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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

पळसनाथ मंदिर (उजनी जलाशय), पळसदेव, इंदापुर

Palasnath Temple (Ujani Backwaters), Palasdev, Indapur

पुणे, महाराष्ट्र भगवान शिव (पळसनाथ) निःशुल्क प्रवेश

पळसनाथ मंदिर पुणे ज़िले की इंदापुर तालुका के पळसदेव गाँव का प्राचीन शिव मंदिर है, जो भीमा नदी पर बने उजनी बाँध के जलाशय में डूबा हुआ है। 40 से अधिक वर्षों से यह मंदिर अधिकांश समय पानी के नीचे रहता है और केवल तब दिखाई देता है जब सूखे या भीषण गर्मी में जल स्तर बहुत घट जाता है। तब इसका ऊँचा शिखर पानी से उभरता है और दूर-दूर से लोग इसे देखने आते हैं।

इतिहास और स्थापत्य

स्थापत्य के आधार पर पळसनाथ मंदिर को यादव काल (लगभग 13वीं शताब्दी) का माना जाता है। पश्चिमाभिमुख इस मंदिर में गर्भगृह, अंतराल और तीन मुखमंडपों वाला सभामंडप है। मंदिर मुख्यतः पत्थर का है, पर गर्भगृह का भूमिज शैली का शिखर ईंटों से बना है – सात तलों (सप्तभूम) वाला यह शिखर आज भी खड़ा है, जबकि अन्य शिखर गिर चुके हैं। वेदिकाओं पर नटेश शिव, राम-लक्ष्मण और हनुमान के शिल्प दिखते हैं। पास ही विष्णु मंदिर और सरडेश्वर मंदिर के अवशेष हैं, जिसे इस समूह में सबसे पुराना माना जाता है।

आज की पूजा

मंदिर के डूबने के बाद यहाँ नियमित पूजा बंद हो गई। गाँव वालों ने शिवलिंग को पळसदेव गाँव में बने नए मंदिर में स्थापित किया, जहाँ अब श्रद्धालु दर्शन करते हैं। जल स्तर घटने के वर्षों में पुराना मंदिर फिर से श्रद्धालुओं और धरोहर प्रेमियों का केंद्र बन जाता है।

संरक्षण की चिंता

लगातार पानी में रहने से ईंटों के शिखर के गिरने का ख़तरा बताया गया है। धरोहर विशेषज्ञ मंदिर को बचाने के उपाय सुझाते रहे हैं। जल स्तर घटने पर मंदिर तक जाते समय कीचड़ और गहरे पानी से सावधान रहें।

आसपास के दर्शन

उजनी जलाशय का भिगवण क्षेत्र पक्षी दर्शन के लिए प्रसिद्ध है। इंदापुर तालुका में ही भीमा-नीरा संगम पर नीरा नरसिंहपुर का लक्ष्मी नृसिंह मंदिर है।

दर्शन का समय

  • पुराना मंदिर: केवल तब दिखता है जब उजनी जलाशय का जल स्तर बहुत घट जाता है (प्रायः सूखे वर्षों की गर्मियों में)।
  • गाँव का नया मंदिर: दिन में खुला रहता है।

जलाशय में पानी रहने पर पुराने मंदिर तक जाना सुरक्षित नहीं है।

मुख्य आकर्षण

  • पानी से उभरा सात तलों वाला शिखर – भूमिज शैली।
  • वेदिका पर नटेश शिव, राम-लक्ष्मण और हनुमान के शिल्प।
  • पास का सरडेश्वर मंदिर और विष्णु मंदिर के अवशेष।
  • उजनी जलाशय का विस्तृत दृश्य और आसपास पक्षी दर्शन।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: पुणे–सोलापुर राजमार्ग के पास; इंदापुर से लगभग 22 किमी। पुणे से भिगवण होकर पहुँचा जाता है।
  • रेल मार्ग: भिगवण रेलवे स्टेशन (पुणे–सोलापुर लाइन) निकट है।
  • हवाई मार्ग: पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पळसनाथ मंदिर पानी में क्यों डूबा रहता है?
भीमा नदी पर उजनी बाँध बनने के बाद पळसदेव का पुराना मंदिर जलाशय के भीतर आ गया। यह 40 से अधिक वर्षों से अधिकांश समय पानी में डूबा रहता है।
पळसनाथ मंदिर कब दिखाई देता है?
जब सूखे या भीषण गर्मी में उजनी का जल स्तर बहुत नीचे चला जाता है, तब मंदिर पानी से बाहर दिखता है। बाँध बनने के बाद यह केवल कुछ ही वर्षों में पूरी तरह उभरा है।
पळसनाथ मंदिर कितना पुराना है?
स्थापत्य के आधार पर इसे यादव काल (लगभग 13वीं शताब्दी) का माना जाता है। पास का सरडेश्वर मंदिर इस समूह में सबसे पुराना, लगभग 12वीं शताब्दी का बताया जाता है।
क्या पळसनाथ मंदिर में पूजा होती है?
डूबे रहने के कारण पुराने मंदिर में नियमित पूजा बंद हो गई। गाँव वालों ने शिवलिंग को पळसदेव गाँव के नए मंदिर में स्थापित किया, जहाँ अब पूजा होती है।
पळसनाथ मंदिर का शिखर किससे बना है?
मंदिर मुख्य रूप से पत्थर का है, पर गर्भगृह का शिखर ईंटों से बना है। सात तलों वाला यह भूमिज शैली का शिखर आज भी खड़ा है, हालाँकि लगातार पानी में रहने से इसके गिरने का ख़तरा बताया जाता है।

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