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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

तुलशीबाग राम मंदिर, पुणे

Tulshibaug Ram Temple, Pune

पुणे, महाराष्ट्र श्रीराम, सीता और लक्ष्मण; परिसर में हनुमान, गणेश, विट्ठल-रुक्मिणी, दत्तात्रेय, शिव निःशुल्क प्रवेश

तुलशीबाग राम मंदिर पुणे के पुराने शहर में, प्रसिद्ध तुलशीबाग बाज़ार के बीचोंबीच स्थित श्रीराम का पेशवा कालीन मंदिर है। लगभग एक एकड़ में फैले इस परिसर में राम, सीता और लक्ष्मण के साथ कई अन्य देवताओं के मंदिर हैं। बाहर बाज़ार की चहल-पहल और भीतर शांत मंदिर – यही तुलशीबाग की पहचान है।

इतिहास

मंदिर पुणे के सूबेदार नारो अप्पाजी खिरे (1700–1775) ने बनवाया, जिन्हें आगे चलकर “तुलशीबागवाले” कहा गया। 1761 के पानीपत युद्ध के बाद उन्होंने यह भूमि, जो पहले तुलसी का बाग थी, खरीदकर राम मंदिर का निर्माण आरंभ किया। निर्माण 1763 में शुरू होकर 1795 में पूर्ण हुआ। मंदिर का ऊँचा शिखर और सभामंडप 1884 में नंदराम नाईक ने पूरे कराए। मंदिर के उत्तर में नारो अप्पाजी के वंशजों के निवास के लिए एक बड़ा वाड़ा भी बनाया गया था।

मंदिर और विग्रह

गर्भगृह में राम, सीता और लक्ष्मण के विग्रह हैं, जिन्हें उमाजीबाबा पंढरपूरकर ने गढ़ा और नवंबर 1765 में प्रतिष्ठित किया गया। राम मंदिर के सामने छोटे मंदिर में काले पत्थर के हनुमान हाथ जोड़े श्रीराम की ओर मुख किए खड़े हैं; यह विग्रह 1767 में स्थापित हुआ। विग्रहों के लिए सोने, चाँदी, मोती और हीरे के आभूषण बनवाए गए थे। परिसर में गणेश, विट्ठल-रुक्मिणी, दत्तात्रेय और शिव के मंदिर भी हैं। भीतर की लकड़ी की कारीगरी विशेष रूप से आकर्षक है। मंदिर का प्रबंधन श्री रामजी संस्थान करता है।

प्रमुख उत्सव

  • राम नवमी (चैत्र): हर वर्ष पारंपरिक राम जन्मोत्सव – सबसे बड़ा उत्सव।
  • गणेशोत्सव: पास का तुलशीबाग गणपति पुणे का मानाचा चौथा गणपति है।

आसपास के दर्शन

तुलशीबाग से पैदल दूरी पर दगडूशेठ गणपति, तांबडी जोगेश्वरी, कसबा गणपति और विश्रामबाग वाड़ा हैं। पुराने पुणे के मंदिरों के दर्शन के साथ तुलशीबाग बाज़ार की खरीदारी भी की जा सकती है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से रात लगभग 9:00 बजे तक (दोपहर में कुछ समय बंद रह सकता है)
  • आरती: सुबह और संध्या

राम नवमी पर विशेष उत्सव और भीड़ रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • 1765 में प्रतिष्ठित राम, सीता और लक्ष्मण के विग्रह।
  • राम के सामने हाथ जोड़े काले पत्थर के हनुमान।
  • ऊँचा शिखर और लकड़ी का सभामंडप।
  • चारों ओर पुणे का प्रसिद्ध तुलशीबाग बाज़ार।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: पुणे जंक्शन रेलवे स्टेशन (लगभग 4 किमी)।
  • सड़क मार्ग: तुलशीबाग बाजीराव रोड और लक्ष्मी रोड के बीच है; स्वारगेट बस अड्डा लगभग 2.5 किमी। बाज़ार में वाहन ले जाना कठिन है, पैदल जाना बेहतर।
  • हवाई मार्ग: पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, लोहगाँव (लगभग 12 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तुलशीबाग राम मंदिर किसने बनवाया?
मंदिर पेशवा काल में पुणे के सूबेदार नारो अप्पाजी खिरे (तुलशीबागवाले) ने 1761 के पानीपत युद्ध के बाद बनवाया। निर्माण 1763 में आरंभ होकर 1795 में पूर्ण हुआ।
तुलशीबाग नाम कैसे पड़ा?
मंदिर जिस भूमि पर बना, वह पहले तुलसी का बाग (उद्यान) था। इसी से इस क्षेत्र का नाम तुलशीबाग पड़ा, जो आज पुणे का प्रसिद्ध बाज़ार है।
तुलशीबाग में राम-सीता-लक्ष्मण के विग्रह किसने बनाए?
राम, सीता और लक्ष्मण के विग्रह उमाजीबाबा पंढरपूरकर ने गढ़े और ये नवंबर 1765 में स्थापित किए गए। हनुमान का विग्रह 1767 में स्थापित हुआ।
तुलशीबाग राम मंदिर परिसर में और कौन से मंदिर हैं?
परिसर में गणेश, विट्ठल-रुक्मिणी, दत्तात्रेय और शिव के मंदिर हैं, तथा राम मंदिर के सामने हनुमान का छोटा मंदिर है।
तुलशीबाग राम मंदिर का प्रबंधन कौन करता है?
मंदिर का प्रबंधन श्री रामजी संस्थान करता है। 2009 में परिसर के जीर्णोद्धार की तीन वर्षीय परियोजना भी आरंभ हुई थी।

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