श्री खंडोबा मंदिर पुणे ज़िले की पुरंदर तालुका में जेजुरी नगर की पहाड़ी (जेजुरी गढ़) पर स्थित महाराष्ट्र का सबसे प्रसिद्ध खंडोबा तीर्थ है। खंडोबा – जिन्हें खंडेराव, मल्हारी मार्तंड और मल्हार भी कहते हैं – भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं और महाराष्ट्र के असंख्य परिवारों के कुलदैवत हैं। “येळकोट येळकोट जय मल्हार” के जयघोष और हवा में उड़ते भंडारे (हल्दी) से पीला दिखने वाला यह गढ़ “सोन्याची जेजुरी” कहलाता है।
मणि-मल्ल की कथा
कथा के अनुसार मणि और मल्ल नाम के दो असुर भाइयों ने ब्रह्मा जी से वर पाकर लोगों पर अत्याचार शुरू कर दिया। तब भगवान शिव ने मार्तंड भैरव (खंडोबा) रूप में अवतार लेकर उनसे युद्ध किया। एक असुर का वध हुआ और दूसरे ने जनसेवा का वचन देकर क्षमा पाई। मान्यता है कि जेजुरी गढ़ से ही खंडोबा ने इस क्षेत्र पर राज किया। उनकी पहली पत्नी म्हालसा गढ़ पर उनके साथ पूजी जाती हैं, जबकि दूसरी पत्नी बानाई का मंदिर सीढ़ियों के मार्ग में है।
मंदिर और गढ़
यहाँ खंडोबा की उपासना 12वीं-13वीं शताब्दी से चली आ रही मानी जाती है और वर्तमान मंदिर का स्वरूप पेशवा काल में बना। मंदिर हेमाडपंती शैली में पत्थर और चूने से बना है। अष्टकोणीय परकोटे से घिरे प्रांगण के बीच मुख्य मंदिर है, जिसके गर्भगृह में शिवलिंग और खंडोबा-म्हालसा की युगल मूर्तियाँ हैं। प्रांगण में पीतल मढ़ा एक विशाल कछुआ है। गढ़ तक लगभग 200 सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं, जिनके मार्ग में मेहराबें और अनेक दीपमालाएँ बनी हैं। 1737–39 के वसई अभियान के बाद चिमाजी अप्पा पुर्तगाली चर्च के जो घंटे लाए, उनमें से एक यहाँ लगाया गया।
पूजा और भंडारा
श्रद्धालु खंडोबा को भंडारा (हल्दी), बेलपत्र और फूल चढ़ाते हैं तथा भोग में प्याज़ और सब्ज़ियों से बने व्यंजन भी अर्पित किए जाते हैं। नवविवाहित जोड़े और परिवार कुलदेवता के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं। गोंधळ और जागरण जैसी लोक परंपराएँ भी खंडोबा उपासना का अंग हैं।
प्रमुख उत्सव
- सोमवती अमावस्या: खंडोबा-म्हालसा की पालकी कऱ्हा नदी पर स्नान के लिए जाती है; भंडारे से पूरा मार्ग पीला हो जाता है।
- चंपा षष्ठी – मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा से षष्ठी तक छह दिन का उत्सव।
- चैत्र पूर्णिमा की यात्रा।
आसपास के दर्शन
जेजुरी से अष्टविनायक का मोरगाँव मयूरेश्वर मंदिर पास ही है। पुरंदर क्षेत्र में ही पहाड़ी पर स्थित भुलेश्वर मंदिर और ऐतिहासिक पुरंदर किला भी देखे जा सकते हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात 9:00 बजे तक
- आरती: सुबह और संध्या
सोमवती अमावस्या, चंपा षष्ठी और चैत्र पूर्णिमा पर भारी भीड़ रहती है।
मुख्य आकर्षण
- गर्भगृह – शिवलिंग और खंडोबा-म्हालसा की युगल मूर्तियाँ।
- घोड़े पर सवार योद्धा रूप खंडोबा की मूर्ति।
- प्रांगण में पीतल मढ़ा विशाल कछुआ।
- सीढ़ियों पर मेहराबें और अनेक दीपमालाएँ।
- सीढ़ियों के मार्ग में हेगडी प्रधान और देवी बानाई के मंदिर।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: जेजुरी रेलवे स्टेशन (पुणे–मिरज लाइन) – गाँव में ही, वहाँ से ऑटो या पैदल गढ़ की तलहटी तक।
- सड़क मार्ग: पुणे से सासवड होकर लगभग 50 किमी; स्वारगेट से एसटी बसें नियमित चलती हैं।
- हवाई मार्ग: पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 60 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
खंडोबा कौन हैं?
जेजुरी को 'सोन्याची जेजुरी' क्यों कहते हैं?
जेजुरी मंदिर तक कितनी सीढ़ियाँ हैं?
सोमवती अमावस्या पर जेजुरी में क्या होता है?
जेजुरी मंदिर में घंटा वसई से क्यों लाया गया?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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Solapur, महाराष्ट्र श्री स्वामी समर्थ महाराज वटवृक्ष मंदिर, अक्कलकोट श्री स्वामी समर्थ महाराज (दत्तात्रेय परंपरा के संत, दत्त अवतार माने जाते हैं)
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रायगढ़, महाराष्ट्र एलिफेंटा गुफाएँ (घारापुरी) – शिव गुफा मंदिर, मुंबई के पास भगवान शिव – गर्भगृह में शिवलिंग; सदाशिव (त्रिमूर्ति) स्वरूप
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Beed, महाराष्ट्र खंडोबा मंदिर, बीड श्री खंडोबा (मल्हारी मार्तंड, शिव स्वरूप) और म्हालसा
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पुणे, महाराष्ट्र पळसनाथ मंदिर (उजनी जलाशय), पळसदेव, इंदापुर भगवान शिव (पळसनाथ)
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पुणे, महाराष्ट्र तुलशीबाग राम मंदिर, पुणे श्रीराम, सीता और लक्ष्मण; परिसर में हनुमान, गणेश, विट्ठल-रुक्मिणी, दत्तात्रेय, शिव
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Ambarnath, महाराष्ट्र अंबरेश्वर शिव मंदिर, अंबरनाथ भगवान शिव (अंबरेश्वर)