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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

देवी जगदंबी मंदिर, खजुराहो

Devi Jagadambi Temple, Khajuraho

Chhatarpur, मध्य प्रदेश देवी जगदंबा (प्रतिमा को पार्वती या काली के रूप में भी माना जाता है); मूल समर्पण भगवान विष्णु को

देवी जगदंबी मंदिर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह का एक सुंदर मंदिर है, जो कंदारिया महादेव मंदिर के साथ एक ही ऊँचे चबूतरे पर खड़ा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार यह चंदेल काल में लगभग 1000–1025 ईस्वी में बना और मूलतः भगवान विष्णु को समर्पित था। आज यह देवी जगदंबा (जगदंबिका) के नाम से जाना जाता है और खजुराहो के सबसे बारीक अलंकृत मंदिरों में गिना जाता है।

विष्णु मंदिर से देवी मंदिर तक

गर्भगृह के द्वार के ऊपर भगवान विष्णु की आकृति अंकित है, जो बताती है कि मंदिर पहले वैष्णव था। ASI के अनुसार मूल विष्णु प्रतिमा समय के साथ लुप्त हो गई और उसके स्थान पर लक्ष्मी की एक प्राचीन, अधूरी प्रतिमा रखी गई। इस प्रतिमा को काले रंग से रँग दिया गया और आज इसे काली या देवी जगदंबी के रूप में माना जाता है। कुछ परंपराएँ इसे माता पार्वती की प्रतिमा बताती हैं।

मंदिर और शिल्प

मंदिर कंदारिया महादेव से छोटा है, पर इसकी बाहरी दीवारों पर मूर्तियों की तीन पट्टियाँ चारों ओर घूमती हैं। इनमें विष्णु के विभिन्न रूप, अन्य देवता, सुर-सुंदरियाँ (अप्सराएँ), व्याल और मिथुन युगल उकेरे गए हैं। इसी बारीक नक्काशी के कारण इसे खजुराहो के सबसे सुसज्जित मंदिरों में गिना जाता है।

दर्शन की जानकारी

मंदिर ASI द्वारा संरक्षित पश्चिमी मंदिर समूह के भीतर है, जो सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है और जहाँ प्रवेश टिकट से होता है। फरवरी में होने वाला खजुराहो नृत्य महोत्सव इसी परिसर की पृष्ठभूमि में होता है।

आसपास के दर्शन

  • कंदारिया महादेव मंदिर – उसी चबूतरे पर, खजुराहो का सबसे बड़ा शिव मंदिर।
  • चित्रगुप्त मंदिर – उत्तर दिशा में, सूर्य देव को समर्पित।
  • लक्ष्मण मंदिर और विश्वनाथ मंदिर।
  • मतंगेश्वर मंदिर – पूजित शिव मंदिर, महाशिवरात्रि का मेला।

दर्शन का समय

  • पश्चिमी मंदिर समूह: सूर्योदय से सूर्यास्त तक

मंदिर ASI द्वारा संरक्षित पश्चिमी मंदिर समूह में है, जहाँ प्रवेश टिकट से होता है।

मुख्य आकर्षण

  • गर्भगृह में देवी की प्रतिमा – काले रंग से रँगी प्राचीन प्रतिमा।
  • द्वार पर विष्णु की आकृति – मूल वैष्णव समर्पण का प्रमाण।
  • मूर्तियों की तीन पट्टियाँ – देवता, अप्सराएँ और मिथुन युगल।
  • उसी चबूतरे पर कंदारिया महादेव मंदिर।
  • उत्तर में चित्रगुप्त मंदिर (सूर्य मंदिर)।

कैसे पहुँचें

  • हवाई मार्ग: खजुराहो हवाई अड्डा (लगभग 5 किमी)।
  • रेल मार्ग: खजुराहो रेलवे स्टेशन (लगभग 8 किमी); बड़े स्टेशन झाँसी और सतना।
  • सड़क मार्ग: छतरपुर, पन्ना, सतना और झाँसी से बसें व टैक्सी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

देवी जगदंबी मंदिर किस देवता को समर्पित था?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार यह मंदिर मूलतः भगवान विष्णु को समर्पित था, जिनकी आकृति गर्भगृह के द्वार पर आज भी दिखती है। बाद में यहाँ देवी की प्रतिमा स्थापित हुई और मंदिर देवी जगदंबी के नाम से जाना जाने लगा।
गर्भगृह की प्रतिमा किस देवी की है?
ASI के अनुसार मूल विष्णु प्रतिमा के स्थान पर बाद में एक प्राचीन, अधूरी लक्ष्मी प्रतिमा रखी गई, जिसे काले रंग से रँगा गया और जो आज काली या देवी जगदंबी के रूप में पूजी जाती है। कुछ लोग इसे पार्वती की प्रतिमा मानते हैं।
देवी जगदंबी मंदिर कब बना?
यह मंदिर चंदेल काल में लगभग 1000–1025 ईस्वी के बीच बना माना जाता है।
जगदंबी मंदिर कंदारिया महादेव से कितनी दूर है?
दोनों मंदिर पश्चिमी समूह में एक ही ऊँचे चबूतरे पर कुछ ही कदमों की दूरी पर हैं, इसलिए एक साथ देखे जाते हैं।
क्या यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर का हिस्सा है?
हाँ, देवी जगदंबी मंदिर खजुराहो मंदिर समूह का हिस्सा है, जिसे 1986 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।

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