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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

चतुर्भुज मंदिर, ओरछा

Chaturbhuj Temple, Orchha

ओरछा, मध्य प्रदेश भगवान विष्णु (चतुर्भुज); वर्तमान में राधा-कृष्ण की प्रतिमा निःशुल्क प्रवेश

चतुर्भुज मंदिर मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक नगर ओरछा में राम राजा मंदिर के ठीक सामने स्थित भगवान विष्णु का विशाल मंदिर है। “चतुर्भुज” का अर्थ है चार भुजाओं वाला – यह नाम विष्णु के उस स्वरूप से आया है, जिनके अवतार श्रीराम हैं। 16वीं शताब्दी में बुंदेला राजाओं द्वारा बनवाया गया यह मंदिर अपने ऊँचे शिखरों और किले जैसी बनावट के कारण ओरछा की सबसे प्रभावशाली इमारतों में गिना जाता है।

निर्माण का इतिहास

मंदिर का निर्माण ओरछा के राजा मधुकर शाह ने मुग़ल सम्राट अकबर के काल में आरंभ कराया और उनके पुत्र वीर सिंह देव ने इसे पूरा कराया। माना जाता है कि यह मंदिर रानी गणेश कुंवरि के लिए बनवाया गया था, जो अयोध्या से राम की प्रतिमा लाने का प्रण लेकर गई थीं।

राम राजा मंदिर से संबंध

कथा के अनुसार रानी अयोध्या से राम की प्रतिमा लेकर लौटीं, तब तक यह मंदिर बन रहा था, इसलिए प्रतिमा को अस्थायी रूप से रानी महल में रखा गया। जब उसे चतुर्भुज मंदिर में ले जाने का समय आया, तो प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हटी। रानी महल ही राम राजा मंदिर बन गया, और चतुर्भुज मंदिर लंबे समय तक प्रतिमा के बिना रहा। आज यहाँ राधा-कृष्ण की प्रतिमा की पूजा होती है। दोनों मंदिर एक ही अक्ष पर आमने-सामने बने हैं।

वास्तुकला

पूर्वमुखी यह मंदिर एक ऊँचे चबूतरे पर बना है, जहाँ तक खड़ी सीढ़ियाँ जाती हैं। इसकी शैली में नागर मंदिर परंपरा के साथ बुंदेला किलों और महलों की झलक मिलती है। मुख्य मंडप क्रूस (क्रॉस) आकार का है और बाहरी दीवारों पर कमल की आकृतियाँ उकेरी गई हैं। इसके ऊँचे शिखर ओरछा में दूर से दिखाई देते हैं और इसे अपने समय के सबसे ऊँचे हिंदू मंदिरों में गिना जाता है।

आसपास के दर्शन

सामने राम राजा मंदिर, पास में लक्ष्मी नारायण मंदिर, ओरछा किला, जहाँगीर महल और बेतवा तट की छतरियाँ एक ही दिन में देखी जा सकती हैं। राम नवमी और विवाह पंचमी पर ओरछा में विशेष चहल-पहल रहती है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह से शाम तक (लगभग सूर्योदय से सूर्यास्त)

राम राजा मंदिर के दर्शन समय के अनुसार यात्रा की योजना बनाएँ, क्योंकि दोनों मंदिर आमने-सामने हैं।

मुख्य आकर्षण

  • ऊँचे शिखर – ओरछा के दूर से दिखने वाले शिखर।
  • क्रॉस (क्रूस) आकार का मंडप और कमल की नक्काशी।
  • ऊँचे चबूतरे तक जाने वाली सीढ़ियाँ।
  • सामने राम राजा मंदिर, एक ही अक्ष पर।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: झाँसी जंक्शन (लगभग 16 किमी); ओरछा में छोटा स्टेशन भी है।
  • सड़क मार्ग: झाँसी से टैक्सी, ऑटो और बस।
  • हवाई मार्ग: ग्वालियर या खजुराहो हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चतुर्भुज मंदिर किसने बनवाया?
चतुर्भुज मंदिर का निर्माण ओरछा के बुंदेला राजा मधुकर शाह ने 16वीं शताब्दी में आरंभ कराया और उनके पुत्र वीर सिंह देव ने इसे पूरा कराया। माना जाता है कि यह रानी गणेश कुंवरि के लिए बनवाया गया था।
चतुर्भुज नाम का क्या अर्थ है?
चतुर्भुज का अर्थ है चार भुजाओं वाला। यह नाम भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप से आया है, जिनके अवतार श्रीराम हैं।
चतुर्भुज मंदिर में राम की प्रतिमा क्यों नहीं है?
कथा के अनुसार मंदिर राम की प्रतिमा के लिए बना था, पर प्रतिमा अस्थायी रूप से जिस रानी महल में रखी गई थी, वहाँ से नहीं हटी। वही रानी महल राम राजा मंदिर बन गया।
चतुर्भुज मंदिर में अब किसकी पूजा होती है?
वर्तमान में चतुर्भुज मंदिर में राधा-कृष्ण की प्रतिमा की पूजा होती है।
चतुर्भुज मंदिर की वास्तुकला की क्या विशेषता है?
यह मंदिर ऊँचे चबूतरे पर बना है और इसमें मंदिर, किले और महल – तीनों की झलक मिलती है। इसका मुख्य मंडप क्रूस आकार का है और बाहरी दीवारों पर कमल की नक्काशी है। इसके ऊँचे शिखर ओरछा में दूर से दिखाई देते हैं।

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