इसलिए इसे स्वयंभू माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मंदिर का जीर्णोद्धार 1815 में हुआ था।

मंदिर और विग्रह

गर्भगृह में देवी त्रिशक्ति रूप में विराजती हैं – मध्य में माँ बगलामुखी और उनके दोनों ओर लक्ष्मी और सरस्वती। इसी कारण भक्त उन्हें त्रिशक्ति माता भी कहते हैं। परिसर में श्रीकृष्ण, हनुमान और भैरव की प्रतिमाएँ भी हैं। मंदिर में मन्नत के लिए हवन और अनुष्ठान कराने की परंपरा है, और भक्त पीले वस्त्र, पीले फूल, हल्दी और चने की दाल जैसी पीली सामग्री से देवी की पूजा करते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि: मंदिर का सबसे बड़ा पर्व, विशेष श्रृंगार, हवन और भारी भीड़।
  • बगलामुखी जयंती (वैशाख शुक्ल अष्टमी) पर विशेष पूजा।
  • गुप्त नवरात्रि में साधक विशेष अनुष्ठान करते हैं।

आसपास के दर्शन

नलखेड़ा आने वाले अधिकांश श्रद्धालु उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और हरसिद्धि माता के दर्शन के साथ यात्रा जोड़ते हैं। उज्जैन और इंदौर से सड़क मार्ग से एक दिन में नलखेड़ा जाकर लौटा जा सकता है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 9:00 बजे तक
  • आरती: सुबह और संध्या

नवरात्रि में भीड़ अधिक रहती है और समय में बदलाव हो सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • त्रिशक्ति माँ बगलामुखी – मध्य में बगलामुखी, दोनों ओर लक्ष्मी और सरस्वती।
  • परिसर में श्रीकृष्ण, हनुमान और भैरव की प्रतिमाएँ।
  • हवन – मन्नत और अनुष्ठान के लिए मंदिर परिसर में हवन की परंपरा।
  • लखुंदर नदी का शांत तट।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: निकटतम बड़ा स्टेशन उज्जैन जंक्शन; वहाँ से सड़क मार्ग से नलखेड़ा।
  • सड़क मार्ग: आगर, उज्जैन, शाजापुर और इंदौर से बस और टैक्सी मिलती हैं।
  • हवाई मार्ग: देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा, इंदौर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नलखेड़ा का बगलामुखी मंदिर कहाँ है?
माँ बगलामुखी मंदिर मध्य प्रदेश के आगर मालवा ज़िले के नलखेड़ा कस्बे में लखुंदर नदी के तट पर स्थित है।
नलखेड़ा में माँ बगलामुखी की प्रतिमा कैसी है?
यहाँ की प्रतिमा त्रिशक्ति स्वरूप में है – मध्य में माँ बगलामुखी और उनके दोनों ओर लक्ष्मी और सरस्वती। प्रतिमा को स्वयंभू माना जाता है।
बगलामुखी मंदिर का संबंध पांडवों से क्यों जोड़ा जाता है?
स्थानीय मान्यता है कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने यहाँ माँ बगलामुखी की उपासना की थी। यह परंपरा से चली आ रही कथा है, इसका ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता।
माँ बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का क्या महत्व है?
माँ बगलामुखी को पीतांबरा भी कहा जाता है और उन्हें पीला रंग प्रिय माना जाता है। इसलिए भक्त पीले वस्त्र पहनकर, पीले फूल, हल्दी और पीली मिठाई अर्पित कर पूजा करते हैं।
भारत में बगलामुखी के प्रमुख मंदिर कौन से हैं?
नलखेड़ा के साथ दतिया का पीतांबरा पीठ और हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले में बनखंडी का बगलामुखी मंदिर देवी के प्रमुख स्थान माने जाते हैं।

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