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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

कंदारिया महादेव मंदिर, खजुराहो

Kandariya Mahadeva Temple, Khajuraho

Chhatarpur, मध्य प्रदेश भगवान शिव (महादेव), शिवलिंग रूप में

कंदारिया महादेव मंदिर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह का सबसे बड़ा और सबसे भव्य मंदिर है। यह भगवान शिव को समर्पित है और चंदेल राजा विद्याधर के शासनकाल में लगभग 1025–1050 ईस्वी में बना माना जाता है। खजुराहो मंदिर समूह 1986 से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में है, और कंदारिया महादेव को मध्यकालीन भारतीय मंदिर स्थापत्य का शिखर उदाहरण माना जाता है।

इतिहास

राजा विद्याधर चंदेल वंश के प्रतापी शासक थे, जिन्होंने महमूद गजनवी के आक्रमणों का भी सामना किया। मंडप के एक स्तंभ पर अंकित लेख में मंदिर के निर्माता का नाम ‘विरिंद’ मिलता है, जिसे विद्वान विद्याधर का ही उपनाम मानते हैं। भगवान शिव चंदेल राजाओं के कुलदेव माने जाते थे। ‘कंदारिया’ नाम ‘कंदरा’ (गुफा) से जुड़ा माना जाता है – गर्भगृह को पर्वत की गुफा और ऊँचे शिखर को शिव के धाम कैलास पर्वत का प्रतीक माना गया है।

मंदिर का स्थापत्य

मंदिर लगभग 4 मीटर ऊँची जगती (चबूतरे) पर खड़ा है। प्रवेश द्वार से भीतर क्रमशः ऊँचे होते तीन मंडप हैं, जिनके बाद अंतराल और फिर गर्भगृह आता है, जिसमें शिवलिंग स्थापित है। चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। मुख्य शिखर लगभग 31 मीटर ऊँचा है और 84 लघु शिखरों से मिलकर बना है – दूर से देखने पर यह पर्वत की चोटियों की श्रृंखला जैसा लगता है।

बाहरी दीवारों पर मूर्तियों की तीन पट्टियाँ हैं, जिनमें देवी-देवता, सप्तमातृकाएँ, गणेश, वीरभद्र, अप्सराएँ, मिथुन युगल और दैनिक जीवन के दृश्य उकेरे गए हैं। प्रवेश पर पत्थर का बारीक नक्काशीदार तोरण भी देखने लायक है।

पूजा और उत्सव

कंदारिया महादेव आज ASI द्वारा संरक्षित स्मारक है और यहाँ नियमित पूजा की परंपरा नहीं है। खजुराहो में जीवंत पूजा पास के मतंगेश्वर मंदिर में होती है, जहाँ महाशिवरात्रि पर बड़ा मेला लगता है। हर वर्ष फरवरी में पश्चिमी मंदिर समूह की पृष्ठभूमि में खजुराहो नृत्य महोत्सव भी आयोजित होता है।

आसपास के दर्शन

  • देवी जगदंबी मंदिर – कंदारिया के साथ उसी चबूतरे पर।
  • लक्ष्मण मंदिर, विश्वनाथ मंदिर और चित्रगुप्त मंदिर – पश्चिमी समूह में।
  • मतंगेश्वर मंदिर – पश्चिमी समूह के बाहर, पूजित शिव मंदिर।
  • पूर्वी और दक्षिणी मंदिर समूह, जिनमें जैन मंदिर और दुलादेव मंदिर हैं।

दर्शन का समय

  • पश्चिमी मंदिर समूह: सूर्योदय से सूर्यास्त तक

मंदिर ASI द्वारा संरक्षित स्मारक है, इसलिए पश्चिमी मंदिर समूह में प्रवेश टिकट से होता है। सुबह और ढलती दोपहर की रोशनी में शिल्प सबसे सुंदर दिखते हैं।

मुख्य आकर्षण

  • मुख्य शिखर – 84 लघु शिखरों से बना, कैलास पर्वत की प्रतीकात्मक छवि।
  • बाहरी दीवारों की मूर्तिकला – देवी-देवता, सप्तमातृकाएँ, अप्सराएँ और जीवन के दृश्य।
  • गर्भगृह का शिवलिंग।
  • उसी चबूतरे पर देवी जगदंबी मंदिर और पास में चित्रगुप्त मंदिर।
  • मतंगेश्वर मंदिर – खजुराहो का पूजित शिव मंदिर।

कैसे पहुँचें

  • हवाई मार्ग: खजुराहो हवाई अड्डा (लगभग 5 किमी)।
  • रेल मार्ग: खजुराहो रेलवे स्टेशन (लगभग 8 किमी); बड़े स्टेशन झाँसी और सतना।
  • सड़क मार्ग: छतरपुर, पन्ना, सतना और झाँसी से बसें व टैक्सी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कंदारिया महादेव मंदिर किसने बनवाया?
यह मंदिर चंदेल राजा विद्याधर के शासनकाल में लगभग 1025–1050 ईस्वी में बना माना जाता है। मंडप के एक स्तंभ पर अंकित लेख में निर्माता का नाम 'विरिंद' मिलता है, जिसे विद्वान विद्याधर का ही उपनाम मानते हैं।
कंदारिया नाम का क्या अर्थ है?
'कंदारिया' शब्द 'कंदरा' यानी गुफा से जुड़ा माना जाता है। मंदिर का गर्भगृह पर्वत की गुफा जैसा और ऊँचा शिखर कैलास पर्वत जैसा कल्पित है, जहाँ भगवान शिव का वास है।
क्या कंदारिया महादेव मंदिर में पूजा होती है?
मंदिर ASI द्वारा संरक्षित स्मारक है और यहाँ नियमित पूजा की परंपरा नहीं है। खजुराहो में पूजित शिव मंदिर पास का मतंगेश्वर मंदिर है, जहाँ महाशिवरात्रि पर बड़ा मेला लगता है।
कंदारिया महादेव मंदिर की ऊँचाई कितनी है?
मंदिर लगभग 4 मीटर ऊँची जगती (चबूतरे) पर बना है और इसका शिखर लगभग 31 मीटर ऊँचा माना जाता है। यह खजुराहो का सबसे बड़ा मंदिर है।
क्या खजुराहो के मंदिर विश्व धरोहर हैं?
हाँ, खजुराहो मंदिर समूह को 1986 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। कंदारिया महादेव इस समूह का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है।

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