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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

अमृतेश्वर मंदिर, रतनवाड़ी

Amruteshwar Temple, Ratanwadi

Ahmednagar, महाराष्ट्र भगवान शिव (अमृतेश्वर) निःशुल्क प्रवेश

अमृतेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (पूर्व नाम अहमदनगर) जिले की अकोले तालुका के रतनवाड़ी गाँव में स्थित भगवान शिव का प्राचीन पाषाण मंदिर है। यह सह्याद्रि की पहाड़ियों के बीच रतनगढ़ किले की तलहटी में प्रवरा नदी के तट पर, प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भंडारदरा से लगभग 20 किमी दूर है।

इतिहास

अधिकांश स्रोत इस मंदिर को शिलाहार शासकों से जोड़ते हैं। एक मान्यता के अनुसार शिलाहारों ने गोदावरी से भीमा तक की प्रमुख नदियों के उद्गम के पास बारह मंदिर बनवाए थे, जिनमें प्रवरा के उद्गम के निकट यह मंदिर भी है। निर्माण काल को लेकर मतभेद है – कुछ स्रोत इसे 9वीं शताब्दी का और कुछ 10वीं-11वीं शताब्दी का मानते हैं। पेशवा काल के एक अभिलेख में रतनगढ़ अभियान के समय इस मंदिर में मन्नत और बाद में दीप-नैवेद्य के लिए दान का उल्लेख मिलता है।

मंदिर और नक्काशी

मंदिर काले पाषाण को बिना चूने या गारे के जोड़कर बनाया गया है और इसके शिखर व मूर्तिकला को भूमिज शैली से जोड़ा जाता है। गर्भगृह के द्वार पर कीर्तिमुख, शंख और कमल-लता की नक्काशी है। बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं, पौराणिक प्रसंगों और समुद्र मंथन के दृश्य उकेरे गए हैं, और पत्थर की जालीदार खिड़कियों से भीतर प्रकाश आता है।

विष्णु तीर्थ

मंदिर के पास एक सीढ़ीदार चौकोर कुंड है, जिसे स्थानीय लोग विष्णु तीर्थ कहते हैं। इसकी दीवारों के छोटे आलों में भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों की मूर्तियाँ हैं। स्थानीय लोग मंदिर और कुंड को समुद्र मंथन से निकले “अमृत” की कथा से जोड़ते हैं।

यात्रा

भंडारदरा से सड़क मार्ग से रतनवाड़ी पहुँचा जाता है; कुछ मौसम में आर्थर झील पार नाव का विकल्प भी रहता है। रतनगढ़ ट्रेक करने वाले यात्री प्रायः यहीं से चढ़ाई शुरू करते हैं। महाशिवरात्रि और श्रावण के सोमवार को आसपास के गाँवों से श्रद्धालु आते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सामान्यतः दिन के उजाले में, लगभग सुबह 6:00 से शाम 6:00 बजे तक

यह एक ग्रामीण मंदिर है; महाशिवरात्रि और श्रावण के सोमवार को अधिक श्रद्धालु आते हैं। वर्षा ऋतु में रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं।

मुख्य आकर्षण

  • अमृतेश्वर शिवलिंग – प्राचीन गर्भगृह में।
  • पाषाण नक्काशी – कीर्तिमुख, समुद्र मंथन का दृश्य, देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और जालीदार खिड़कियाँ।
  • विष्णु तीर्थ – सीढ़ीदार चौकोर कुंड, जिसकी दीवारों के छोटे आलों में विष्णु के विभिन्न रूप।
  • रतनगढ़ किला और भंडारदरा (आर्थर झील)।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: भंडारदरा से लगभग 20 किमी सड़क से; मानसून के बाद आर्थर झील पार नाव से भी पहुँचा जाता है।
  • रेल मार्ग: इगतपुरी रेलवे स्टेशन, वहाँ से सड़क द्वारा भंडारदरा होकर।
  • हवाई मार्ग: नासिक (ओझर) या मुंबई हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अमृतेश्वर मंदिर कितना पुराना है?
अधिकांश स्रोत इस मंदिर को शिलाहार शासकों से जोड़ते हैं, लेकिन तिथि को लेकर मतभेद है – कुछ इसे 9वीं शताब्दी का और कुछ 10वीं-11वीं शताब्दी का बताते हैं।
अमृतेश्वर मंदिर कहाँ है?
मंदिर अहिल्यानगर (अहमदनगर) जिले की अकोले तालुका के रतनवाड़ी गाँव में, रतनगढ़ किले की तलहटी में प्रवरा नदी के तट पर है। यह भंडारदरा से लगभग 20 किमी दूर है।
विष्णु तीर्थ क्या है?
मंदिर के पास एक सीढ़ीदार चौकोर कुंड है, जिसे स्थानीय लोग विष्णु तीर्थ कहते हैं। इसकी दीवारों के छोटे आलों में भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों की मूर्तियाँ हैं।
अमृतेश्वर मंदिर की वास्तुकला में क्या खास है?
मंदिर काले पाषाण से बिना चूने या गारे के जोड़ा गया है। गर्भगृह के द्वार पर कीर्तिमुख और लता-नक्काशी, बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं और समुद्र मंथन के दृश्य तथा पत्थर की जालीदार खिड़कियाँ इसकी विशेषता हैं।
अमृतेश्वर मंदिर जाने का अच्छा समय कब है?
मानसून के बाद अक्टूबर से फरवरी तक का समय अच्छा है, जब भंडारदरा क्षेत्र हरा-भरा रहता है और रास्ते सुगम होते हैं। श्रावण और महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु अधिक आते हैं।

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