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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

खजराना गणेश मंदिर, इंदौर

Khajrana Ganesh Temple, Indore

Indore, मध्य प्रदेश श्री गणेश (खजराना गणेश) निःशुल्क प्रवेश

खजराना गणेश मंदिर मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के खजराना क्षेत्र में स्थित भगवान गणेश का प्रसिद्ध मंदिर है। इसे इंदौर का सबसे पूजनीय और लोकप्रिय मंदिर माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से माँगी गई मनोकामना पूरी होती है, इसलिए हर दिन, विशेषकर बुधवार और रविवार को, बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर का इतिहास होलकर वंश की महारानी देवी अहिल्याबाई होलकर से जोड़ा जाता है।

कुएँ से निकली प्रतिमा की कथा

मंदिर परंपरा के अनुसार मुगल बादशाह औरंगज़ेब के समय गणेश प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए एक कुएँ में छिपा दिया गया था। बहुत समय बाद खजराना के पुजारी पंडित मंगल भट्ट को स्वप्न में प्रतिमा के दर्शन हुए। इसके बाद प्रतिमा को कुएँ से निकाला गया और देवी अहिल्याबाई होलकर ने यहाँ मंदिर की स्थापना करवाई। कई स्रोत इसका वर्ष 1735 बताते हैं, पर इस तिथि को लेकर इतिहासकारों में मत भिन्न हैं। भट्ट परिवार आज भी मंदिर की पूजा-व्यवस्था से जुड़ा है।

मंदिर और विग्रह

यह मंदिर एक छोटी कुटिया से शुरू होकर आज विशाल परिसर बन चुका है। गर्भगृह का द्वार, बाहरी और ऊपरी दीवारें चाँदी से मढ़ी हैं। सिंदूरी गणेश प्रतिमा की आँखें हीरे की हैं, जो इंदौर के एक व्यवसायी ने भेंट की थीं। भक्त मनोकामना के लिए मंदिर की परिक्रमा कर धागा बाँधते हैं, और चढ़ावे में सोना, चाँदी व आभूषण भी अर्पित किए जाते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव (भाद्रपद): मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव, जिसकी व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन विशेष तैयारी करता है।
  • हर बुधवार और रविवार: सामान्य दिनों से कहीं अधिक भीड़।
  • विनायक चतुर्थी पर भी विशेष पूजन होता है।

आसपास के दर्शन

इंदौर में खजराना गणेश के साथ श्रद्धालु बिजासन माता मंदिर, गजानन महाराज मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर और बड़ा गणपति के दर्शन करते हैं। इंदौर से लगभग 55 किमी दूर उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 10:00 बजे तक
  • आरती: प्रातः और संध्या

बुधवार और रविवार को सबसे अधिक भीड़ रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • खजराना गणेश – सिंदूरी प्रतिमा, आँखों में हीरे।
  • चाँदी का द्वार और दीवारें – गर्भगृह का भव्य श्रृंगार।
  • परिक्रमा और धागा – मनोकामना के लिए परिक्रमा कर धागा बाँधने की परंपरा।
  • गणेश चतुर्थी का भव्य उत्सव।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: इंदौर जंक्शन से लगभग 5–6 किमी।
  • सड़क मार्ग: इंदौर शहर से ऑटो, टैक्सी और सिटी बस।
  • हवाई मार्ग: देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदौर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

खजराना गणेश की प्रतिमा कहाँ से मिली थी?
मान्यता है कि औरंगज़ेब के समय प्रतिमा को सुरक्षा के लिए एक कुएँ में छिपा दिया गया था। बाद में स्थानीय पुजारी पंडित मंगल भट्ट को स्वप्न में प्रतिमा के दर्शन हुए और उसे कुएँ से निकालकर स्थापित किया गया।
खजराना गणेश मंदिर किसने बनवाया?
परंपरा के अनुसार होलकर वंश की महारानी देवी अहिल्याबाई होलकर ने यह मंदिर बनवाया। कई स्रोत इसका वर्ष 1735 बताते हैं, पर तिथि को लेकर मत भिन्न हैं। शुरुआत में यह छोटा मंदिर था जो आज विशाल परिसर बन गया है।
खजराना मंदिर में धागा क्यों बाँधते हैं?
भक्त अपनी मनोकामना और कार्य की सफलता के लिए मंदिर की परिक्रमा कर धागा बाँधते हैं। इच्छा पूरी होने पर वे दर्शन और धन्यवाद के लिए फिर आते हैं।
खजराना गणेश मंदिर में भीड़ कब अधिक होती है?
बुधवार और रविवार को सबसे अधिक भीड़ रहती है। गणेश चतुर्थी (भाद्रपद) और गणेशोत्सव के दिनों में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
खजराना गणेश मंदिर की विशेषता क्या है?
गर्भगृह का द्वार, बाहरी और ऊपरी दीवारें चाँदी से बनी हैं और गणेश जी की आँखें हीरे की हैं, जो इंदौर के एक व्यवसायी ने भेंट की थीं। इसे इंदौर का सबसे लोकप्रिय मंदिर माना जाता है।

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