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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री पीतांबरा पीठ, दतिया

Shri Pitambara Peeth, Datia

Datia, मध्य प्रदेश माँ पीतांबरा (बगलामुखी), माँ धूमावती; वनखंडेश्वर महादेव निःशुल्क प्रवेश

श्री पीतांबरा पीठ मध्य प्रदेश के दतिया नगर में स्थित माँ पीतांबरा (बगलामुखी) का प्रसिद्ध शक्ति स्थल और आश्रम है। दस महाविद्याओं में से एक माँ बगलामुखी को पीत (पीले) वस्त्र और पीला रंग प्रिय है, इसलिए वे यहाँ पीतांबरा माई के नाम से पूजित हैं। आश्रम परिसर में महाविद्या माँ धूमावती का मंदिर भी है, जो देश में दुर्लभ माना जाता है। नलखेड़ा (आगर मालवा) और कांगड़ा के बनखंडी मंदिर के साथ दतिया को बगलामुखी उपासना के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है।

स्वामीजी महाराज और पीठ की स्थापना

पीठ की स्थापना पूज्य स्वामीजी महाराज ने 20वीं शताब्दी के आरंभिक दशकों (1920–30 के आसपास) में की थी। उन्होंने यहीं माँ धूमावती के मंदिर की स्थापना की प्रेरणा दी और देवी उपासना पर साहित्य भी रचा। आश्रम में संस्कृत पुस्तकालय है, बच्चों को निःशुल्क संस्कृत शिक्षा दी जाती है और हर वर्ष संस्कृत शास्त्रार्थ होते हैं। मंदिर भक्तों से धन का चढ़ावा स्वीकार नहीं करता – यह इस पीठ की विशेष परंपरा है।

मंदिर और विग्रह

  • माँ पीतांबरा: मुख्य मंदिर में पीत वर्ण की देवी, जिनकी पूजा पीले वस्त्र, पीले फूल और हल्दी से होती है।
  • माँ धूमावती: विधवा स्वरूप वाली महाविद्या, जिनके दर्शन सीमित समय पर होते हैं।
  • वनखंडेश्वर महादेव: परिसर का प्राचीन शिव मंदिर, जिसके शिवलिंग को महाभारत काल से जोड़ा जाता है।
  • परशुराम, हनुमान और काल भैरव के मंदिर।

राष्ट्र रक्षा अनुष्ठान की मान्यता

आश्रम की परंपरा में प्रचलित कथा है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय राष्ट्र रक्षा के लिए यहाँ एक बड़ा यज्ञ किया गया था। इस कथा के कारण पीतांबरा पीठ को “राष्ट्र रक्षा” की देवी से भी जोड़ा जाता है। यह आस्था पर आधारित कथा है।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि – विशेष पूजा और भारी भीड़।
  • शनिवार – हर सप्ताह सबसे अधिक श्रद्धालु।
  • बगलामुखी जयंती (वैशाख शुक्ल अष्टमी) पर विशेष पूजा।

दतिया का वीर सिंह देव महल और पास का ओरछा (राम राजा मंदिर) भी यात्रा में जोड़े जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से दोपहर तक और शाम से रात लगभग 10:00 बजे तक (बीच में कुछ समय पट बंद)
  • आरती: सुबह और संध्या

माँ धूमावती के दर्शन सीमित समय (प्रायः सुबह और शाम की आरती के आसपास) होते हैं। शनिवार को भीड़ अधिक रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ पीतांबरा – पीत वर्ण की बगलामुखी।
  • माँ धूमावती – दस महाविद्याओं में से एक, जिनका मंदिर दुर्लभ माना जाता है।
  • वनखंडेश्वर महादेव – महाभारत काल से जोड़ा जाने वाला प्राचीन शिवलिंग।
  • परशुराम, हनुमान और काल भैरव के मंदिर।
  • आश्रम का संस्कृत पुस्तकालय।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: दतिया रेलवे स्टेशन (लगभग 3 किमी); झाँसी जंक्शन (लगभग 29 किमी)।
  • सड़क मार्ग: झाँसी और ग्वालियर से बस और टैक्सी।
  • हवाई मार्ग: ग्वालियर हवाई अड्डा (लगभग 75 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पीतांबरा पीठ में किस देवी की पूजा होती है?
पीतांबरा पीठ की मुख्य देवी माँ पीतांबरा हैं, जो दस महाविद्याओं में से एक माँ बगलामुखी का स्वरूप हैं। आश्रम में माँ धूमावती का मंदिर भी है।
पीतांबरा पीठ की स्थापना किसने की?
पीतांबरा पीठ की स्थापना पूज्य स्वामीजी महाराज ने 20वीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में की थी। धूमावती मंदिर की स्थापना भी उन्हीं की प्रेरणा से हुई।
पीतांबरा पीठ और 1962 के युद्ध की क्या कथा है?
मान्यता है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय राष्ट्र रक्षा के लिए यहाँ एक बड़ा अनुष्ठान (यज्ञ) किया गया था। यह आश्रम की परंपरा में प्रचलित कथा है।
पीतांबरा पीठ में शनिवार का क्या महत्व है?
शनिवार को पीतांबरा पीठ में सबसे अधिक श्रद्धालु आते हैं। भक्त पीले वस्त्र पहनकर पीली सामग्री से माँ की पूजा करते हैं।
दतिया रेलवे स्टेशन से पीतांबरा पीठ कितनी दूर है?
पीतांबरा पीठ दतिया रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किमी दूर है। झाँसी से इसकी दूरी लगभग 29 किमी है।

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